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विश्व उच्च रक्तचाप दिवस: सीएम डॉ. मोहन यादव की प्रदेशवासियों से अपील – तनाव और असंतुलित भोजन छोड़ें, योग को बनाएं जीवन का आधार






विश्व उच्च रक्तचाप दिवस: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का बड़ा संदेश – तनाव, अनियमितता और असंतुलित भोजन हैं बीमारियों की जड़, योग और अनुशासन से रहें स्वस्थ


स्वास्थ्य एवं जन-जागरूकता | विशेष कवरेज

तनाव और असंतुलित भोजन ही बीमारियों की जड़: विश्व उच्च रक्तचाप दिवस पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का प्रदेशवासियों से आह्वान – ‘योग, पौष्टिक आहार और अनुशासन को बनाएं जीवन का हिस्सा’

भोपाल: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने विश्व उच्च रक्तचाप दिवस (World Hypertension Day) के अवसर पर देश और प्रदेशवासियों को एक अत्यंत महत्वपूर्ण एवं संवेदनशील संदेश दिया है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में अत्यधिक मानसिक तनाव, दिनचर्या की अनियमितता और असंतुलित खान-पान ही उच्च रक्तचाप (हाई ब्लड प्रेशर) सहित अन्य गंभीर बीमारियों के मुख्य कारण बनकर उभरे हैं। उन्होंने आह्वान किया है कि उत्तम स्वास्थ्य की प्राप्ति के लिए समाज के प्रत्येक नागरिक को स्वयं आगे बढ़कर पहल करनी होगी और दूसरों को भी इसके प्रति निरंतर प्रेरित करना होगा।

‘साइलेंट किलर’ है उच्च रक्तचाप, जागरूकता ही असली बचाव

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अपने संदेश में कहा कि विश्व उच्च रक्तचाप दिवस हमें स्वास्थ्य के प्रति चौबीसों घंटे सतर्क रहने की याद दिलाता है। चिकित्सा विज्ञान में उच्च रक्तचाप को एक ‘साइलेंट किलर’ (अदृश्य घातक बीमारी) माना जाता है, क्योंकि शुरुआती दौर में इसके लक्षण स्पष्ट रूप से दिखाई नहीं देते, परंतु लंबे समय तक अनियंत्रित रहने पर यह हृदय घात (हार्ट अटैक), ब्रेन स्ट्रोक और किडनी फेलियर जैसी जानलेवा स्थितियों का कारण बनता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस बीमारी से बचने का एकमात्र और सबसे प्रभावी तरीका हमारी जीवनशैली में सकारात्मक सुधार लाना है।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का मुख्य संदेश:
“तनाव, अनियमितता और असंतुलित भोजन हमारे शरीर को बीमारियों का घर बना रहे हैं। विश्व उच्च रक्तचाप दिवस हमें जागरूक करता है कि हम पौष्टिक आहार, दैनिक योग और कड़े जीवन अनुशासन के माध्यम से खुद को तनाव मुक्त रखें। जब तक हम स्वयं अपने स्वास्थ्य के प्रति गंभीर नहीं होंगे, तब तक एक स्वस्थ समाज की कल्पना अधूरी है। आइए, उत्तम स्वास्थ्य के लिए आज ही संकल्प लें।”

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योग, पौष्टिक आहार और अनुशासन: सुखी जीवन के तीन स्वर्णिम सूत्र

मुख्यमंत्री ने भारतीय पारंपरिक ज्ञान और आयुर्वेद का उल्लेख करते हुए कहा कि ऋषि-मुनियों द्वारा प्रतिपादित योग और ध्यान की पद्धतियां मानसिक तनाव को जड़ से समाप्त करने में पूरी तरह सक्षम हैं। दैनिक जीवन में मात्र 30 मिनट का योग और प्राणायाम हमारे रक्त संचार को संतुलित रखता है और मस्तिष्क को शांति प्रदान करता है। इसके साथ ही उन्होंने डिब्बाबंद और अत्यधिक तैलीय भोजन का त्याग कर पारंपरिक, मौसमी और पौष्टिक आहार (संतुलित भोजन) को प्राथमिकता देने की बात कही। जीवन में समय पर सोने, जागने और कार्य करने का अनुशासन ही हमें मानसिक अवसाद से दूर रख सकता है।

मुख्यमंत्री के संदेश के अनुरूप स्वस्थ जीवनशैली के प्रमुख उपाय:

  • नियमित योग और प्राणायाम: प्रतिदिन सुबह कम से कम 20-30 मिनट अनुलोम-विलोम, कपालभाति और ध्यान (मेडिटेशन) करें, जो मानसिक तनाव को कम करने में सहायक हैं।
  • संतुलित एवं पौष्टिक आहार: भोजन में नमक और चीनी की मात्रा को नियंत्रित रखें। ताजे फल, हरी पत्तेदार सब्जियां और साबुत अनाज को प्राथमिकता दें। फास्ट फूड और प्रिजर्वेटिव युक्त खाद्य पदार्थों से पूरी तरह दूरी बनाएं।
  • शारीरिक सक्रियता: लिफ्ट के स्थान पर सीढ़ियों का उपयोग करें, सुबह या शाम को पैदल चलने (वॉक करने) की आदत डालें। शारीरिक श्रम शरीर में अतिरिक्त वसा और रक्तचाप को नियंत्रित रखता है।
  • तनाव प्रबंधन (Stress Management): कार्यस्थल और व्यक्तिगत जीवन के बीच संतुलन बनाएं। अपनी पसंद के रचनात्मक कार्यों, संगीत या कला के लिए समय निकालें ताकि मस्तिष्क को आराम मिल सके।
  • नियमित स्वास्थ्य जांच: 30 वर्ष की आयु पार करने के बाद प्रत्येक नागरिक को समय-समय पर अपने ब्लड प्रेशर की जांच करानी चाहिए ताकि किसी भी विसंगति का समय पर पता चल सके।

स्वास्थ्य क्षेत्र में मध्यप्रदेश सरकार की प्रतिबद्धता और प्रयास

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश सरकार प्रदेश के अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति तक बेहतर और सस्ती स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाने के लिए निरंतर कार्यरत है। राज्य सरकार द्वारा सरकारी अस्पतालों में निःशुल्क दवा वितरण, पैथोलॉजी जांच सुविधाओं का विस्तार और टेलीमेडिसिन के माध्यम से सुदूर ग्रामीण अंचलों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की सलाह उपलब्ध कराई जा रही है। इसके साथ ही, प्रदेशभर के आयुष्मान आरोग्य मंदिरों (हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर्स) में नागरिकों को योग प्रशिक्षण देने के साथ-साथ गैर-संचारी रोगों (NCDs) जैसे ब्लड प्रेशर और डायबिटीज की मुफ्त स्क्रीनिंग की जा रही है, ताकि प्रारंभिक स्तर पर ही बीमारियों को नियंत्रित किया जा सके।

एक नजर में वैश्विक और राष्ट्रीय चिंता:
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया भर में हर तीसरा वयस्क उच्च रक्तचाप से पीड़ित है, और इनमें से एक बड़ी आबादी इस बात से पूरी तरह अनजान है कि वे इस बीमारी की चपेट में हैं। भारत में भी युवाओं में बदलती लाइफस्टाइल के कारण इसके मामले तेजी से बढ़े हैं। यही कारण है कि म.प्र. शासन अब उपचारात्मक स्वास्थ्य (Curative Health) के साथ-साथ निवारक स्वास्थ्य (Preventive Health) पर सबसे ज्यादा ध्यान केंद्रित कर रहा है।

स्वस्थ मध्यप्रदेश से ही होगा समृद्ध मध्यप्रदेश का निर्माण

अपने संदेश के समापन में मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी भी राज्य की असली पूंजी वहाँ के नागरिकों का उत्तम स्वास्थ्य होता है। यदि नागरिक स्वस्थ और ऊर्जावान होंगे, तो वे प्रदेश और देश के विकास में अपना सर्वश्रेष्ठ योगदान दे सकेंगे। वर्ष 2047 तक ‘विकसित भारत’ और ‘विकसित मध्यप्रदेश’ के निर्माण के संकल्प को पूरा करने के लिए स्वास्थ्य सुरक्षा हमारी पहली प्राथमिकता होनी चाहिए। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सभी स्वयंसेवी संस्थाओं, चिकित्सकों और समाजसेवियों से भी अपील की है कि वे जमीनी स्तर पर व्यापक स्वास्थ्य जागरूकता अभियान चलाएं, जिससे कोई भी नागरिक अज्ञानता के कारण बीमारियों का शिकार न हो।

Pradesh Khabar News Network | ब्यूरो रिपोर्ट भोपाल


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