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सुशासन की नई मिसाल: एमपी में ई-सेवा पोर्टल पर 1700 सेवाएं ऑनलाइन, समन-वारंट तामील में देश का पहला राज्य बना एमपी






मध्यप्रदेश में डिजिटल क्रांति: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में पेपरलेस हुई गवर्नेंस, सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश ने की सराहना


सुशासन और डिजिटल गवर्नेंस | विशेष रिपोर्ट

डिजिटल क्रांति से बदला मध्यप्रदेश: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर पेपरलेस कार्य संस्कृति को बढ़ावा, सर्वोच्च अदालत ने भी थपथपाई पीठ

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर मध्यप्रदेश में पेपरलेस कार्य संस्कृति और ग्रीन गवर्नेंस को निरंतर प्रोत्साहित किया जा रहा है। राज्य में डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से प्रशासनिक पारदर्शिता बढ़ाने और आम नागरिकों की सरकारी सेवाओं तक पहुंच को बेहद सुगम बनाने के लिए अभूतपूर्व नवाचार किए गए हैं। सर्वोच्च अदालत के मुख्य न्यायाधीश-न्याूर्ति सूर्यकांत ने जबलपुर के एक कार्यक्रम में मध्यप्रदेश की इस पेपरलेस कार्य प्रणाली और न्यायिक तकनीकी सुधारों की मुक्त कंठ से सराहना की है।

एक ही पोर्टल पर 56 विभागों की 1700 सेवाएं उपलब्ध

प्रदेश के नागरिकों की सुविधा के लिए ‘एमपी ई-सेवा पोर्टल’ एवं मोबाइल ऐप के माध्यम से सरकार के 56 विभागों की 1700 सेवाएं एक ही जगह उपलब्ध करा दी गई हैं। राज्य में पूरी तरह स्थापित हो चुकी ‘साइबर तहसील’ व्यवस्था को प्रतिष्ठित प्रधानमंत्री पुरस्कार भी मिल चुका है। इसके साथ ही भोपाल में देश के पहले साइबर पंजीयन कार्यालय की शुरुआत की गई है, जबकि कानून व्यवस्था को मजबूत करने के लिए ई-जीरो एफआईआर का शुभारंभ किया गया है। वर्तमान में राज्य की मंत्रि-परिषद की संपूर्ण कार्यवाही पूर्णतः पेपरलेस हो चुकी है, जिससे समय की बचत के साथ प्रशासनिक कसावट आई है।

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मध्यप्रदेश सरकार के प्रमुख डिजिटल नवाचार:

  • सिंगल विंडो सर्विस: एमपी ई-सेवा पोर्टल पर 56 विभागों की 1700 सरकारी सेवाएं ऑनलाइन उपलब्ध।
  • साइबर तहसील: जमीन के नामांतरण को आसान बनाने वाला नवाचार, जिसे मिला प्रधानमंत्री पुरस्कार।
  • संपदा 2.0: घर बैठे दस्तावेजों और जमीनों के ऑनलाइन पंजीयन (रजिस्ट्री) की अत्याधुनिक सुविधा।
  • देश में प्रथम: वारंट और समन की तामील के लिए ई-तकनीक का शत-प्रतिशत उपयोग करने वाला देश का पहला राज्य।
  • मंत्रि-परिषद: कैबिनेट की पूरी कार्यप्रणाली अब शत-प्रतिशत डिजिटल और पेपरलेस।

‘मिनिमम गवर्नमेंट – मैक्सिमम गवर्नेंस’ से सुशासन के नए आयाम

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सुशासन के मूल मंत्र को आत्मसात करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव प्रदेश में ‘मिनिमम गवर्नमेंट-मैक्सिमम गवर्नेंस’ की नीति पर आगे बढ़ रहे हैं। डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से शासकीय कार्यालयों में फाइलों की ऑनलाइन मॉनिटरिंग, समयबद्ध निराकरण और जवाबदेही तय की जा रही है। इस पारदर्शी व्यवस्था से भ्रष्टाचार में भारी कमी आई है और फाइलों की गति तेज हुई है। लोक सेवा केंद्रों और सीएम हेल्पलाइन के जरिए आम जनता की समस्याओं का त्वरित समाधान किया जा रहा है।

तकनीक के बदलते दौर में बदल रहा न्यायिक प्रशासन

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का मानना है कि पारदर्शिता और जवाबदेही सुशासन के दो मजबूत स्तंभ हैं। तकनीक आज सामाजिक और प्रशासनिक परिवर्तन का सबसे बड़ा कारक बन चुकी है। इसी कड़ी में प्रदेश के न्यायालय भी तेजी से हाईटेक हो रहे हैं। वर्षों से चली आ रही कागजी अभिलेखों की निर्भरता को खत्म करते हुए अब एफआईआर, चार्जशीट, केस डायरी, मेडिकल रिपोर्ट, फॉरेंसिक रिपोर्ट से लेकर समन और वारंट तक को डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन के जरिए “एंड-टू-एंड ई-प्रोसीडिंग” से जोड़ा जा रहा है। ई-फाइलिंग और डिजिटल केस मैनेजमेंट सिस्टम (सीएमएस) से न्याय प्रक्रिया तीव्र और कुशल हो रही है। यही नहीं, महाधिवक्ता कार्यालय को भी पूरी तरह पेपरलेस बनाने की दिशा में काम जारी है।

कमजोर वर्गों और महिलाओं में कानूनी जागरूकता बढ़ाना प्राथमिकता

राज्य सरकार समाज के कमजोर वर्गों, महिलाओं और बुजुर्गों में कानूनी जागरूकता बढ़ाने को अपनी सर्वोच्च प्राथमिकता मानती है। मुख्यमंत्री का स्पष्ट मत है कि कानून की भाषा ऐसी सरल होनी चाहिए जो न्याय की गुहार लगाने वाले अंतिम व्यक्ति को भी आसानी से समझ आ सके। डिजिटल युग में कानूनी प्रक्रियाओं को डिजिटली सशक्त करने से पूरी न्याय व्यवस्था अधिक पारदर्शी, संवेदनशील और उपयोगकर्ता के अनुकूल बन रही है, जो हमारी लोकतांत्रिक व्यवस्था को और अधिक जीवंत व मजबूत बनाएगी। जबलपुर आगमन पर न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने भी माना कि पूर्णतः पेपरलेस बनने की दिशा में मध्यप्रदेश का यह सफर पर्यावरण संरक्षण को भी बड़ा संबल प्रदान करेगा।

Pradesh Khabar News Network | ब्यूरो रिपोर्ट भोपाल


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