
NDRF ने घुनघुटा बांध में बाढ़ आपदा से बचाव का किया मॉक ड्रिल, सीपीआर का प्रदर्शन
अंबिकापुर के घुनघुटा बांध में एनडीआरएफ द्वारा बाढ़ आपदा प्रबंधन को लेकर मॉक ड्रिल आयोजित की गई, जिसमें रेस्क्यू, सीपीआर और ग्रामीणों को व्यवहारिक प्रशिक्षण दिया गया।
NDRF ने घुनघुटा बांध में बाढ़ आपदा से बचाव का किया रिहर्सल

डूबते व्यक्ति को बचाने एवं सीपीआर देने की वैज्ञानिक प्रक्रिया का हुआ प्रदर्शन
अंबिकापुर | 18 जनवरी 2026 |जिले के घुनघुटा बांध क्षेत्र में आम नागरिकों को आपदा प्रबंधन के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) द्वारा मॉक ड्रिल अभ्यास का आयोजन किया गया। यह अभ्यास 03 वाहिनी एनडीआरएफ, मुण्डली (कटक, ओडिशा) के डिप्टी कमांडर पवन जोशी के मार्गदर्शन में तथा सब-इंस्पेक्टर अभिजीत साहू के नेतृत्व में संपन्न हुआ।
मॉक ड्रिल के दौरान बाढ़ जैसी आपात परिस्थितियों में त्वरित राहत एवं बचाव कार्यों का जीवंत प्रदर्शन किया गया। प्रथम अभ्यास में यह परिदृश्य दर्शाया गया कि अचानक जलस्तर बढ़ने से घुनघुटा बांध क्षेत्र के समीप स्थित गांव में 10 नागरिक फंस गए हैं। इस स्थिति में एनडीआरएफ के जवानों ने तत्परता दिखाते हुए दो रेस्क्यू बोट की सहायता से सभी नागरिकों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया।

डूबते व्यक्ति को बचाने एवं सीपीआर का प्रदर्शन
दूसरे अभ्यास दृश्य में एक नाव में सवार दो यात्रियों के आपसी विवाद के कारण नदी में गिरकर डूबने की स्थिति उत्पन्न होने का प्रदर्शन किया गया। एनडीआरएफ की बोट तत्काल मौके पर पहुंची और जवानों ने दोनों डूबते व्यक्तियों को सुरक्षित बाहर निकालकर प्राथमिक उपचार प्रदान किया। इस दौरान डूबते व्यक्ति को बचाने की विधि तथा सीपीआर (कार्डियो पल्मोनरी रिससिटेशन) देने की वैज्ञानिक प्रक्रिया का विस्तृत प्रदर्शन किया गया। इसके पश्चात नदी में डूबे एक व्यक्ति की खोज एनडीआरएफ के प्रशिक्षित गोताखोरों द्वारा की गई।
ओवरलोड बोट दुर्घटना का रेस्क्यू अभ्यास
अगले अभ्यास में क्षमता से अधिक यात्रियों को ले जा रही एक सिविल बोट के दुर्घटनाग्रस्त होने की स्थिति को दर्शाया गया। इस परिदृश्य में एनडीआरएफ के जवानों ने त्वरित राहत एवं बचाव कार्य करते हुए कई डूबते व्यक्तियों को सुरक्षित रेस्क्यू किया तथा नदी में डूब रहे एक अन्य व्यक्ति को भी सफलतापूर्वक बाहर निकाला।
ग्रामीणों को दिया गया व्यवहारिक प्रशिक्षण
मॉक ड्रिल के दौरान एनडीआरएफ जवानों द्वारा ग्रामीणों को घरेलू उपयोग की वस्तुओं से अस्थायी लाइफ जैकेट बनाने के तरीकों की जानकारी दी गई। पानी के पीपे, नारियल एवं प्लास्टिक की बोतलों को बांधकर तैरने की तकनीक का व्यवहारिक प्रदर्शन भी किया गया, जिससे आपदा के समय जान बचाने के उपायों की समझ विकसित हो सके।
अपर कलेक्टर सुनील नायक ने बताया कि घुनघुटा जलाशय में आयोजित इस मॉक ड्रिल में ओडिशा से आई एनडीआरएफ टीम के साथ जिला प्रशासन, होमगार्ड, एनसीसी तथा स्थानीय ग्रामीणों की सक्रिय सहभागिता रही। इस प्रकार की मॉक ड्रिल का उद्देश्य ग्रामीणों को आपदा से पूर्व प्रशिक्षित करना है, जिससे जान-माल की क्षति को न्यूनतम किया जा सके और नागरिकों का आत्मविश्वास बढ़े।
एनडीआरएफ के डिप्टी कमांडर पवन जोशी ने बताया कि राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के निर्देशानुसार देश के विभिन्न जिलों में इस प्रकार के मॉक एक्सरसाइज आयोजित किए जाते हैं, ताकि जिला स्तर पर बेहतर समन्वय स्थापित किया जा सके, संसाधनों एवं उपकरणों का मूल्यांकन हो सके और किसी भी आपात स्थिति में प्रभावी ढंग से आपदा का सामना किया जा सके।
मॉक ड्रिल के दौरान सभी संबंधित विभागों के नोडल एवं सहायक नोडल अधिकारी, प्रशासनिक अधिकारी, सुरक्षा बल एवं बड़ी संख्या में स्थानीय ग्रामीण उपस्थित रहे।










