
राज्यसभा में दिग्विजय सिंह का बयान: “विचारधारा से कभी समझौता नहीं किया, देश में बढ़ती कटुता चिंताजनक”
राज्यसभा में दिग्विजय सिंह ने अपने राजनीतिक जीवन का अनुभव साझा करते हुए विचारधारा, लोकतंत्र और देश में बढ़ती सांप्रदायिक कटुता पर चिंता जताई।
नई दिल्ली। Digvijaya Singh ने राज्यसभा में अपने संबोधन के दौरान राजनीति, लोकतंत्र और सामाजिक सौहार्द पर महत्वपूर्ण विचार रखे। उनका यह बयान Indian National Congress के आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल @INCIndia पर भी साझा किया गया।
उन्होंने कहा कि छात्र जीवन में उनका राजनीति से कोई संबंध नहीं था, लेकिन परिस्थितियों ने उन्हें कम उम्र में ही बड़ी जिम्मेदारियां दे दीं। उन्होंने बताया कि वे 22 साल की उम्र में नगर पालिका अध्यक्ष, 30 साल में विधायक, 33 साल में सांसद और 40 साल की उम्र में मुख्यमंत्री बने।
दिग्विजय सिंह ने स्पष्ट कहा कि उन्होंने अपने पूरे राजनीतिक जीवन में कभी विचारधारा से समझौता नहीं किया। उन्होंने कहा कि राजनीति में मतभेद होना स्वाभाविक है, लेकिन उन्होंने कभी किसी के प्रति मनभेद या कटुता नहीं रखी।
अपने संबोधन में उन्होंने पुराने संसदीय दौर को याद करते हुए Atal Bihari Vajpayee, Rajiv Gandhi और Chandra Shekhar जैसे दिग्गज नेताओं का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इन नेताओं से उन्हें राजनीति में शालीनता और संवाद की प्रेरणा मिली।
उन्होंने लोकतंत्र की मजबूती के लिए चर्चा को आवश्यक बताते हुए कहा कि सत्ता पक्ष की जिम्मेदारी होती है कि वह विपक्ष के साथ संवाद कर समाधान निकाले।
वर्तमान हालात पर चिंता जताते हुए उन्होंने कहा कि देश में जिस तरह सांप्रदायिक कटुता बढ़ रही है, वह लोकतंत्र, संविधान और समाज के लिए सही नहीं है।












