ताजा ख़बरेंदेशब्रेकिंग न्यूज़
Trending

कोरिंगा वन्यजीव अभयारण्य: बंगाल की खाड़ी के तट पर मैंग्रोव वनों का जैव विविधता से भरपूर संसार

बंगाल की खाड़ी के किनारे स्थित कोरिंगा वन्यजीव अभयारण्य 120 से अधिक पक्षी प्रजातियों का घर है। यह अभयारण्य संरक्षण और सतत पर्यटन का उत्कृष्ट उदाहरण है।

कोरिंगा वन्यजीव अभयारण्य: बंगाल की खाड़ी के तट पर मैंग्रोव वनों में बसता जैव विविधता का अद्भुत संसार

आंध्र प्रदेश।बंगाल की खाड़ी के किनारे फैला कोरिंगा वन्यजीव अभयारण्य न केवल आंध्र प्रदेश बल्कि पूरे भारत के लिए जैव विविधता की एक अनमोल धरोहर है। यह अभयारण्य मैंग्रोव वनों का ऐसा जीवंत संसार है, जहाँ प्रकृति अपनी पूरी भव्यता और संतुलन के साथ दिखाई देती है। घने मैंग्रोव जंगल, ज्वारीय खाड़ियाँ, पक्षियों की मधुर चहचहाहट और जलजीवों की रहस्यमयी मौजूदगी—सब मिलकर कोरिंगा को एक अनूठा प्राकृतिक परिदृश्य प्रदान करते हैं।

WhatsApp Image 2026-01-25 at 9.27.06 PM
WhatsApp Image 2026-01-25 at 8.56.40 PM (1)
WhatsApp Image 2026-01-25 at 9.09.46 PM
WhatsApp Image 2026-01-25 at 9.06.54 PM
WhatsApp Image 2026-01-25 at 9.17.22 PM
WhatsApp Image 2026-01-25 at 9.12.09 PM
WhatsApp Image 2026-01-25 at 9.19.42 PM
WhatsApp Image 2026-01-25 at 9.04.25 PM
WhatsApp Image 2026-01-25 at 9.31.09 PM
WhatsApp-Image-2026-01-04-at-3.52.07-PM-1-207x300 (1)
53037c58-1c56-477e-9d46-e1b17e179e86

कोरिंगा वन्यजीव अभयारण्य 120 से अधिक पक्षी प्रजातियों का सुरक्षित आवास है। यहाँ स्थानीय पक्षियों के साथ-साथ दूर-दराज़ देशों से आने वाले प्रवासी पक्षी भी बड़ी संख्या में देखे जाते हैं। सर्दियों के मौसम में जब प्रवासी पक्षी यहाँ डेरा डालते हैं, तब यह क्षेत्र पक्षी प्रेमियों और शोधकर्ताओं के लिए किसी स्वर्ग से कम नहीं होता।

मैंग्रोव वन: प्रकृति का सुरक्षा कवच

कोरिंगा अभयारण्य की सबसे बड़ी पहचान इसके मैंग्रोव वन हैं। ये वन केवल जैव विविधता का आधार ही नहीं, बल्कि तटीय क्षेत्रों के लिए एक प्राकृतिक सुरक्षा कवच भी हैं। मैंग्रोव जंगल समुद्री तूफानों, चक्रवातों और तटीय कटाव से रक्षा करते हैं। साथ ही, ये कार्बन अवशोषण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, जिससे जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को कम करने में मदद मिलती है।

विशेषज्ञों के अनुसार, कोरिंगा के मैंग्रोव वन स्थानीय मछुआरा समुदायों की आजीविका के लिए भी अत्यंत आवश्यक हैं। यहाँ की खाड़ियाँ और ज्वारीय क्षेत्र मछलियों, केकड़ों और झींगों की कई प्रजातियों के प्रजनन स्थल हैं।

पक्षियों की दुनिया: चहचहाहट से गूंजता आकाश

कोरिंगा अभयारण्य को पक्षी प्रेमियों के लिए एक प्रमुख गंतव्य माना जाता है। यहाँ बगुले, सारस, किंगफिशर, पेलिकन, ईग्रेट जैसी अनेक प्रजातियाँ पाई जाती हैं। प्रवासी पक्षियों की आमद से यह क्षेत्र और भी रंगीन हो जाता है। दूर देशों से आने वाले पक्षी यहाँ भोजन और सुरक्षित आवास पाते हैं, जिससे यह स्थान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी महत्वपूर्ण बन जाता है।

पक्षी विशेषज्ञों का मानना है कि कोरिंगा अभयारण्य भारत के उन चुनिंदा स्थानों में से एक है, जहाँ तटीय और मैंग्रोव पारिस्थितिकी तंत्र का उत्कृष्ट संतुलन देखने को मिलता है।

mantr
66071dc5-2d9e-4236-bea3-b3073018714b

वन्यजीवन की रोमांचक झलक

पक्षियों के अलावा, कोरिंगा अभयारण्य में विविध प्रकार के वन्यजीव भी पाए जाते हैं। यहाँ चिकने-चमड़ी वाले ऊदबिलाव, विभिन्न सरीसृप और रहस्यमयी मुहाना मगरमच्छ देखने को मिलते हैं। नौका विहार के दौरान मैंग्रोव खाड़ियों में मगरमच्छों की मौजूदगी रोमांच और रोमांच के साथ-साथ प्रकृति की शक्ति का अहसास कराती है।

यह क्षेत्र जैव विविधता संरक्षण की दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील है, इसलिए यहाँ वन्यजीवों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाती है।

सतत पर्यटन की मिसाल

कोरिंगा वन्यजीव अभयारण्य को सतत पर्यटन (Sustainable Tourism) के एक आदर्श मॉडल के रूप में देखा जा रहा है। यहाँ पर्यटन गतिविधियाँ इस प्रकार विकसित की गई हैं कि पर्यावरण को न्यूनतम नुकसान पहुँचे। प्रकृति पथ, नियंत्रित नौका विहार, और पर्यावरण जागरूकता कार्यक्रम पर्यटकों को प्रकृति से जोड़ते हैं, बिना इसके संतुलन को बिगाड़े।

पर्यटन विभाग और वन विभाग मिलकर यह सुनिश्चित करते हैं कि आगंतुक प्राकृतिक नियमों का पालन करें और वन्यजीवन को किसी प्रकार की हानि न पहुँचे।

स्थानीय समुदायों की भागीदारी

कोरिंगा अभयारण्य के संरक्षण में स्थानीय समुदायों की भूमिका भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। मछुआरे और आसपास के गाँवों के लोग संरक्षण प्रयासों में भागीदार बनाए गए हैं। इससे न केवल रोजगार के अवसर पैदा हुए हैं, बल्कि लोगों में पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी की भावना भी विकसित हुई है।

स्थानीय लोग अब यह समझने लगे हैं कि अभयारण्य की रक्षा करना उनके भविष्य की सुरक्षा से जुड़ा हुआ है।

पर्यावरण संरक्षण की प्रेरणा

कोरिंगा वन्यजीव अभयारण्य आज उस सोच का प्रतीक है, जिसमें विकास और संरक्षण साथ-साथ चलते हैं। यह क्षेत्र दिखाता है कि यदि सही नीतियाँ और सामुदायिक सहयोग हो, तो प्रकृति की रक्षा करते हुए पर्यटन और आजीविका को भी बढ़ावा दिया जा सकता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि कोरिंगा जैसे अभयारण्य आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा हैं। यहाँ की जैव विविधता, पारिस्थितिकी संतुलन और संरक्षण मॉडल देश के अन्य तटीय क्षेत्रों के लिए भी मार्गदर्शक बन सकते हैं।

भविष्य की राह

जलवायु परिवर्तन और मानवीय दबावों के बीच कोरिंगा वन्यजीव अभयारण्य का संरक्षण एक बड़ी चुनौती है। इसके बावजूद, सरकार, वन विभाग और स्थानीय समुदायों के संयुक्त प्रयासों से यह क्षेत्र सुरक्षित और जीवंत बना हुआ है।

कोरिंगा अभयारण्य केवल एक पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि प्रकृति, संरक्षण और सतत विकास का जीवंत उदाहरण है। यह हमें याद दिलाता है कि यदि हम प्रकृति का सम्मान करें, तो वह हमें जीवन, संतुलन और सौंदर्य—तीनों प्रदान करती है।

Ashish Sinha

e6e82d19-dc48-4c76-bed1-b869be56b2ea (2)
WhatsApp Image 2026-01-04 at 4.02.37 PM
WhatsApp Image 2026-01-04 at 3.36.04 PM
WhatsApp Image 2026-01-04 at 3.39.12 PM
WhatsApp Image 2026-01-04 at 3.44.45 PM (1)

Related Articles

Back to top button
error: Content is protected !!