छत्तीसगढ़ में प्रशासनिक संकट: कांग्रेस ने राष्ट्रपति शासन की मांग की, जानें पूरा मामला





न्यूज अपडेट: छत्तीसगढ़ प्रशासनिक संकट

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छत्तीसगढ़ में प्रशासनिक संकट: कांग्रेस ने राष्ट्रपति शासन की मांग की

प्रदेश में सत्ताधारी दल और प्रशासन के बीच बढ़ते टकराव ने एक गंभीर संवैधानिक संकट पैदा कर दिया है। जिला कांग्रेस कमेटी, सरगुजा के अध्यक्ष बालकृष्ण पाठक ने राज्यपाल को ज्ञापन सौंपकर आरोप लगाया है कि प्रदेश में संवैधानिक तंत्र विफल हो चुका है। उन्होंने राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने की मांग की है।

मामले की पृष्ठभूमि

ज्ञापन के अनुसार, सीतापुर विधानसभा क्षेत्र में विधायक और उनके समर्थकों द्वारा राज्य सेवा के एक कनिष्ठ अधिकारी के साथ मारपीट की गई। यह घटना विधायक के निजी हितों से जुड़ी बताई जा रही है। मामले में सत्ता के प्रभाव के कारण दोषियों पर कोई कार्रवाई न होने से आक्रोशित होकर प्रदेश भर के राजस्व विभाग के अधिकारी और कर्मचारी अनिश्चितकालीन कलमबंद हड़ताल पर चले गए हैं।

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आमजन पर सीधा असर: राजस्व विभाग के कर्मचारियों की हड़ताल के कारण सरकारी कामकाज पूरी तरह ठप हो गया है, जिससे आम जनता को भारी परेशानी हो रही है:

  • आय, निवास और जाति प्रमाण पत्र जैसे जरूरी दस्तावेजों का काम रुका।
  • जमीन नामांतरण, बंटवारा और डायावर्सन प्रक्रियाएं बंद।
  • जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र जैसे बुनियादी कार्यों के लिए लोग भटक रहे हैं।

कांग्रेस की प्रमुख मांगें

कांग्रेस पार्टी ने सरकार को 5 दिनों का अल्टीमेटम दिया है:

  1. हड़ताल का समाधान: राजस्व विभाग की मांगों को मानते हुए हड़ताल समाप्त की जाए।
  2. संवैधानिक समीक्षा: प्रदेश में प्रशासनिक नियंत्रण टूटने के कारण राज्यपाल द्वारा केंद्र सरकार को राष्ट्रपति शासन के लिए प्रतिवेदन भेजा जाए।

कांग्रेस ने स्पष्ट कि यदि निर्धारित समय सीमा में इन मांगों पर कार्रवाई नहीं की गई, तो पार्टी जनहित में बड़े आंदोलन के लिए बाध्य होगी।