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Global Oil Crisis के बीच भारत तैयार | 250 मिलियन बैरल तेल स्टॉक और 258 MMTPA रिफाइनिंग क्षमता

दुनिया में तेल संकट की आशंका के बीच भारत तैयार, मजबूत स्टॉक और रिफाइनिंग क्षमता से मिलेगी सुरक्षा

दुनिया के कई हिस्सों में कच्चे तेल की आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ती दिखाई दे रही है। भू-राजनीतिक तनाव, उत्पादन में संभावित कटौती और वैश्विक बाजार में उतार-चढ़ाव के कारण Oil Crisis की चर्चा तेज हो गई है। हालांकि इन परिस्थितियों के बीच भारत ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए महत्वपूर्ण तैयारी कर रखी है।

ऊर्जा क्षेत्र के आंकड़ों के अनुसार भारत के पास वर्तमान में 250 मिलियन बैरल से अधिक कच्चे तेल का कुल स्टॉक उपलब्ध है। इसमें रणनीतिक भंडार, रिफाइनरियों का स्टॉक और पाइपलाइन में मौजूद तेल शामिल है। यह भंडार देश को किसी भी संभावित वैश्विक आपूर्ति संकट के दौरान करीब 7 से 8 सप्ताह तक स्थिर सप्लाई बनाए रखने की क्षमता देता है।

भारत की रणनीतिक पेट्रोलियम भंडारण व्यवस्था का संचालन मुख्य रूप से
Indian Strategic Petroleum Reserves Limited (ISPRL) द्वारा किया जाता है। देश में विशाखापट्टनम, मंगलुरु और पादुर जैसे स्थानों पर रणनीतिक तेल भंडारण सुविधाएं विकसित की गई हैं, जिनका उद्देश्य वैश्विक संकट के समय आपूर्ति को सुरक्षित रखना है।

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रिफाइनिंग क्षमता में भी भारत मजबूत

ऊर्जा सुरक्षा का एक बड़ा आधार भारत की रिफाइनिंग क्षमता भी है। देश की कुल रिफाइनिंग क्षमता लगभग 258 MMTPA (मिलियन मीट्रिक टन प्रति वर्ष) है। यह क्षमता भारत की घरेलू मांग को पूरा करने के साथ-साथ निर्यात की भी अनुमति देती है।

भारत की प्रमुख रिफाइनिंग कंपनियों में
Indian Oil Corporation,
Reliance Industries और
Bharat Petroleum जैसी कंपनियां शामिल हैं, जो देश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

ऊर्जा सुरक्षा पर सरकार का फोकस

ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि भारत पिछले कुछ वर्षों से ऊर्जा सुरक्षा और आपूर्ति विविधीकरण पर लगातार काम कर रहा है। सरकार ने एक तरफ रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार बढ़ाने पर जोर दिया है, वहीं दूसरी ओर कच्चे तेल के आयात के स्रोतों को भी विविध बनाया है, ताकि किसी एक क्षेत्र में संकट आने पर देश की सप्लाई प्रभावित न हो।

वैश्विक संकट के बावजूद भारत अपेक्षाकृत सुरक्षित

विशेषज्ञों के अनुसार यदि वैश्विक बाजार में अस्थिरता बढ़ती भी है, तो भारत के पास मौजूद पर्याप्त स्टॉक, मजबूत रिफाइनिंग क्षमता और विविध आयात स्रोत देश को तत्काल बड़े संकट से बचाने में मदद कर सकते हैं।

यानी साफ है कि वैश्विक स्तर पर तेल संकट की चर्चा भले तेज हो, लेकिन भारत ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत आधार देने की दिशा में महत्वपूर्ण तैयारी कर रखी है।

 

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