पशु सखी प्रशिक्षण: छत्तीसगढ़ की महिलाएं अब बनेंगी पशुधन विशेषज्ञ, जानें बलरामपुर की इस विशेष पहल के बारे में





पशु सखी मॉडल: छत्तीसगढ़ में ग्रामीण महिलाओं का आर्थिक सशक्तिकरण

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छत्तीसगढ़: “पशु सखी” मॉडल से महिलाएं बन रही हैं आत्मनिर्भर, पशुपालन को मिला तकनीकी आधार

रायपुर, 29 अप्रैल 2026: राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत छत्तीसगढ़ में ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए “पशु सखी” मॉडल एक प्रभावी पहल के रूप में उभरा है। इसके माध्यम से महिलाओं को तकनीकी रूप से दक्ष बनाया जा रहा है, जिससे वे ग्रामीण परिवारों की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

बलरामपुर में 30 पशु सखियों का आवासीय प्रशिक्षण

बलरामपुर जिले में 30 पशु सखियों के लिए 17 दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान में चल रहे इस कार्यक्रम में उन्हें पशुपालन की आधुनिक तकनीकों की गहन जानकारी दी जा रही है।

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प्रशिक्षण के मुख्य बिंदु:

  • पशुओं की समुचित देखभाल और संतुलित आहार प्रबंधन।
  • नियमित टीकाकरण और नस्ल सुधार की तकनीकें।
  • रोगों की पहचान और प्राथमिक उपचार का ज्ञान।
  • गौशालाओं और पशु चिकित्सालयों का व्यावहारिक भ्रमण।

जिला पंचायत बलरामपुर की मुख्य कार्यपालन अधिकारी नयनतारा सिंह तोमर ने बताया कि पशुपालन ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। “पशु सखी” जैसी पहल महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने में मील का पत्थर साबित हो रही है। इनके माध्यम से पशुपालकों को गांव में ही समय पर मार्गदर्शन और सेवाएं मिल सकेंगी।

ग्रामीण विकास को मिलेगी गति

प्रदेश में संचालित ये प्रशिक्षण कार्यक्रम न केवल महिलाओं को स्वरोजगार दे रहे हैं, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन और पशुधन स्वास्थ्य में सुधार कर रहे हैं। प्रशिक्षण प्राप्त ये पशु सखियां आत्मनिर्भर छत्तीसगढ़ के निर्माण में अहम योगदान देंगी।