राज्यसभा में खड़गे का विदाई भाषण: “राजनीति में कोई रिटायर नहीं होता, सहयोग से ही मजबूत होगा लोकतंत्र”
राज्यसभा में मल्लिकार्जुन खड़गे ने विदाई भाषण में सांसदों के योगदान को याद किया और लोकतंत्र में सहयोग व संवाद की आवश्यकता पर जोर दिया।
नई दिल्ली। Mallikarjun Kharge ने राज्यसभा में कार्यकाल पूरा कर रहे सांसदों की विदाई के अवसर पर भावुक और महत्वपूर्ण संबोधन दिया। यह जानकारी Indian National Congress (@INCIndia) द्वारा साझा की गई।
खड़गे ने कहा कि राज्यसभा एक स्थायी सदन है, जहां सांसद 6 साल के लिए चुने जाते हैं और हर दो साल में एक-तिहाई सदस्य रिटायर होते हैं। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि राजनीति में कोई भी व्यक्ति वास्तव में रिटायर नहीं होता।
उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि यह उनके लंबे राजनीतिक जीवन का पहला राज्यसभा कार्यकाल था और यहां का अनुभव उनके लिए बेहद महत्वपूर्ण रहा। उन्होंने सदन में नियमित उपस्थिति और चर्चाओं में भागीदारी को अपनी प्राथमिकता बताया।
अपने भाषण में खड़गे ने कई वरिष्ठ नेताओं का उल्लेख किया, जिनमें H. D. Deve Gowda, Sharad Pawar, Digvijaya Singh, Abhishek Manu Singhvi और Ramdas Athawale जैसे नेताओं के योगदान की सराहना की।
उन्होंने कहा कि अच्छे कानून बनाने में सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों की बराबर भूमिका होती है। लोकतंत्र को मजबूत बनाने के लिए सहयोग और संवाद जरूरी है, न कि नफरत।
खड़गे ने संसद की कार्यवाही को लेकर भी सुझाव दिए। उन्होंने कहा कि सदन की बैठकों की संख्या बढ़ाई जानी चाहिए ताकि जनहित के मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हो सके। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि कई बार सांसदों के भाषण के अंश कार्यवाही से हटा दिए जाते हैं, जिससे उनके विचारों का अर्थ प्रभावित होता है।
उन्होंने गरीबों, किसानों, मजदूरों और कमजोर वर्गों के मुद्दों पर गंभीर चर्चा की आवश्यकता पर जोर दिया और कहा कि सरकार को आलोचना के बजाय संवाद का रास्ता अपनाना चाहिए।
अपने संबोधन के अंत में उन्होंने एक भावुक कविता के माध्यम से विदा ले रहे सांसदों को शुभकामनाएं दीं और कहा कि वे जहां भी जाएं, अपनी छाप छोड़ें।












