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बिजली की दरों में वृद्धि 25 प्रतिशत नहीं मात्र 25 पैसे प्रति यूनिट की

बिजली की दरों में वृद्धि 25 प्रतिशत नहीं मात्र 25 पैसे प्रति यूनिट की

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स्टील उद्योग नई बिजली दर को लेकर पैदा कर रही भ्रम की स्थिति, लोड फैक्टर छूट को किया गया है युक्तिसंगत

छत्तीसगढ़ में बिजली की दरें दूसरे राज्यों की तुलना में सबसे कम, किसी भी
राज्य में नहीं है 25 प्रतिशत लोड फैक्टर की छूट

रायपुर// छत्तीसगढ़ राज्य रिटायर्ड पॉवर इंजीनियर्स-ऑफिसर्स एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय को पत्र लिखकर राज्य के स्टील उद्योगों द्वारा बिजली की दरों में छूट लेने के प्रयास को अनुचित बताया है। एसोसिएशन ने अपने पत्र में कहा है कि स्टील उद्योग नई बिजली दरों को लेकर भ्रम पैदा कर रही है। तथ्य यह है कि छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत नियामक आयोग द्वारा चालू वित्तीय वर्ष 2024-25 में आम उपभोक्ताओं के घरेलू तथा किसानों के बिजली बिल की दरों में 20 पैसे प्रति यूनिट की वृद्धि की गई है। वहीं दूसरी तरफ उच्च दाब उपभोक्ताओं स्टील इंडस्ट्रीज में मात्र 25 पैसे प्रति यूनिट की वृद्धि की गई है। स्टील इंडस्ट्रीज को पिछले कई वर्षों से मिल रहे अवांछित 25 प्रतिशत लोड फैक्टर की छूट को युक्तिसंगत करते हुए दस प्रतिशत किया गया है।

एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री को लिखे अपने पत्र में कहा है कि उद्योगों का यह कहना कि बिजली की दरें 25 प्रतिशत बढ़ गई है, सत्य से परे और गुमराह करने वाली है। विद्युत नियामक आयोग द्वारा ऊर्जा दर में मात्र चार प्रतिशत (मात्र 25 पैसे प्रति यूनिट) की वृद्धि की गई है। लोड फैक्टर की अवांछित और अनुचित छूट को 25 प्रतिशत से घटाकर दस प्रतिशत किया गया है। स्टील उद्योगों को फायदा देते हुए ऑफ पिक अवर्स के समय को छह घंटे से बढ़ाकर आठ घंटे का किया गया है। इससे उद्योगों को छह घंटे के बजाय अब आठ घंटे सामान्य दरों की तुलना में 80 प्रतिशत दर पर बिजली मिलेगी। इस तरह स्टील इंडस्ट्रीज की विद्युत दरों को अधिक युक्तिसंगत बनाया गया है।

एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री को अवगत कराया है कि प्रतिवर्ष जुलाई से लेकर नवम्बर माह तक लोहे की मांग कम होने के कारण इसके मूल्य में गिरावट आती है। इस वर्ष भी लोहे का मूल्य 42 रुपए प्रति किलो से घटकर 35 रुपए प्रति किलो हो गया है। रायगढ़ जिंदल इंडस्ट्रियल पार्क में जहां तथाकथित तौर पर सस्ती बिजली की सुविधा मिलती है, ऐसा बताया जाता है कि वहां भी आधे से अधिक उद्योग बंद हैं। वहां के कई उद्योग विगत कई वर्षों से छत्तीसगढ़ स्टेट पॉवर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड से बिजली प्राप्त करने के लिए प्रयासरत रहे हैं, परंतु तत्कालीन प्रबंधन ने कोई ध्यान नहीं दिया। वर्ष 2020 में भी बढ़ी हुई बिजली की दरों के कारण प्लांट बंद हो जाएंगे या बंद कर देंगे संबंधी कथन स्टील उद्योगों द्वारा जारी किया गया था। उस समय स्टील उद्योगों के लिए पॉवर कंपनी द्वारा लोड फैक्टर को घटा कर आठ प्रतिशत किया गया था, तब बिजली की दरें 6.43 रुपए प्रति यूनिट थी। सरकार ने उद्योगों की मांगों पर कोई ध्यान नहीं दिया, तब भी कोई भी इकाई बंद नहीं हुई थी।

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उल्लेखनीय है कि अप्रैल-2020 में लोहे का मूल्य 26 हजार रुपए प्रति टन था, जबकि आज उसका मूल्य 35 हजार रुपए प्रति टन है। वर्ष 2020 में बिजली की दरें 6.43 रुपए प्रति यूनिट थी जबकि आज लोड फैक्टर की छूट को सम्मिलित करने के बाद बिजली की दरें 7.50 रुपए प्रति यूनिट है। यदि ऑफ पिक अवर्स के लाभ को जोड़ा जाए तो ये दरें घटकर लगभग 7.44 रुपए प्रति यूनिट के आसपास हो जाएंगी। विगत चार वर्षों में लोहे का मूल्य बढ़ने पर बिजली की दरों में मामूली बढ़ोतरी असंगत नहीं है। बिजली की दरों में वृद्धि से इन इकाईयों के संचालन में फर्क नहीं पड़ रहा है। हकीकत में लोहे की मांग कम होने से बाजार में उसका मूल्य कम हो गया है। यदि बिजली की दरें जनवरी-फरवरी में बढ़ती तब उत्पादन में कोई कमी नहीं होती क्योंकि प्रतिवर्ष बरसात के समय लोहे का मूल्य गिरता है और दीवाली के बाद बढ़ता है। उद्योगों द्वारा यह शोरगुल इसलिए किया जा रहा है ताकि इसकी आड़ में सरकार से फायदा लिया जा सके।

रिटायर्ड पॉवर इंजीनियर्स-ऑफिसर्स एसोसिएशन ने गणना कर बताया है कि यदि उद्योगों को उनकी मांग के अनुसार छूट दी जाती है तो राज्य शासन को अनावश्यक वित्तीय भार उठाना पड़ेगा। प्रति यूनिट 1.40 रुपए की छूट देने पर शासन पर करीब 1600 करोड़ रुपए का वित्तीय भार आएगा। वहीं प्रति यूनिट एक रुपए की छूट पर 1200 करोड़ रुपए और 50 पैसे की छूट पर 600 करोड़ रुपए का भार शासन को वहन करना पड़ेगा। राज्य में औसत विद्युत आपूर्ति की लागत 6.92 रुपए है। इससे कम में आपूर्ति करने का सीधा मतलब विद्युत दरों के निर्धारण के सिद्धांतों का उल्लंघन है।

लोहे का उद्योग अखिल भारतीय स्तर पर प्रतिस्पर्धी उद्योग है। मुख्यतः लोहे के उद्योग पश्चिम बंगाल, झारखंड, उड़ीसा, महाराष्ट्र एवं छत्तीसगढ़ में हैं। छत्तीसगढ़ में बिजली की दरें इन सभी राज्यों से सबसे कम है। किसी भी राज्य में 25 प्रतिशत लोड फैक्टर की छूट नहीं मिलती है। इस प्रकार स्पष्ट है कि छत्तीसगढ़ की स्टील इंडस्ट्रीज द्वारा बेवजह अनुचित लाभ के लिए बिजली की दरों में वृद्धि को बहाना बनाते हुए गुमराह किया जा रहा है, जबकि वास्तविकता यह है कि छत्तीसगढ़ में बिजली की दरें अन्य राज्यों की तुलना में सबसे कम हैं।

Ashish Sinha

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