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Alchemist केस: NCLT ने CIRP किया रद्द, ED की बड़ी जीत, मनी लॉन्ड्रिंग पर कड़ा संदेश

अल्केमिस्ट केस: NCLT ने CIRP किया रद्द, ED की दखल से मनी लॉन्ड्रिंग पर बड़ा झटका

नई दिल्ली, 05 फरवरी 2026/प्रवर्तन निदेशालय (ED) को अल्केमिस्ट ग्रुप से जुड़े बहुचर्चित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में बड़ी न्यायिक सफलता मिली है। राष्ट्रीय कंपनी कानून न्यायाधिकरण (NCLT), नई दिल्ली ने अल्केमिस्ट लिमिटेड के खिलाफ चल रही कॉरपोरेट इन्सॉल्वेंसी रेजोल्यूशन प्रोसेस (CIRP) को रद्द कर दिया है।

NCLT ने अपने आदेश में स्पष्ट कहा है कि यह दिवाला प्रक्रिया धोखाधड़ी, मिलीभगत और दुर्भावनापूर्ण मंशा के साथ शुरू की गई थी, जिसका उद्देश्य अपराध से अर्जित धन (Proceeds of Crime) को वैध बनाना और PMLA (मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम) के तहत चल रही कार्रवाई को विफल करना था।

IBC का दुरुपयोग नहीं हो सकता: NCLT

न्यायाधिकरण ने इन्सॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (IBC), 2016 की धारा 65 के तहत शक्तियों का प्रयोग करते हुए कहा कि—

  • IBC का उपयोग अपराध की कमाई को वैध करने या
  • PMLA की कार्यवाही से बचने के लिए ढाल के रूप में नहीं किया जा सकता।

ED की जांच में सामने आए गंभीर तथ्य

ED ने अल्केमिस्ट लिमिटेड के खिलाफ कोलकाता पुलिस और यूपी पुलिस की FIR के आधार पर जांच शुरू की थी। जांच में खुलासा हुआ कि—

  • अल्केमिस्ट होल्डिंग्स लिमिटेड और अल्केमिस्ट टाउनशिप इंडिया लिमिटेड ने
  • जनता से उच्च रिटर्न का लालच देकर 1840 करोड़ रुपये से अधिक की राशि जुटाई
  • निवेशकों को न तो प्लॉट/फ्लैट दिए गए और न ही रिफंड किया गया
  • यह पैसा अल्केमिस्ट ग्रुप की अन्य कंपनियों में डायवर्ट कर दिया गया

ED ने इस मामले में अब तक 492.72 करोड़ रुपये की चल-अचल संपत्तियां जब्त की हैं।

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CIRP में भी पाई गई गंभीर अनियमितताएं

ED की ओर से NCLT को बताया गया कि—

  • CIRP की शुरुआत ग्रुप की ही एक कंपनी द्वारा की गई
  • कमेटी ऑफ क्रेडिटर्स (CoC) पर लगभग पूरा नियंत्रण अल्केमिस्ट ग्रुप की कंपनियों का था
  • एक पूर्व कर्मचारी को रेजोल्यूशन प्रोफेशनल नियुक्त किया गया, जिससे निष्पक्षता पर सवाल उठे
  • CIRP का इस्तेमाल जब्त संपत्तियां छुड़ाने और IBC की धारा 32A के तहत छूट पाने के लिए किया जा रहा था

NCLT के प्रमुख निष्कर्ष

NCLT ने ED की दलीलों से सहमति जताते हुए कहा—

  • IBC और PMLA अलग-अलग क्षेत्रों में काम करते हैं
  • IBC के जरिए आपराधिक दायित्व समाप्त नहीं किया जा सकता
  • आरोपी कंपनियों के नियंत्रण में चल रही CIRP प्रक्रिया कानूनी रूप से अवैध है
  • CIRP जारी रहने से अपराध की कमाई को वैधता मिलती

CIRP रद्द, जुर्माना भी लगाया

न्यायाधिकरण ने—

  • CIRP को पूरी तरह रद्द कर दिया
  • रेजोल्यूशन प्रोफेशनल की नियुक्ति को निरस्त किया
  • ऑपरेशनल क्रेडिटर साई टेक मेडिकेयर प्राइवेट लिमिटेड पर 5 लाख रुपये का जुर्माना लगाया

ED ने कहा कि यह आदेश एक बार फिर स्पष्ट करता है कि दिवाला कानून का दुरुपयोग कर मनी लॉन्ड्रिंग मामलों से बचा नहीं जा सकता

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