PM Modi Congratulations to Vietnam President To Lam: भारत-वियतनाम के रणनीतिक संबंधों में नया अध्याय






PM Modi Congratulates Vietnam President Tô Lâm: India-Vietnam News

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पीएम मोदी ने वियतनाम के नए राष्ट्रपति ‘तो लाम’ को दी बधाई: भारत-वियतनाम रणनीतिक संबंधों का नया स्वर्ण युग शुरू

नई दिल्ली / हनोई: भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वियतनाम के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति तो लाम (Tô Lâm) को उनके पदभार संभालने पर हार्दिक बधाई दी है। यह केवल एक औपचारिक बधाई संदेश नहीं है, बल्कि दक्षिण-पूर्वी एशिया में बदलते भू-राजनीतिक समीकरणों के बीच दो विश्वसनीय सहयोगियों के पुनर्मिलन का संकेत है।


पीएम मोदी का संदेश: ‘समय की कसौटी पर खरी उतरी दोस्ती’

प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर वियतनामी भाषा और अंग्रेजी में अपनी शुभकामनाएं साझा कीं। उन्होंने विश्वास जताया कि राष्ट्रपति तो लाम के दूरदर्शी नेतृत्व में भारत और वियतनाम के बीच ‘Comprehensive Strategic Partnership’ (व्यापक रणनीतिक साझेदारी) नई ऊंचाइयों को छुएगी।

“वियतनाम समाजवादी गणराज्य के राष्ट्रपति के रूप में चुने जाने पर महामहिम तो लाम को मेरी ओर से हार्दिक बधाई। हमारी दोस्ती समय की कसौटी पर खरी उतरी है और मुझे विश्वास है कि यह भविष्य में और भी मजबूत होगी। मैं हमारे लोगों की प्रगति और क्षेत्र की समृद्धि के लिए आपके साथ मिलकर काम करने को उत्सुक हूं।” – पीएम नरेंद्र मोदी


कौन हैं तो लाम? वियतनाम की राजनीति में एक कद्दावर चेहरा

69 वर्षीय तो लाम वियतनाम की राजनीति में एक अत्यंत शक्तिशाली और अनुभवी नेता माने जाते हैं। राष्ट्रपति के रूप में चुने जाने से पहले, उन्होंने वियतनाम के जनरल सचिव (General Secretary) और सार्वजनिक सुरक्षा मंत्री (Minister of Public Security) के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

तो लाम का राजनीतिक सफर सुरक्षा और कानून व्यवस्था से जुड़ा रहा है। उन्हें वियतनाम में भ्रष्टाचार के खिलाफ अभियान चलाने और देश की आंतरिक सुरक्षा को मजबूत करने का श्रेय दिया जाता है। अब राष्ट्रपति के रूप में, उनका लक्ष्य वियतनाम को 2045 तक एक विकसित और उच्च आय वाला देश बनाना है।


भारत और वियतनाम: एक अटूट ऐतिहासिक रिश्ता

भारत और वियतनाम के संबंध सदियों पुराने हैं, जो बौद्ध धर्म और सांस्कृतिक आदान-प्रदान से शुरू हुए थे। आधुनिक युग में, दोनों देशों ने औपनिवेशिक शासन के खिलाफ संघर्ष में एक-दूसरे का समर्थन किया।

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  • 1972: औपचारिक राजनयिक संबंधों की स्थापना।
  • 2016: प्रधानमंत्री मोदी की वियतनाम यात्रा के दौरान संबंधों को ‘व्यापक रणनीतिक साझेदारी’ में बदला गया।
  • 2022: दोनों देशों ने अपने राजनयिक संबंधों की 50वीं वर्षगांठ मनाई।

रणनीतिक सहयोग के 5 मुख्य स्तंभ (The 5 Pillars of Cooperation)

1. रक्षा और सुरक्षा (Defense & Security)

भारत और वियतनाम के बीच रक्षा सहयोग सबसे मजबूत स्तंभों में से एक है। भारत ने वियतनाम को रक्षा ऋण (Line of Credit) के तहत गश्ती जहाज और अन्य सैन्य तकनीक प्रदान की है। दोनों देशों की नौसेनाएं अक्सर दक्षिण चीन सागर में संयुक्त अभ्यास करती हैं। ‘अधिनियम पूर्व नीति’ (Act East Policy) के तहत वियतनाम भारत का सबसे भरोसेमंद रक्षा साझेदार है।

2. समुद्री सुरक्षा और दक्षिण चीन सागर (Maritime Security)

दक्षिण चीन सागर में चीन की बढ़ती आक्रामकता के बीच भारत और वियतनाम दोनों ही एक “Free, Open and Rules-based Indo-Pacific” के पक्षधर हैं। दोनों देश UNCLOS (समुद्र के कानून पर संयुक्त राष्ट्र कन्वेंशन) का पालन करने और विवादों को शांतिपूर्ण ढंग से सुलझाने पर जोर देते हैं।

3. व्यापार और निवेश (Trade & Investment)

वर्ष 2024-25 तक दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार 15 बिलियन डॉलर के पार पहुँचने की उम्मीद है। भारत, वियतनाम के शीर्ष 10 व्यापारिक साझेदारों में शामिल है। कृषि, कपड़ा, ऊर्जा और फार्मास्यूटिकल्स के बाद अब दोनों देश सेमीकंडक्टर, एआई (AI) और ग्रीन एनर्जी में निवेश बढ़ा रहे हैं।

4. कनेक्टिविटी और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI)

भारत के ‘UPI’ मॉडल और डिजिटल क्रांति से वियतनाम काफी प्रभावित है। दोनों देश फिनटेक और डिजिटल भुगतान प्रणालियों को जोड़ने पर काम कर रहे हैं। इसके अलावा, सीधी उड़ान सेवाओं (Direct Flights) में वृद्धि से पर्यटन और व्यापार में जबरदस्त उछाल आया है।

5. सांस्कृतिक और आध्यात्मिक जुड़ाव (Cultural Ties)

वियतनाम में बौद्ध धर्म का गहरा प्रभाव है, जिसका केंद्र भारत है। हाल ही में भारत ने भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेषों को वियतनाम भेजा था, जहाँ लाखों श्रद्धालुओं ने उनके दर्शन किए। यह सॉफ्ट पावर डिप्लोमेसी का एक उत्कृष्ट उदाहरण है।


क्षेत्रीय स्थिरता के लिए भारत-वियतनाम गठबंधन का महत्व

विशेषज्ञों का मानना है कि आसियान (ASEAN) क्षेत्र में वियतनाम की भूमिका भारत के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। राष्ट्रपति तो लाम का कार्यकाल भारत के साथ “Viksit Bharat 2047” और वियतनाम के “Vision 2045” के लक्ष्यों को मिलाने का सुनहरा अवसर है।

चीनी प्रभाव को संतुलित करने के लिए भारत-वियतनाम का यह गठबंधन न केवल सुरक्षा के लिहाज से, बल्कि आर्थिक आत्मनिर्भरता के लिए भी आवश्यक है।


राष्ट्रपति तो लाम के नेतृत्व में वियतनाम एक नई ऊर्जा के साथ आगे बढ़ रहा है। पीएम मोदी की बधाई और दोनों नेताओं के बीच होने वाली आगामी मुलाकातें यह स्पष्ट करती हैं कि भारत और वियतनाम अब केवल मित्र नहीं, बल्कि वैश्विक मंच पर एक-दूसरे के रणनीतिक पूरक हैं।

आने वाले समय में रक्षा विनिर्माण, अंतरिक्ष अनुसंधान और साइबर सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में नए समझौतों की उम्मीद की जा सकती है।