दुर्ग के कोलिहापुरी गांव का कमाल: कचरे से कर रहे ‘वेस्ट टू वेल्थ’ की कमाई





कोलिहापुरी का वेस्ट टू वेल्थ मॉडल

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दुर्ग के कोलिहापुरी में ‘वेस्ट टू वेल्थ’ मॉडल: कचरा बना ग्रामीण समृद्धि का आधार

रायपुर, 12 जून 2026: जिस प्लास्टिक कचरे को पर्यावरण के लिए बड़ी चुनौती माना जाता है, उसे दुर्ग जिले के ग्राम पंचायत कोलिहापुरी ने आय और रोजगार का जरिया बना दिया है।

प्रमुख बिंदु: जिले का पहला मटेरियल रिकवरी सेंटर (MRC) पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ आत्मनिर्भर ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मिसाल बन गया है।

वैज्ञानिक प्रबंधन और तकनीक का संगम

कलेक्टर श्री अभिजीत सिंह के मार्गदर्शन में विकसित यह केंद्र अब जिले के 381 गांवों से आने वाले प्लास्टिक कचरे का वैज्ञानिक तरीके से निपटान कर रहा है।

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  • दैनिक प्रसंस्करण: केंद्र में प्रतिदिन लगभग 150 किलोग्राम प्लास्टिक का प्रसंस्करण किया जाता है।
  • उत्पाद: आधुनिक मशीनों से प्लास्टिक को पिघलाकर ‘लम्प्स’ (Lumps) तैयार किए जाते हैं, जिन्हें निर्माण कंपनियों को बेचा जाता है।
  • डिजिटल मॉनिटरिंग: डीएमएफ मद से मिले जीपीएस युक्त ई-रिक्शा के जरिए कचरा संग्रहण की रियल-टाइम निगरानी की जा रही है।

आर्थिक स्वावलंबन

यह परियोजना न केवल आत्मनिर्भर है, बल्कि केंद्र को सभी खर्चों (बिजली, रखरखाव, मानदेय) के बाद हर महीने लगभग 15 हजार रुपये का शुद्ध लाभ हो रहा है। इस लाभ का एक हिस्सा ग्राम पंचायत और स्थानीय स्व-सहायता समूहों के साथ साझा किया जाता है।

रोजगार और सामाजिक सुरक्षा

इस पहल ने स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर पैदा किए हैं। श्रमिकों को मनरेगा दरों पर मजदूरी और बीमा सुरक्षा जैसी सुविधाएं प्रदान की जा रही हैं, जिससे सामुदायिक भागीदारी और तकनीक का सही समन्वय देखने को मिल रहा है।