रायपुर में कम उम्र में ही बच्चों के हाथों में दोपहिया या चारपहिया वाहनों की चाबी थमाना कितना खतरनाक साबित हो रहा है, इसका खुलासा ट्रैफिक पुलिस के आंकड़ों से हुआ

रायपुर में कम उम्र में ही बच्चों के हाथों में दोपहिया या चारपहिया वाहनों की चाबी थमाना कितना खतरनाक साबित हो रहा है, इसका खुलासा ट्रैफिक पुलिस के आंकड़ों से हुआ है। आंकड़ों के अनुसार पिछले डेढ़ साल में सड़क हादसों में 28 नाबालिगों की मौत हुई है, जबकि 85 नाबालिग गंभीर रूप से घायल हुए हैं।

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राजधानी के स्कूलों में पढ़ने वाले छात्रों की संख्या को देखें तो स्थिति और चिंताजनक है। सिर्फ 12वीं कक्षा में ही करीब 40 हजार छात्र हैं। इनमें से लगभग आधे छात्रों के पास वाहन हैं। इसी तरह 10वीं और 11वीं कक्षा के छात्रों को मिलाकर संख्या करीब 80 हजार है। यानी इन तीनों कक्षाओं में ही रायपुर में करीब 1.20 लाख छात्र पढ़ रहे हैं।

इनमें से सिर्फ 11 हजार छात्रों ने ही लर्निंग लाइसेंस बनवाया है। जबकि अनुमान के मुताबिक करीब 80 फीसदी नाबालिग बिना लाइसेंस के वाहन चला रहे हैं। इनमें भी बड़ी संख्या गियर वाली बाइक और स्कूटर चलाने वालों की है। इसकी जांच और कार्रवाई के लिए कोई प्रभावी सिस्टम नजर नहीं आ रहा है। कार्रवाई की जिम्मेदारी आरटीओ और पुलिस की है, लेकिन इनकी कार्रवाई ज्यादातर नेशनल हाईवे तक ही सीमित दिखाई देती है।

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राजधानी में बिना गियर वाली गाड़ियों की जगह नाबालिग हाईस्पीड, हैवी और महंगी गाड़ियां दौड़ा रहे हैं। कई मामलों में नाबालिग कार भी चलाते हुए मिलते हैं। संभ्रांत परिवारों में भी बच्चों के हाथों में कार और जीप की स्टेयरिंग थमा दी जाती है। यही पुलिस और आरटीओ के लिए सबसे बड़ी चुनौती है।

आरटीओ के मुताबिक 15 जुलाई तक राज्य में 1,19,933 लोगों को बिना गियर वाली गाड़ियों के लिए लर्निंग लाइसेंस जारी किया गया है। इसमें सिर्फ 32 हजार नाबालिग हैं, जिनकी उम्र 16 से 17 साल है। बाकी 18 साल से अधिक उम्र के लोग हैं, जो पहली बार लाइसेंस बनवा रहे हैं।

इनमें सबसे ज्यादा 21,695 लर्निंग लाइसेंस अकेले रायपुर में जारी हुए हैं। यानी प्रदेश के हर पांच में से लगभग एक नया लर्नर चालक राजधानी से है। इनमें करीब 11 हजार छात्र शामिल हैं। बिलासपुर में 14,384, दुर्ग में 10,476 और रायगढ़ में 9,765 लर्निंग लाइसेंस जारी हुए हैं।