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CG Assembly: संख्या बल से बची पर नैतिक रूप से हारी सरकार, कांग्रेस का बड़ा हमला






अविश्वास प्रस्ताव से बेनकाब हुई साई सरकार, खोया जनता का भरोसा: सुशील आनंद शुक्ला | Pradesh Khabar


स्थान: रायपुर
दिनांक: 18 जुलाई 2026
ब्यूरो: प्रदेश खबर नेटवर्क

संख्या बल से बची पर नैतिक रूप से हारी सरकार: अविश्वास प्रस्ताव के 136 बिंदुओं ने उड़ाए भाजपा के होश, सुशील आनंद शुक्ला का तीखा हमला

रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजनीति में मॉनसून सत्र के अंतिम दिनों में आया भूचाल अब सदन से निकलकर सड़कों और राजनीतिक गलियारों में पूरी तरह गरमा चुका है। विधानसभा में कांग्रेस विधायक दल की ओर से लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर मैराथन बहस के बाद भले ही शासकीय संख्या बल के आधार पर भारतीय जनता पार्टी की सरकार इस प्रस्ताव को पारित होने से रोकने में सफल रही हो, लेकिन विपक्ष ने इसे अपनी नैतिक और रणनीतिक जीत घोषित कर दिया है।

प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने आज राजधानी रायपुर में एक महत्वपूर्ण प्रेस वक्तव्य जारी करते हुए सत्तापक्ष पर तीखे प्रहार किए। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि संख्या बल के घमंड में चूर सरकार भले ही सदन के भीतर तकनीकी रूप से खुद को बचा ले गई, लेकिन अविश्वास प्रस्ताव के दौरान कांग्रेस के विधायकों द्वारा प्रस्तुत किए गए अकाट्य तर्कों, जमीनी तथ्यों और 136 बिंदुओं के विस्तृत आरोप पत्र के सामने सरकार का जनविरोधी और विकास विरोधी चेहरा पूरी तरह बेनकाब हो गया है।

“अविश्वास प्रस्ताव लाने के अपने मुख्य राजनीतिक और सामाजिक उद्देश्य में कांग्रेस पूरी तरह सफल रही है। सदन की कार्यवाही के दौरान कांग्रेस के एक-एक विधायक ने यह साबित कर दिया कि यह सरकार मात्र ढाई साल के अपने अल्प कार्यकाल में ही छत्तीसगढ़ की जनता का भरोसा पूरी तरह खो चुकी है। आज प्रदेश का हर वर्ग खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहा है।”

– सुशील आनंद शुक्ला, अध्यक्ष, संचार विभाग, छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी

‘मोदी की गारंटी’ केवल विज्ञापनों और संकल्प पत्र तक सीमित

सुशील आनंद शुक्ला ने भारतीय जनता पार्टी की चुनावी घोषणाओं और वादों पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि जिन मुद्दों को जनता के बीच ‘मोदी की गारंटी’ के नाम से जोर-शोर से प्रचारित कर भाजपा ने सत्ता हासिल की थी, सरकार बनते ही वह उन सभी पवित्र वादों को भूल गई। ढाई साल बीत जाने के बाद भी मोदी की गारंटी के अधिकांश बड़े और लोक-लुभावन वादे केवल भाजपा के संकल्प पत्र के पन्नों और सरकारी विज्ञापनों की फाइलों तक ही सीमित रह गए हैं। धरातल पर उनकी स्थिति शून्य है।

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उन्होंने वित्तीय कुप्रबंधन और कानून व्यवस्था पर चिंता जताते हुए कहा कि राज्य में प्रशासनिक नियंत्रण पूरी तरह समाप्त हो चुका है। सरकार न तो प्रदेश की कानून व्यवस्था को संभाल पा रही है और न ही राज्य की वित्तीय व्यवस्था को सुदृढ़ रख पाने में सक्षम साबित हुई है। आज छत्तीसगढ़ का आम नागरिक, व्यापारी और महिलाएं अपने ही घरों और शहरों में असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। चारों तरफ भय का माहौल व्याप्त है और पूर्ववर्ती सरकार के समय शुरू हुए विकास कार्य अब पूरी तरह ठप्प पड़ चुके हैं।

हर वर्ग बेहाल, बस्तर और सरगुजा के आदिवासियों में भारी आक्रोश

कांग्रेस संचार विभाग के प्रमुख ने प्रदेश की वर्तमान स्थिति का ब्यौरा देते हुए कहा कि राज्य सरकार की गलत आर्थिक और सामाजिक नीतियों, नौकरशाही के बेलगाम हो जाने, शासन के तानाशाही रवैये और जन कल्याणकारी योजनाओं को द्वेषवश बंद किए जाने के कारण प्रदेश का हर नागरिक परेशान है। जो योजनाएं कागजों पर चल भी रही हैं, उनके क्रियान्वयन में सरकारी उदासीनता साफ तौर पर देखी जा सकती है।

उन्होंने समाज के विभिन्न वर्गों की दुर्दशा को रेखांकित करते हुए कहा कि आज प्रदेश का गरीब, मजदूर, किसान, शिक्षित बेरोजगार युवा, शासकीय कर्मचारी, अधिकारी, गृहणियां और छात्र सरकार के खिलाफ लामबंद हैं। विशेष रूप से बस्तर और सरगुजा जैसे संवेदनशील जनजातीय क्षेत्रों के मूल निवासी आदिवासी अपनी जमीनों, अधिकारों और जल-जंगल-जमीन की सुरक्षा को लेकर गहरे संकट में हैं। वे सरकार की दमनकारी नीतियों से परेशान होकर सड़कों पर आंदोलन करने को मजबूर हैं।

भ्रष्टाचार और कमीशनखोरी के सवालों से भागती रही सरकार

विधानसभा के भीतर हुई चर्चा का उल्लेख करते हुए सुशील आनंद शुक्ला ने बताया कि कांग्रेस विधायक दल के नेताओं ने पूरी सजगता के साथ भाजपा सरकार के कार्यकाल में पनप रहे भ्रष्टाचार, संस्थागत कमीशनखोरी, भर्तियों में बड़े पैमाने पर हो रही अनियमितताओं, पदोन्नति में धांधली और वादाखिलाफी के गंभीर विषयों को लगातार विभिन्न विधायी नियमों और प्रक्रियाओं के तहत सदन के पटल पर उठाया।

उन्होंने आरोप लगाया कि इन गंभीर और जनहित से जुड़े मुद्दों पर मुख्यमंत्री अथवा उनके मंत्रियों की ओर से एक भी विषय पर तथ्यात्मक या संतोषजनक उत्तर नहीं दिया गया। सरकार के पास विपक्ष के तीखे सवालों का कोई जवाब नहीं था, जिसके कारण सत्तापक्ष के लोग गंभीर विषयों पर सदन में स्वस्थ चर्चा से लगातार भागते रहे और हंगामा कर मूल मुद्दों को भटकाने की कोशिश करते रहे। जिन घोषणाओं के दम पर भाजपा सत्ता की सीढ़ियां चढ़ी थी, वे सभी आंकड़े केवल कागजी बाजीगरी बनकर रह गए हैं।

तानाशाही प्रवृत्ति अपनाकर जनता की आवाज दबा रही सत्ता

सुशील आनंद शुक्ला ने कांग्रेस की भूमिका को स्पष्ट करते हुए कहा कि एक सजग और जिम्मेदार विपक्ष का दायित्व निभाते हुए कांग्रेस पार्टी पिछले ढाई वर्षों से लगातार सड़क से लेकर सदन तक सरकार को उसकी कमियों के प्रति सचेत करने का कार्य कर रही है। लोकतांत्रिक व्यवस्था में विपक्ष की आवाज जनता की आवाज होती है, जिसे सुनना सरकार का संवैधानिक कर्तव्य है।

परंतु, छत्तीसगढ़ का यह दुर्भाग्य है कि वर्तमान सरकार पूरी तरह से तानाशाही प्रवृत्ति अपनाकर सत्ता के मद में चूर हो चुकी है। वह जनता की जायज और लोकतांत्रिक आवाज को लगातार अनसुना कर रही है। इसी दंभ और उदासीनता को तोड़ने के लिए कांग्रेस विधायक दल ने सामूहिक रूप से सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने का ऐतिहासिक निर्णय लिया था। कांग्रेस अपने इस प्रयास में शत-प्रतिशत सफल रही है क्योंकि उसने सदन के माध्यम से प्रदेश की जनता के सामने सरकार की विफलताओं की पूरी कुंडली खोल कर रख दी है।


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