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“पहलगाम आतंकी हमले के पीड़ितों को राष्ट्रपति मुर्मू की श्रद्धांजलि: आतंकवाद को खत्म करने का जताया दृढ़ संकल्प”






पहलगाम हमला: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने दी भावभीनी श्रद्धांजलि, आतंकवाद के खिलाफ जताया कड़ा संकल्प


देश की सुरक्षा और संवेदना: राष्ट्रपति का राष्ट्र को संबोधन

“आतंकवाद को जड़ से मिटाने का संकल्प अटूट”: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने पहलगाम हमले के पीड़ितों को दी भावभीनी श्रद्धांजलि

@rashtrapatibhvn (President of India):

“मैं पहलगाम आतंकी हमले के पीड़ितों को हार्दिक श्रद्धांजलि अर्पित करती हूँ। उस जघन्य कृत्य में मासूम जिंदगियों की दुखद क्षति हमारी सामूहिक स्मृति में अंकित है। मैं शोक संतप्त परिवारों के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त करती हूँ। पूरा देश उनके साथ खड़ा है। आतंक के ऐसे कृत्य शांति और एकता के प्रति हमारी अटूट प्रतिबद्धता को कम नहीं कर सकते। हम आतंकवाद के सभी रूपों को हर जगह हराने के अपने संकल्प में दृढ़ हैं।”

संवेदना और राष्ट्रीय एकजुटता

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने आज एक शक्तिशाली संदेश के माध्यम से उन मासूम नागरिकों और सुरक्षाकर्मियों को याद किया जिन्होंने पहलगाम में हुए कायराना आतंकी हमले में अपनी जान गंवाई थी। राष्ट्रपति का यह संदेश न केवल शोक संतप्त परिवारों के घावों पर मरहम लगाने जैसा है, बल्कि यह उन ताकतों के लिए भी एक कड़ी चेतावनी है जो भारत की अखंडता और शांति को भंग करने का सपना देखती हैं।

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राष्ट्रपति भवन द्वारा जारी इस संदेश ने पूरे देश को एकजुट होने का आह्वान किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि निर्दोषों का खून बहाने वाली इन घटनाओं को राष्ट्र कभी नहीं भूलेगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत एक शांतिप्रिय देश है, लेकिन शांति की इस राह में आने वाली किसी भी आतंकी बाधा को कुचलने की शक्ति भी हमारे पास है।

आतंक के खिलाफ जीरो टॉलरेंस: राष्ट्रपति का यह बयान ऐसे समय में आया है जब सीमा पार से होने वाली घुसपैठ और आंतरिक सुरक्षा को लेकर सुरक्षा एजेंसियां हाई अलर्ट पर हैं। उनका यह रुख सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति को संवैधानिक प्रमुख का समर्थन प्रदान करता है।

पहलगाम हमले की वह काली स्मृति

पहलगाम, जो अपनी प्राकृतिक सुंदरता और अमरनाथ यात्रा के आधार शिविर के रूप में जाना जाता है, उस समय दहल उठा था जब आतंकियों ने निहत्थे नागरिकों और पर्यटकों को निशाना बनाया था। उस जघन्य कृत्य ने न केवल कश्मीर बल्कि पूरे विश्व को स्तब्ध कर दिया था। आज भी उन गलियों में उस हमले के निशान और अपनों को खोने वालों की चीखें सुनाई देती हैं।

राष्ट्रपति ने अपने संदेश में ‘सामूहिक स्मृति’ (Collective Memory) शब्द का उपयोग कर यह संकेत दिया है कि राष्ट्र इन बलिदानों को व्यर्थ नहीं जाने देगा। यह हमला भारत की उस ‘सनातन संस्कृति’ पर प्रहार था जो ‘अतिथि देवो भव:’ के सिद्धांत पर चलती है।

सुरक्षा और शांति के प्रति अटूट प्रतिबद्धता

भारत ने पिछले कुछ वर्षों में आतंकवाद के खिलाफ अपनी रणनीति में भारी बदलाव किया है। राष्ट्रपति के शब्दों में ‘दृढ़ संकल्प’ की गूंज वैश्विक समुदाय को भी यह संदेश देती है कि भारत अब रक्षात्मक नहीं, बल्कि सुधारात्मक और दंडात्मक नीति अपना रहा है। शांति और एकता के प्रति प्रतिबद्धता का अर्थ यह कतई नहीं है कि भारत अपनी सुरक्षा से समझौता करेगा।

सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि राष्ट्रपति जैसे शीर्ष पद से इस प्रकार के कड़े संदेश सुरक्षा बलों का मनोबल बढ़ाते हैं, जो विषम परिस्थितियों में सीमा की रक्षा कर रहे हैं।

Pradesh Khabar विश्लेषण: सुरक्षा और संवेदना का संगम

एक ओर जहाँ प्रधानमंत्री मोदी केदारनाथ में आस्था और विकास की बात कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर राष्ट्रपति मुर्मू देश की सुरक्षा और शहीदों के प्रति सम्मान व्यक्त कर रही हैं। यह एक सशक्त भारत की तस्वीर है, जहाँ धर्म, विकास और सुरक्षा तीनों साथ-साथ चल रहे हैं। पहलगाम का वह हमला हमें याद दिलाता रहता है कि सतर्कता ही सुरक्षा है।


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