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मैनपाट डेथ ट्रैप कांड: करंट से ग्रामीण की मौत, 6 गिरफ्तार – क्या जंगली जानवरों का शिकार अब इंसानों के लिए बना काल?






Surguja Mainpat Death Trap: Special Investigation | Pradesh Khabar


विशेष खोजी रिपोर्ट | सरगुजा ब्यूरो

मैनपाट का ‘डेथ ट्रैप’: शिकारियों के बिछाए 11000 वोल्ट के करंट ने ली बेगुनाह की जान, क्या अब जंगल में कदम रखना भी है मौत को दावत?

सरगुजा: जिसे हम ‘छत्तीसगढ़ का तिब्बत’ कहते हैं, जहाँ की फिजाओं में सुकून मिलता है, उसी मैनपाट के घने जंगलों में आज खून के धब्बे लगे हैं। सागौन नर्सरी के पास बिछाया गया करंट का एक नंगा तार, जिसे जंगली जानवरों को मारने के लिए ‘डेथ ट्रैप’ बनाया गया था, उसने 37 वर्षीय मिश्रा यादव की जिंदगी को हमेशा के लिए खामोश कर दिया। यह सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि वन्यजीवों और इंसानों के बीच बढ़ते संघर्ष और अवैध शिकार की वह काली सच्चाई है, जो प्रशासन की आंखों के सामने फल-फूल रही है।

घटना का पूरा विवरण: रात 10 बजे का वह खौफनाक मंजर

गुरुवार की रात करीब 10 बजे, जब पूरा मैनपाट ठंडी हवाओं के बीच गहरी नींद में सो रहा था, मिश्रा यादव अपने कुछ साथियों के साथ जंगल के रास्ते जा रहे थे। उन्हें इस बात का जरा भी अंदाजा नहीं था कि सागौन नर्सरी के पास मौत उनका इंतजार कर रही है। शिकारियों ने बिजली के मुख्य 11 kV (11,000 वोल्ट) के खंभे से हुकिंग करके लगभग 1,300 मीटर लंबा नंगा तार जमीन से सटाकर बिछा रखा था।

मिश्रा यादव का पैर जैसे ही उस तार पर पड़ा, बिजली के जोरदार झटके ने उन्हें संभलने का मौका तक नहीं दिया। मौके पर ही उनकी दर्दनाक मौत हो गई। उनके साथ मौजूद उनके साले ने जब उन्हें बचाने की कोशिश की, तो वे भी करंट की चपेट में आकर बुरी तरह झुलस गए।

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जब्ती और कार्रवाई के आंकड़े:

  • मृतक: मिश्रा यादव (उम्र 37 वर्ष)
  • गिरफ्तार आरोपी: 06 ग्रामीण
  • बरामद तार: 1,300 मीटर (11 kV हुकिंग)
  • धाराएं: वन्यजीव संरक्षण अधिनियम & गैर-इरादतन हत्या
  • जांच टीम: पुलिस और वन विभाग (संयुक्त टीम)
  • बरामद अवशेष: एक सियार (Jackal) का शव

एक तीर से दो शिकार: सियार की भी गई जान

वन विभाग की जांच में एक और चौंकाने वाला खुलासा हुआ। घटनास्थल के पास ही एक सियार का शव भी बरामद किया गया। इससे यह स्पष्ट हो गया कि शिकारियों ने यह जाल बड़े पैमाने पर वन्यजीवों के शिकार के लिए बिछाया था। सियार की मौत और ग्रामीण की जान जाना यह साबित करता है कि शिकारियों के लिए जान की कोई कीमत नहीं है, चाहे वह जानवर हो या इंसान।

“जंगलों में करंट बिछाना न केवल अपराध है, बल्कि यह मासूमों की जान से खिलवाड़ है। हम इस मामले में कड़ी से कड़ी सजा सुनिश्चित करेंगे ताकि भविष्य में कोई ऐसी हिमाकत न करे।”
– वन विभाग अधिकारी (अंबिकापुर संभाग)

पुलिस और वन विभाग की सर्जिकल स्ट्राइक

जैसे ही घटना की सूचना **Pradesh Khabar News Network** के माध्यम से प्रशासन तक पहुँची, मैनपाट रेंजर प्रशांत ओहर के नेतृत्व में वन विभाग और कमलेश्वरपुर पुलिस की टीम ने संयुक्त अभियान चलाया। तकनीक और मुखबिरों की मदद से इलाके के उन संदिग्धों को घेरा गया जो अक्सर शिकार की गतिविधियों में लिप्त रहते थे। कड़ी पूछताछ के बाद 6 ग्रामीणों ने अपना गुनाह कबूल कर लिया। इन आरोपियों ने स्वीकार किया कि वे पिछले कई दिनों से इस तरह के ट्रैप लगाकर शिकार कर रहे थे।

क्यों बढ़ रहा है अवैध शिकार?

सरगुजा के जंगलों में कोटरा, जंगली सुअर और सांभर जैसे जानवरों का मांस और खाल ऊंचे दामों पर बिकती है। स्थानीय स्तर पर मांस की मांग और बाहर के बाजारों में वन्यजीवों के अंगों की तस्करी ने ग्रामीणों को इस अपराध की ओर धकेला है। बिजली विभाग की लापरवाही भी यहाँ स्पष्ट दिखती है, जहाँ 11 kV की लाइनों से अवैध हुकिंग करना इतना आसान बना हुआ है।

आशीष सिन्हा का विशेष विश्लेषण:
मैनपाट की यह घटना छत्तीसगढ़ के अन्य क्षेत्रों जैसे महासमुंद और धमतरी के लिए भी एक सबक है, जहाँ हाथियों और अन्य जानवरों को मारने के लिए करंट का उपयोग आम होता जा रहा है। यदि प्रशासन ‘सोशल बॉयकाट’ (सामाजिक बहिष्कार) जैसे कड़े कदम नहीं उठाता, तो ऐसे ‘डेथ ट्रैप’ हमारे पर्यटन स्थलों को श्मशान बना देंगे।

मिश्रा यादव के परिवार के लिए यह एक अपूरणीय क्षति है। 37 साल की उम्र में घर का चिराग बुझ जाना पूरे गाँव को शोक में डुबो गया है। आरोपियों पर गैर-इरादतन हत्या का मामला दर्ज होना एक अच्छी शुरुआत है, लेकिन क्या यह उन शिकारियों के हौसलों को पस्त कर पाएगा जो चंद पैसों के लिए मौत का जाल बुनते हैं? यह सवाल आज हर मैनपाट वासी के मन में है।


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