
राज्यसभा में ‘वंदे मातरम’ पर बड़ा खुलासा: किरेन रिजिजू बोले—कभी नहीं था कोई प्रतिबंध
राज्यसभा में संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने ‘वंदे मातरम’ पर लगी कथित रोक को गलतफहमी बताया। 1950 के दशक की घटना से बना था भ्रम।
राज्यसभा में ‘वंदे मातरम’ को लेकर बड़ा खुलासा: गलतफहमी दूर, कोई प्रतिबंध नहीं – किरेन रिजिजू
नई दिल्ली: Rajya Sabha में #BudgetSession के दौरान संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju ने ‘वंदे मातरम’ को लेकर वर्षों से चली आ रही एक बड़ी गलतफहमी को दूर किया।
विदाई भाषण के दौरान उन्होंने कहा कि कई बार कुछ बातें गलतफहमी के कारण लंबे समय तक बनी रहती हैं। उन्होंने बताया कि शीतकालीन सत्र में ‘वंदे मातरम’ पर चर्चा प्रस्तावित थी, तब उनके विभाग Ministry of Parliamentary Affairs और राज्यसभा सचिवालय के अधिकारियों ने उन्हें जानकारी दी थी कि सदन में ‘वंदे मातरम’ बोलने की अनुमति नहीं है।
1950 के दशक की घटना से बनी गलत धारणा
Kiren Rijiju ने स्पष्ट किया कि उन्होंने इस विषय पर राज्यसभा सचिवालय के महासचिव से बात की, तो सामने आया कि ऐसा कोई आधिकारिक प्रतिबंध कभी नहीं रहा।
उन्होंने बताया कि 1950 के दशक में एक सांसद के भाषण के दौरान कुछ सदस्य लगातार नारेबाजी कर रहे थे। उस समय सदन के आसन (चेयर) ने निर्देश दिया कि भाषण के दौरान नारेबाजी नहीं होनी चाहिए। इसके बावजूद कुछ सांसद ‘वंदे मातरम’ के नारे लगाने लगे, जिस पर आसन ने कहा कि भाषण के दौरान इस प्रकार के नारे भी न लगाए जाएं।
गलतफहमी दूर करने के लिए जारी किया नोटिस
मंत्री ने कहा कि इसी घटना के बाद यह धारणा बन गई कि राज्यसभा में ‘वंदे मातरम’ बोलने पर प्रतिबंध है।
हालांकि, सरकार ने इस भ्रम को दूर करने के लिए स्पष्ट नोटिस जारी कर दिया है कि सदन में ‘वंदे मातरम’ बोलने पर कोई रोक नहीं है।
उन्होंने कहा कि संसद की गरिमा बनाए रखना सभी सदस्यों की जिम्मेदारी है, लेकिन ऐतिहासिक तथ्यों को सही रूप में समझना भी उतना ही आवश्यक है।











