छत्तीसगढ़ में पेट्रोल-डीजल की खुली बिक्री पर प्रतिबंध: आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत कार्रवाई, किसानों को विशेष छूट।

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बड़ी कार्रवाई

छत्तीसगढ़ में ईंधन की जमाखोरी और ब्लैक मार्केटिंग पर शासन का सर्जिकल स्ट्राइक: ड्रम, बोतल और जेरीकेन में पेट्रोल-डीजल की बिक्री पर तत्काल प्रभाव से पूर्ण प्रतिबंध

मुख्य ब्यूरो, जगदलपुर | प्रकाशित तिथि: 22 मई 2026
विभाग: खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग

जगदलपुर। छत्तीसगढ़ राज्य शासन ने प्रदेश में पेट्रोलियम पदार्थों की अवैध जमाखोरी, कालाबाजारी और असुरक्षित परिवहन को जड़ से समाप्त करने के लिए एक दूरगामी और कड़ा प्रशासनिक निर्णय लिया है। खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग द्वारा जारी एक नए राष्ट्रव्यापी प्रभाव वाले आदेश के तहत अब पूरे प्रदेश के भीतर सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों (Public Sector Oil Companies) और समानांतर विपणनकर्ता कंपनियों (Parallel Marketeers) के किसी भी रिटेल आउटलेट (पेट्रोल पंप) से ड्रम, प्लास्टिक की बोतलों, जेरीकेन या किसी भी अन्य बाहरी बर्तनों में पेट्रोल और डीजल का विक्रय पूरी तरह से प्रतिबंधित कर दिया गया है।

शासन द्वारा जारी आधिकारिक दिशा-निर्देशों के मुताबिक, सभी पेट्रोल पंप संचालकों को अब सख्त हिदायत दी गई है कि वे पेट्रोल और डीजल की आपूर्ति सीधे उपभोक्ताओं के वाहनों की ईंधन टंकी (Fuel Tank) में ही करेंगे। इस व्यवस्था को मैदानी स्तर पर बेहद कड़ाई से लागू करने का निर्णय लिया गया है ताकि ग्रीष्मकाल और आगामी मानसूनी सीजन में ईंधन की कृत्रिम कमी या अवैध भंडारण की स्थिति निर्मित न हो सके।


नियम तोड़ने पर ‘आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955’ के तहत दर्ज होगा आपराधिक केस

राज्य सरकार ने यह साफ कर दिया है कि यदि कोई भी पेट्रोल पंप संचालक या प्रबंधन इस शासकीय निर्देश का उल्लंघन करता पाया जाता है, तो इसे सामान्य अनियमितता नहीं माना जाएगा। शासन के आदेशानुसार, बाहरी बर्तनों या ड्रमों में ईंधन का अनधिकृत विक्रय पाए जाने पर संबंधित रिटेल आउटलेट के खिलाफ ‘मोटर स्पिरिट और उच्च वेग डीजल (प्रदाय तथा वितरण का विनियमन और अनाचार निवारण) आदेश 2005’ के तहत इसे पूर्णतः अप्राधिकृत और अवैध विक्रय की श्रेणी में रखा जाएगा।

ऐसी स्थिति के उजागर होने पर दोषी संचालकों के खिलाफ गंभीर कानूनी रुख अपनाते हुए ‘आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955’ (Essential Commodities Act 1955) के कड़े और गैर-जमानती प्रावधानों के अंतर्गत तत्काल नियमानुसार आपराधिक प्रकरण दर्ज किया जाएगा। इसके साथ ही संबंधित पेट्रोल पंप की डीलरशिप निरस्त करने और स्टॉक को जब्त करने जैसी वैधानिक कार्रवाई भी जिला प्रशासन द्वारा सुनिश्चित की जाएगी।


कृषि कार्य और अधोसंरचना विकास पर नहीं पड़ेगा असर: इन क्षेत्रों को मिली विशेष छूट

आम उपभोक्ताओं के लिए की गई इस भारी कड़ाई के बीच, राज्य शासन ने व्यावहारिक पहलुओं का भी पूरा ध्यान रखा है। सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि राज्य की जीवनरेखा यानी कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था तथा महत्वपूर्ण अधोसंरचनात्मक विकास कार्यों की गति पर इस प्रतिबंध का कोई भी प्रतिकूल प्रभाव न पड़े। इसके लिए नीतिगत आदेश में कुछ विशिष्ट श्रेणियों को ड्रम और जेरीकेन में ईंधन खरीदने की सशर्त और नियंत्रित रियायत दी गई है:

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छूट के अंतर्गत आने वाले प्रमुख क्षेत्र:

  • अन्नदाता किसान: वर्तमान में चल रहे रबी सीजन की फसल कटाई, थ्रेसिंग और आगामी खरीफ सीजन की कृषि तैयारियों के मद्देनजर ट्रैक्टर, कंबाइन हार्वेस्टर और सिंचाई पंपों के लिए किसानों को डीजल की मांग पर विशेष छूट प्रदान की गई है।
  • समय-सीमा वाले शासकीय कार्य: जिला कलेक्टर द्वारा चिन्हांकित किए गए ऐसे समस्त महत्वपूर्ण शासकीय प्रोजेक्ट्स जैसे रेलवे विस्तार कार्य, राष्ट्रीय राजमार्ग व आंतरिक सड़क निर्माण, और शासकीय भवन निर्माण, जिन्हें एक निश्चित समय-सीमा के भीतर पूर्ण किया जाना अनिवार्य है।
  • अत्यावश्यक नागरिक सेवाएं: स्वास्थ्य सेवाएं (अस्पतालों के जनरेटर सेट), लाइफ सपोर्ट एम्बुलेंस सेवाएं, और दूरसंचार व्यवस्था बनाए रखने वाले मोबाइल टावरों के निर्बाध संचालन के लिए आवश्यक बैकअप ईंधन।

मंजूरी के लिए तय की गई त्रिस्तरीय पारदर्शी प्रक्रिया: एसडीएम की जांच होगी अनिवार्य

इस विशेष छूट का दुरुपयोग रोकने और बिचौलियों पर लगाम कसने के उद्देश्य से खाद्य विभाग ने एक बेहद पारदर्शी और मजबूत प्रशासनिक प्रक्रिया (SOP) निर्धारित की है। इस प्रक्रिया के तहत किसी भी किसान, ठेकेदार या संस्था को खुले बर्तन में ईंधन प्राप्त करने के लिए सीधे डीलर के पास जाने की अनुमति नहीं होगी।

छूट का लाभ उठाने के लिए संबंधित क्षेत्र के अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) अर्थात एसडीएम (SDM) के समक्ष एक औपचारिक आवेदन प्रस्तुत करना होगा। एसडीएम द्वारा प्राप्त मांग पत्र का, वास्तविक आवश्यकता के आधार पर, बाकायदा और त्वरित तकनीकी परीक्षण किया जाएगा। एसडीएम की इस विस्तृत जांच और उनकी अधिकृत हरी झंडी (लिखित स्वीकृति) मिलने के बाद ही कोई भी पेट्रोल पंप संचालक सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन करते हुए इन विशेष श्रेणियों के ग्राहकों को ड्रम या जेरीकेन में निर्धारित मात्रा में ईंधन का वैध विक्रय कर सकेगा।

सुरक्षा मानकों का पालन अनिवार्य:
एसडीएम की अनुमति मिलने के बाद भी पेट्रोल पंप संचालकों को यह सुनिश्चित करना होगा कि ईंधन जिस कंटेनर या ड्रम में भरा जा रहा है, वह पूरी तरह से लीक-प्रूफ हो और विस्फोटक अधिनियम (Explosives Act) के सुरक्षा मापदंडों के अनुकूल हो, ताकि किसी भी अप्रिय आगजनी या दुर्घटना की आशंका को टाला जा सके।

जिला प्रशासन और उड़नदस्तों का गठन

आदेश के तत्काल क्रियान्वयन के लिए जगदलपुर सहित प्रदेश के सभी जिला कलेक्टरों को निर्देश दिए गए हैं कि वे खाद्य विभाग, राजस्व विभाग और स्थानीय पुलिस की संयुक्त टीम बनाकर लगातार आकस्मिक निरीक्षण (Surprise Inspection) करें। शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के सीमावर्ती पेट्रोल पंपों पर विशेष नजर रखी जाएगी ताकि सीमा पार ईंधन की तस्करी या अवैध परिवहन की गतिविधियों को समय रहते पूर्णतः रोका जा सके।

आधिकारिक संदर्भ: खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग, छत्तीसगढ़ शासन द्वारा जारी परिपत्र संख्या – 2026/ईंधन-नियंत्रण/04

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