Advertisement

आत्मसमर्पित नक्सली अब लोकतंत्र के रास्ते अपनी नई राजनीतिक जमीन तैयार करने में जुट गए

आत्मसमर्पित नक्सली अब लोकतंत्र के रास्ते अपनी नई राजनीतिक जमीन तैयार करने में जुट गए हैं। तेलंगाना में रह रहे आत्मसमर्पित माओवादी नेताओं ने बस्तर की 12 विधानसभा सीटों पर फोकस करते हुए आगामी चुनाव की रणनीति बनानी शुरू कर दी है। इसके लिए राजनीतिक दल बनाने की तैयारी चल रही है।

सूत्रों के मुताबिक तेलंगाना के पुनर्वास केंद्र में रह रहे पूर्व नक्सली नेता थिपरी तिरूपति उर्फ देवजी, बंडी प्रकाश उर्फ प्रभात, पूलुरी प्रसाद उर्फ चंद्रना और सुजातका उर्फ पदमा इसकी अगुवाई कर रहे हैं।

छत्तीसगढ़ में पुनर्वास केंद्रों में रह रहे सतीश, चैतू, विकास और राजमन इनके संपर्क में हैं, जबकि महाराष्ट्र से सोनू दादा उर्फ वेणुगोपाल समन्वय कर रहा है। यह सभी तेलंगाना के रहने वाले हैं। यही वजह है कि जब वे अपने परिवार से मिलने तेलंगाना जाते हैं तो ये लोग भी उनसे मुलाकात करते हैं।

वहीं यह आगामी रणनीति तैयार करते हैं और लौटकर पुनर्वास केंद्रों में रह रहे नक्सलियों को बरगला रहे हैं। उन्हें जल, जंगल, जमीन के लिए लोकतांत्रिक तरीके से लड़ने के लिए तैयार कर रहे हैं। गूगल मीट जैसे माध्यम से ये लोग लगातार वीडियो कांफ्रेंस करते हैं।

इसके अलावा जम्पन्ना नाम के पूर्व सीसी लीडर ने भी अपनी डेमोक्रेटिक सोशलिस्ट पार्टी नाम से राजनीतिक पार्टी बनाने की घोषणा की है। फेसबुक पर उसके 10 हजार फॉलोअर्स हैं। जबकि वॉट्सएप चैनल से भी वह लोगों का समर्थन जुटाने की कोशिश कर रहा है।

दलित और आदिवासी पर फोकस| देवजी दलित नेता हैं। यही वजह है कि ये लोग दलित और आदिवासी वोट बैंक को साधने की रणनीति बना रहे हैं। ये लोग नक्सलियों की तरह पर्चे बनाकर भी बांट रहे हैं, लेकिन उसमें हथियार को कोई जिक्र नहीं है।

इस बार वे लोकतांत्रिक तरीके से लड़ने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। देवजी ने कई बार छत्तीसगढ़ आने के लिए भी संपर्क किया लेकिन यहां आने की अनुमति नहीं मिली। इसी तरह महाराष्ट्र सरकार ने भी देवजी को राज्य में घुसने नहीं दिया।

file_0000000093d882119d122d54d9d757b5

6 राज्यों में हैं आत्मसमर्पित नक्सली

छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश, तेलंगाना, ओडिशा और आंध्र में आत्मसमर्पित नक्सली पुनर्वास केंद्रों में रह रहे हैं। इसमें सबसे अधिक तेलंगाना कैडर के नक्सली लीडर हैं। छत्तीसगढ़ में 2948 नक्सली पुनर्वास केंद्र में रह रहे हैं। इसमें 5% तेलंगाना के रहने वाले हैं।

इसके अलावा तेलंगाना में करीब एक हजार नक्सली हैं, जिसमें 502 छत्तीसगढ़ के रहने वाले हैं। बाकी महाराष्ट्र में 76, ओडिशा में 50, आंध्र प्रदेश में 29 और मध्यप्रदेश में 11 छत्तीसगढ़ के रहने वाले पूर्व नक्सली केंद्रों में रह रहे हैं। तेलंगाना कैडर के नक्सलियों के निशाने पर यही 678 लोग हैं। इन्हें वहां प्रेरित किया जा रहा है कि वह छत्तीसगढ़ में लौटकर जल, जंगल, जमीन, आदिवासी के शोषण के खिलाफ लड़ें।

तेलंगाना में मिली हुई है खुली छूट छत्तीसगढ़ की पुनर्वास नीति के तहत आत्मसमर्पित नक्सलियों को केवल परिवार से मिलने के लिए बाहर जाने की अनुमति मिलती है, जबकि तेलंगाना में पूर्व माओवादी नेताओं को अपेक्षाकृत अधिक स्वतंत्रता मिली हुई है। इसी वजह से रणनीति का केंद्र भी तेलंगाना बना हुआ है।

सूत्रों के मुताबिक देवजी की तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी से तीन-चार बार मुलाकात हो चुकी है। हाल में सामने आई एक तस्वीर में देवजी, चंद्रना, सुजातका और सीपीआई(एम) के राज्य सचिव जॉन वेस्ली समेत अन्य नेता एक साथ दिखाई दिए। उस दौरान जनता की समस्याओं और शोषण के खिलाफ लोकतांत्रिक आंदोलनों में सक्रिय भागीदारी की बात कही गई थी।

पैसा-सोने का राज भी दफन

10 से अधिक बड़े नक्सली नेता पुनर्वास केंद्रों में हैं, लेकिन पुलिस को उन्होंने कभी यह नहीं बताया कि सोना और पैसा कहां दफन है। नक्सलियों से जुड़े सूत्रों की मानें तो करोड़ों रुपए नकद और 25 किलो सोना जमीन में नक्सलियों ने दबा रखा है। जब यह राजनैतिक पार्टी के तौर पर उतरेंगे तब वे इसे बाहर निकालकर चुनाव प्रचार और दूसरी चीजों में इसका उपयोग करेंगे।

ChatGPT Image Jul 20, 2026, 05_14_44 PM
ChatGPT Image Jul 20, 2026, 05_53_50 PM
ChatGPT Image Jul 20, 2026, 06_08_26 PM
ChatGPT Image Jul 20, 2026, 06_16_13 PM
ChatGPT Image Jul 20, 2026, 06_22_41 PM
WhatsApp Image 2026-08-14 at 23.12.06
WhatsApp Image 2026-08-14 at 23.16.05