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सुप्रीम कोर्ट बोला-कुत्ते इंसानी डर पहचानते हैं, इसलिए काटते हैं:वकील बोले- देश में सिर्फ 5 सरकारी शेल्टर, हमें इन्फ्रास्ट्रक्चर की जरूरत नई दिल्ली

प्रदेश खबर स्टेट हेड प्रवीण कुमार दुबे

 

सुप्रीम कोर्ट में आवारा कुत्तों से जुड़े मामलों पर गुरुवार को लगातार दूसरे दिन ढाई घंटे सुनवाई हुई। कोर्ट ने कुत्तों के बिहेवियर को लेकर चर्चा की। जस्टिस नाथ ने कहा कि कुत्ते इंसानों का डर पहचान लेते हैं इसलिए काटते हैं। इस पर एक वकील (कुत्तों के फेवर वाले) ने इनकार किया। फिर जस्टिस ने जवाब दिया कि, अपना सिर मत हिलाइए, ये बात मैं पर्सनल एक्सपीरियंस से बोल रहा हूं।

उधर याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि राज्यों ने जो आंकड़े दिए हैं। उनमें से किसी ने यह नहीं बताया कि नगर पालिकाओं की तरफ से कितने शेल्टर चलाए जाते हैं। देश में सिर्फ 5 सरकारी शेल्टर हैं। इनमें से हर एक में 100 कुत्ते रह सकते हैं। हमे इंफ्रास्ट्रक्चर की जरूरत है।

इससे पहले सुनवाई के दौरान एनिमल वेलफेयर की तरफ से दलील दे रहे एडवोकेट सीयू सिंह ने कुत्तों को हटाने या शेल्टर होम भेजने पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि कुत्ते हटाने से चूहों की आबादी बढ़ेगी। इस पर कोर्ट ने मजाकिया अंदाज में कहा- तो क्या बिल्लियां ले आएं?

इस मामले पर पिछले 7 महीनों में छह बार सुनवाई हो चुकी है। पिछले साल नवंबर में सुप्रीम कोर्ट ने स्कूलों, अस्पतालों, बस स्टैंड, स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स और रेलवे स्टेशनों से आवारा कुत्तों को हटाने का आदेश दिया था। इसके साथ ही कोर्ट ने कहा था कि इन जानवरों को तय शेल्टर में ट्रांसफर किया जाए।

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सुनवाई के दौरान 6 बड़ी बातें…

  • याचिकाकर्ता के एक वकील ने कहा हर पालतू कुत्ते का मालिक होता है। जबकि आवारा कुत्ते का कोई मालिक नहीं होता। न ही यह राज्य की जिम्मेदारी है। हालांकि राज्य का काम वैक्सीनेशन वगैरह देना है। ABC नियम ऐसे होने चाहिए कि मेरे घर तक का रास्ता सुरक्षित रहे।
  • वकील (कुत्तों को हटाने के पक्ष में) ने कहा कि अदालत का आदेश सिर्फ संस्थानों तक सीमित नहीं होना चाहिए। बल्कि उसे रिहायशी इलाकों पर भी लागू किया जाना चाहिए। कुत्ते को समझाना (काउंसलिंग) संभव नहीं है, लेकिन कुत्ते की देखभाल करने वाले या मालिक को समझाया जा सकता है।
  • हर डॉग लवर और एनजीओ को याचिका लगाने में एक तय राशि जमा करनी होती है। इस शर्त को हटाया जाए। इस पर कोर्ट ने हल्के अंदाज में जवाब दिया- अगर हमने यह शर्त नहीं रखी होती, तो यहां पंडाल लगाना पड़ता।
  • कुत्तों की मॉनिटरिंग के लिए पहले उनकी गिनती जरूरी है जो आखिरी बार 2009 में हुई थी। सिर्फ दिल्ली में 5,60,000 कुत्ते थे। सेंटर्स की हाउसिंग कैपेसिटी के हिसाब से ही तय संख्या में जानवरों को पकड़ा जाना चाहिए। कैपेसिटी है ही नहीं, तो आप उन्हें कहां रखेंगे?
  • एक वकील (कुत्तों को न हटाने के फेवर में) ने कहा- दिल्ली में चूहे और बंदरों का भी खतरा है। अगर कुत्तों को अचानक हटा दिया जाएगा तो चूहों की आबादी बढ़ जाएगी। वे बीमारी फैलाने वाले होते हैं। कुत्ते संतुलन बनाए रखते हैं।
  • इस पर जस्टिस मेहता ने कहा- यह कैसा संबंध हैं? ऐसे तो कुत्ते और बिल्लियां आपस में दुश्मन होते हैं। तो हमें और बिल्लियों को बढ़ावा देना चाहिए। हमने हर कुत्ते को सड़क से हटाने का निर्देश नहीं दिया है। उनके साथ नियमों के अनुसार व्यवहार किया जाना चाहिए।
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