भारत बनेगा ग्लोबल शिपिंग और लॉजिस्टिक्स का हब: गोथेनबर्ग में मर्सक के चेयरमैन से मिले पीएम मोदी
पोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर, ग्रीन शिपिंग और सप्लाई चेन को मजबूत करने के लिए अरबों डॉलर के निवेश विस्तार का खाका तैयार
गोथेनबर्ग: स्वीडन की अपनी ऐतिहासिक राजकीय यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत को वैश्विक विनिर्माण और रसद (Logistics) महाशक्ति बनाने की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाया है। गोथेनबर्ग में यूरोपीय उद्योगपतियों के साथ होने वाली हाई-स्तरीय राउंड टेबल बैठक से ठीक पहले, प्रधानमंत्री मोदी ने दुनिया की सबसे बड़ी कंटेनर शिपिंग और एकीकृत रसद कंपनियों में से एक, **ए.पी. मोलर – मर्सक (A.P. Moller – Maersk)** के चेयरमैन **रॉबर्ट मर्सक उग्ला (Robert Maersk Uggla)** से एक विशेष द्विपक्षीय मुलाकात की। इस उच्च स्तरीय बैठक में भारत के तटीय बुनियादी ढांचे (Port Infrastructure), सागरमाला परियोजना के विस्तार, ग्रीन शिपिंग कॉरिडोर और देश के लॉजिस्टिक्स सेक्टर में मर्सक समूह द्वारा निवेश को दोगुना करने को लेकर बेहद सकारात्मक चर्चा हुई। प्रधानमंत्री ने मर्सक प्रमुख के सामने भारत में मौजूद असीम संभावनाओं और व्यापार अनुकूल नीतियों का खाका रखा, जिस पर मर्सक समूह ने भारत को अपनी वैश्विक विस्तार नीति का मुख्य केंद्र बनाने की प्रतिबद्धता जताई है।
मर्सक के चेयरमैन रॉबर्ट मर्सक उग्ला के साथ हुई इस महत्वपूर्ण बैठक के तुरंत बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बैठक की तस्वीरें साझा करते हुए इसकी रणनीतिक प्राथमिकताओं को रेखांकित किया।
“गोथेनबर्ग में, मर्सक (Maersk) के चेयरमैन रॉबर्ट मर्सक उग्ला से मुलाकात की। हमने भारत में संभावनाओं के व्यापक दायरे और विशेष रूप से पोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर, लॉजिस्टिक्स और अन्य क्षेत्रों में निवेश को और गहरा करने पर चर्चा की।”
इस आधिकारिक बयान से यह पूरी तरह स्पष्ट है कि भारत सरकार देश के लॉजिस्टिक्स खर्च को जीडीपी के वर्तमान स्तर से घटाकर वैश्विक मानकों (लगभग 8-9%) के बराबर लाने के लिए मर्सक जैसे वैश्विक दिग्गजों की तकनीकी और रणनीतिक विशेषज्ञता का बड़े पैमाने पर लाभ उठाने जा रही है।
वैश्विक समुद्री व्यापार का संचालन करने वाली महाशक्ति
ए.पी. मोलर – मर्सक केवल एक कंपनी नहीं है, बल्कि यह दुनिया के कुल समुद्री व्यापार के एक बहुत बड़े हिस्से का अकेले नियंत्रण करती है। भारत के ‘ब्लू इकोनॉमी’ विजन और नेशनल लॉजिस्टिक्स पॉलिसी (NLP) के सफल क्रियान्वयन के लिए मर्सक की भूमिका बेहद रणनीतिक हो जाती है।
बैठक के प्रमुख रणनीतिक बिंदु:
- पोर्ट मॉडर्नाइजेशन और डीप-वॉटर पोर्ट्स: भारत इस समय वधावन (महाराष्ट्र) और अन्य रणनीतिक स्थानों पर मेगा डीप-वाटर पोर्ट्स विकसित कर रहा है। मर्सक इन बंदरगाहों पर अत्याधुनिक ऑटोमेशन और कंटेनर टर्मिनल ऑपरेशंस में बड़ा निवेश कर सकता है।
- ग्रीन शिपिंग और सस्टेनेबिलिटी: मर्सक वैश्विक स्तर पर ‘हरित अमोनिया’ और ‘ग्रीन मेथनॉल’ से चलने वाले जहाजों को बढ़ावा दे रहा है। भारत अपने राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन के तहत इन जहाजों के लिए ईंधन की आपूर्ति का एक बड़ा वैश्विक हब बनना चाहता है।
- अंतर्देशीय रसद (Inland Logistics) का नेटवर्क: मर्सक भारत में केवल बंदरगाहों तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि देश के भीतर बन रहे डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर्स (DFC) और मल्टी-मॉडल लॉजिस्टिक्स पार्क्स (MMLPs) से अपने नेटवर्क को जोड़कर लॉजिस्टिक्स चेन को सुव्यवस्थित करने की योजना बना रहा है।
भारत सरकार की व्यापार सुगमता (Ease of Doing Business) नीतियों और बुनियादी ढांचे पर दिए जा रहे विशेष जोर के कारण मर्सक जैसी वैश्विक कंपनियां भारतीय बाजार के प्रति अत्यधिक आकर्षित हैं। इस बैठक के मुख्य एजेंडे और उनसे भारत को होने वाले फायदों को निम्नलिखित तालिका के माध्यम से समझा जा सकता है:
| निवेश/सहयोग का क्षेत्र | चर्चा का मुख्य एजेंडा | भारतीय अर्थव्यवस्था पर संभावित प्रभाव |
|---|---|---|
| पोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर (बंदरगाह बुनियादी ढांचा) | नए टर्मिनलों का विकास, कंटेनर हैंडलिंग क्षमता को बढ़ाना और बंदरगाहों का पूर्ण डिजिटलीकरण। | भारतीय बंदरगाहों पर जहाजों का टर्नअराउंड समय (Turnaround Time) घटेगा, जिससे निर्यातकों की लागत में कमी आएगी। |
| मल्टी-मॉडल लॉजिस्टिक्स | रेल, सड़क और जलमार्ग को एकीकृत कर ‘एंड-टू-एंड’ सप्लाई चेन कनेक्टिविटी को मजबूत करना। | घरेलू और अंतरराष्ट्रीय व्यापार में रसद दक्षता बढ़ेगी, जिससे वैश्विक बाजार में भारतीय सामान अधिक प्रतिस्पर्धी होगा। |
| कौशल विकास और रोजगार | समुद्री परिवहन, डिजिटल लॉजिस्टिक्स और आधुनिक आपूर्ति श्रृंखला प्रबंधन में भारतीय युवाओं का प्रशिक्षण। | शिपिंग और सप्लाई चेन सेक्टर में हजारों नए उच्च-कुशल रोजगार के अवसरों का सृजन होगा। |
चीन के विकल्प के रूप में उभरता भारत का मजबूत बुनियादी ढांचा
भू-राजनीतिक दृष्टिकोण से यह बैठक बेहद अहम मानी जा रही है। भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारे (India-Middle East-Europe Economic Corridor – IMEC) को लेकर भारत की प्रतिबद्धता जगजाहिर है। मर्सक जैसी वैश्विक शिपिंग लाइन का भारत में अपने ऑपरेशंस को मजबूत करना आईएमईसी गलियारे को जमीन पर उतारने के लिए बेहद आवश्यक है।
रॉबर्ट मर्सक उग्ला के साथ वार्ता के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने भारत के पश्चिमी और पूर्वी तटों पर चल रहे बुनियादी ढांचे के कायाकल्प की जानकारी दी। मर्सक के चेयरमैन ने भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते (India-EU FTA) के लागू होने के बाद भारत को यूरोप से जोड़ने वाले समुद्री मार्गों पर व्यापार की गति कई गुना बढ़ने की संभावना जताई और इस कड़ी में भारत को अपना सबसे भरोसेमंद साझीदार बताया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मर्सक प्रमुख के साथ यह बैठक इस बात की पुष्टि करती है कि भारत की विदेश नीति आर्थिक विकास और धरातल पर दिखने वाले निवेश को ध्यान में रखकर तैयार की जा रही है। किसी भी देश की आर्थिक संप्रभुता और औद्योगिक विकास उसकी मजबूत रसद क्षमता (Logistics Might) पर निर्भर करती है। मर्सक जैसे वैश्विक दिग्गजों के साथ पोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर में होने वाली यह साझेदारी आने वाले वर्षों में भारतीय विनिर्माण और निर्यात को एक नया आसमान देगी। गोथेनबर्ग से शुरू हुई यह व्यापारिक वार्ता निश्चित रूप से भारत को वैश्विक व्यापार के केंद्र में स्थापित करने का मार्ग प्रशस्त करेगी।
संपादकीय दृष्टिकोण: मर्सक से मिला भरोसा और भारत की आर्थिक छलांग
गोथेनबर्ग में मर्सक के चेयरमैन रॉबर्ट मर्सक उग्ला के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यह विशेष मुलाकात भारत की आर्थिक कूटनीति की एक बड़ी सफलता है। वैश्विक व्यापार में मर्सक की हिस्सेदारी को देखते हुए, पोर्ट और लॉजिस्टिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर में उनका सहयोग भारत के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकता है। भारत सरकार की राष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स नीति का मुख्य उद्देश्य व्यापारिक लागत को कम करना है, और मर्सक जैसी कंपनियों के निवेश के बिना यह संभव नहीं है। पीएम मोदी ने कूटनीतिक बैठकों से इतर सीधे उद्योग जगत के इन शीर्ष कप्तानों से संवाद साधकर यह संदेश दे दिया है कि भारत बड़े वैश्विक निवेश के लिए पूरी तरह तैयार और प्रतिबद्ध है। ‘प्रदेश खबर न्यूज़ नेटवर्क’ का मानना है कि यह साझेदारी भारत के तटीय विकास और निर्यात क्षमता को एक अभूतपूर्व और आधुनिक विस्तार देगी।














