अखिलेश यादव का बड़ा आरोप: ‘अवैध उत्खनन से साज़िशन खत्म किया जा रहा है बांदा, नहीं चेते तो नक्शे से गायब हो जाएगा वजूद’
“नहीं संभले तो एक दिन दुनिया कहेगी: एक था बांदा”
सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने बांदावासियों को आगाह करते हुए कहा कि अगर जिले का शोषण और दोहन लगातार इसी रफ्तार से होता रहा, तो वह दिन दूर नहीं जब दुनिया कहेगी कि ‘एक था बांदा’। उन्होंने कहा कि आज सत्ता के संरक्षण में फल-फूल रहे खनन माफियाओं की वजह से ‘बांदा’ को मिटाया जा रहा है और यहाँ के संसाधनों को लूटकर दूसरी जगहों को बसाया जा रहा है। इस अंधाधुंध प्राकृतिक उत्पीड़न का असर अब जमीन और स्थानीय अर्थव्यवस्था पर भी दिखने लगा है।
अखिलेश यादव का खुला पत्र:
“बांदा के इस ‘प्राकृतिक उत्पीड़न’ के कारण स्थानीय पैदावार चक्र भी बुरी तरह प्रभावित होना शुरू हो चुका है और काम-कारोबार की कमी की वजह से लोग दूसरी जगह जा रहे हैं। इससे बांदा ‘प्राकृतिक पलायन’ का शिकार हो रहा है। इसी कारण की वजह से बांदा की हर संपत्ति का मूल्य भी घट रहा है और बांदा का मान भी। अगर पर्यावरण के नक्शे पर बांदा को बचाना है, तो सबको राजनीति से ऊपर उठकर आगे आना होगा।”
‘प्राकृतिक पलायन’ की मार झेल रहा है बांदा
अखिलेश यादव ने अपनी पोस्ट में बांदा की वर्तमान सामाजिक और आर्थिक स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि अंधाधुंध माइनिंग और प्राकृतिक संसाधनों के क्षरण की वजह से न सिर्फ मौसम का मिजाज बदला है, बल्कि कृषि आधारित पैदावार चक्र भी पूरी तरह गड़बड़ा गया है। स्थानीय स्तर पर रोजगार और काम-धंधे ठप हो चुके हैं, जिससे लोग अपना घर-बार छोड़कर पलायन करने को मजबूर हैं। इस व्यापक पलायन और बर्बादी के कारण क्षेत्र की संपत्तियों के दाम गिर रहे हैं और बांदा के ऐतिहासिक मान-सम्मान को ठेस पहुंच रही है।
अखिलेश यादव द्वारा उठाए गए मुख्य मुद्दे:
- निर्मम उत्खनन: सत्ता संरक्षित ठेकेदारों द्वारा पर्यावरण के नियमों को ताक पर रखकर अंधाधुंध माइनिंग की जा रही है।
- पैदावार चक्र प्रभावित: जलस्तर गिरने और प्रकृति से छेड़छाड़ के कारण बुंदेलखंड की पारंपरिक खेती संकट में है।
- प्राकृतिक पलायन: रोजगार की कमी और बिगड़ते पर्यावरण के चलते स्थानीय जनता पलायन कर रही है।
- अस्तित्व का संकट: आर्थिक और सामाजिक महत्व खोकर बांदा पर्यावरण के नक्शे से मिटने की कगार पर पहुंच रहा है।
सभी वर्गों से एकजुट होकर आंदोलन करने का आह्वान
बांदा के प्राकृतिक, सांस्कृतिक, धार्मिक व ऐतिहासिक गौरव को अक्षुण्ण रखने के लिए समाजवादी पार्टी के मुखिया ने एक बड़े जन-आंदोलन का खाका खींचा है। उन्होंने बांदा के स्थानीय नागरिकों, पत्रकारों, पर्यावरण संरक्षकों, छात्र-युवा संगठनों, महिला शक्ति सहित सभी साहित्यिक, सांस्कृतिक और सामाजिक सोसाइटियों से एकजुट होने की अपील की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह लड़ाई किसी एक दल की नहीं, बल्कि बांदा के अस्तित्व को बचाने की है। यदि आज सभी लोग राजनीति से ऊपर उठकर सक्रिय नहीं हुए, तो बांदा अपना सामाजिक-आर्थिक और ऐतिहासिक महत्व हमेशा के लिए खो देगा। सपा प्रमुख ने सोशल मीडिया पर #बांदा_बचाओ_भाजपा_हटाओ हैशटैग के साथ अपने इस अभियान की शुरुआत की है।









