सूरजपुर न्यूज़: बेलाफूल महिला समूह ने लगाई 90 लाख की पोषण आहार यूनिट | Women Empowerment Surajpur






सूरजपुर: महिला स्वयं सहायता समूह ने लगाई 90 लाख की पोषण आहार यूनिट

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सूरजपुर | 23 अप्रैल, 2026

आत्मनिर्भरता की नई इबारत: दर्रीपारा की महिलाओं ने स्थापित की 90 लाख की आधुनिक ‘शक्ति आहार’ यूनिट

बेलाफूल महिला समूह अब 313 आंगनबाड़ी केंद्रों को सीधे आपूर्ति करेगा पौष्टिक दलिया और मीठा आहार

सूरजपुर: महिला सशक्तिकरण और कुपोषण मुक्त भारत की परिकल्पना को साकार करते हुए सूरजपुर जिले के एकीकृत बाल विकास परियोजना रामानुजनगर में एक क्रांतिकारी बदलाव आया है। ग्राम दर्रीपारा स्थित बेलाफूल महिला स्वयं सहायता समूह ने 90 लाख रुपये की लागत से एक आधुनिक पोषण आहार उत्पादन यूनिट की स्थापना कर ग्रामीण उद्यमिता का अनूठा उदाहरण पेश किया है।

कुल निवेश

₹90 लाख

लाभान्वित केंद्र

313 आंगनबाड़ी

मासिक उत्पादन

30 मीट्रिक टन

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इस यूनिट के माध्यम से अब स्थानीय स्तर पर ही ‘मीठा शक्ति आहार’ और ‘पौष्टिक नमकीन दलिया’ का निर्माण किया जाएगा। यह पहल न केवल बच्चों, गर्भवती और धात्री माताओं को ताजा एवं गुणवत्तापूर्ण आहार सुनिश्चित करेगी, बल्कि आपूर्ति श्रृंखला को छोटा और अधिक प्रभावी बनाकर समय पर वितरण को भी पुख्ता करेगी।

“यह यूनिट महिला सशक्तिकरण, पोषण सुरक्षा और स्थानीय उद्यमिता के त्रिवेणी संगम का उत्कृष्ट उदाहरण है। अब महिलाएँ स्वयं उत्पादक की भूमिका में आकर शासन की व्यवस्था का मजबूत हिस्सा बन रही हैं।”

आर्थिक सशक्तिकरण का नया मॉडल

बेलाफूल समूह की महिलाओं द्वारा संचालित इस यूनिट से ग्रामीण महिलाओं को नियमित आय का एक स्थायी स्रोत प्राप्त हुआ है। इसके साथ ही, उन्हें उत्पादन प्रबंधन, गुणवत्ता नियंत्रण, पैकेजिंग और वितरण जैसे क्षेत्रों में पेशेवर कौशल सीखने का अवसर मिल रहा है। जिला प्रशासन द्वारा इस प्रकार के नवाचारी प्रयासों को निरंतर प्रोत्साहन दिया जा रहा है, ताकि “आत्मनिर्भर ग्राम – सशक्त महिला” के लक्ष्य को प्राप्त किया जा सके।

यूनिट के मुख्य लाभ:

  • ताजा आपूर्ति: स्थानीय स्तर पर निर्माण होने से ताजा आहार सीधे केंद्रों तक पहुंचेगा।
  • कुपोषण पर प्रहार: आवश्यक प्रोटीन, विटामिन और खनिजों से समृद्ध आहार बच्चों के सर्वांगीण विकास में सहायक होगा।
  • कौशल विकास: ग्रामीण महिलाओं को औद्योगिक स्तर के कार्य का अनुभव और आर्थिक आत्मनिर्भरता।
  • समय की बचत: लंबी वितरण प्रक्रिया की जगह अब स्थानीय स्तर पर त्वरित आपूर्ति संभव होगी।

यह मॉडल जिले की अन्य परियोजनाओं के लिए भी एक प्रेरणास्रोत सिद्ध होगा। आने वाले समय में ऐसे प्रयासों से न केवल स्वास्थ्य सूचकांकों में सुधार होगा, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी एक नई दिशा मिलेगी।