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अमित शाह का ऐलान: 2029 का चुनाव महिला आरक्षण के साथ, लागू होगा ‘एक वोट-एक मूल्य’ का सिद्धांत






संवैधानिक सुधार और महिला सशक्तिकरण: 2029 में महिला आरक्षण के साथ होंगे चुनाव – अमित शाह


पार्लियामेंट अपडेट

संसद में बोले अमित शाह: “2029 का चुनाव महिला आरक्षण के साथ कराना हमारा संकल्प, लागू होगा ‘एक वोट-एक मूल्य’ का सिद्धांत”

ब्यूरो रिपोर्ट | नई दिल्ली | अपडेटेड: 17 अप्रैल, 2026

नई दिल्ली: संसद में जारी महत्वपूर्ण विधायी कार्यों के बीच, केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने नए संविधान संशोधन विधेयकों के उद्देश्यों को स्पष्ट किया है। केंद्रीय मंत्री किरण रिजिजू द्वारा साझा किए गए संदेश में शाह ने जोर देकर कहा कि सरकार का लक्ष्य महिला सशक्तिकरण को केवल कागजों तक सीमित न रखकर उसे धरातल पर समयबद्ध तरीके से उतारना है।

“पहला उद्देश्य महिला सशक्तिकरण करने वाले संविधान सुधार को समयबद्ध तरीके से लागू कर 2029 का चुनाव महिला आरक्षण के साथ कराया जाए। दूसरा: ‘एक व्यक्ति-एक वोट-एक मूल्य’ के सिद्धांत को लागू करना, जो हमारे संविधान की स्पिरिट है।”

— अमित शाह, केंद्रीय गृह मंत्री

2029: महिला सशक्तिकरण का नया युग

सरकार की योजना के अनुसार, महिला आरक्षण विधेयक को समयबद्ध तरीके से लागू करने के लिए प्रक्रिया तेज कर दी गई है। अमित शाह ने स्पष्ट किया कि 2029 के लोकसभा चुनाव भारत के संसदीय इतिहास में मील का पत्थर साबित होंगे, क्योंकि ये चुनाव महिला आरक्षण के साथ संपन्न कराए जाएंगे। यह कदम राजनीति में महिलाओं की भागीदारी को सुनिश्चित करने और उन्हें निर्णय लेने की प्रक्रिया के केंद्र में लाने के लिए उठाया गया है।

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संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने इसे ‘मोदी सरकार की गारंटी’ के रूप में पेश किया है। उन्होंने कहा कि विपक्ष की आपत्तियों के बावजूद सरकार संवैधानिक सुधारों के प्रति प्रतिबद्ध है, ताकि देश की आधी आबादी को उनका हक मिल सके।

समयबद्ध कार्यान्वयन

महिला आरक्षण को लेकर जनगणना और परिसीमन (Delimitation) की प्रक्रिया को पारदर्शी और निष्पक्ष तरीके से पूरा करने का खाका तैयार किया गया है।

संवैधानिक मर्यादा

‘एक व्यक्ति-एक वोट-एक मूल्य’ का सिद्धांत यह सुनिश्चित करेगा कि प्रत्येक नागरिक की आवाज को लोकतांत्रिक ढांचे में समान महत्व मिले।

‘एक व्यक्ति-एक वोट-एक मूल्य’ का महत्व

अमित शाह ने अपने संबोधन में संविधान सभा द्वारा तय किए गए मूल सिद्धांतों का स्मरण कराया। उन्होंने कहा कि ‘एक व्यक्ति-एक वोट-एक मूल्य’ का सिद्धांत हमारे लोकतंत्र की आत्मा है। सरकार का उद्देश्य इस सिद्धांत को उसकी असली स्पिरिट के साथ लागू करना है, ताकि किसी भी क्षेत्र या समुदाय के वोट के प्रभाव में असमानता न रहे।

इसे देश के निर्वाचन भूगोल को संतुलित करने और क्षेत्रीय असमानताओं को दूर करने की दिशा में एक बड़े कदम के रूप में देखा जा रहा है। गृह मंत्री ने संसद को आश्वस्त किया कि इन बिलों का मूल उद्देश्य लोकतांत्रिक मूल्यों को और अधिक सशक्त बनाना है।

विपक्ष और सर्वसम्मति का आह्वान

गृह मंत्री के इस बयान के बाद संसद में बहस और तेज हो गई है। जहाँ सरकार इसे ऐतिहासिक सुधार बता रही है, वहीं विपक्ष इसे लागू करने की समयसीमा और परिसीमन की शर्तों पर सवाल उठा रहा है। हालांकि, शाह ने स्पष्ट कर दिया है कि जनभावना का गला घोंटने के बजाय, सरकार संवैधानिक मर्यादाओं के भीतर रहकर ही हर कदम उठा रही है।

मुख्य बिंदु:

  • 2029 का चुनाव महिला आरक्षण के साथ संपन्न कराने का लक्ष्य।
  • संविधान सभा के मूल सिद्धांतों ‘One Person-One Vote-One Value’ पर जोर।
  • परिवर्तनकारी संविधान सुधारों को समयबद्ध तरीके से लागू करने की तैयारी।


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