अपेक्स बैंक भर्ती: इंटरव्यू प्रक्रिया में विकेंद्रीकरण से अभ्यर्थियों में असंतोष, केंद्रीय स्तर पर भर्ती की मांग
रायपुर। छत्तीसगढ़ व्यावसायिक परीक्षा मण्डल (व्यापम) द्वारा छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी बैंक (अपेक्स बैंक) और विभिन्न जिला सहकारी केंद्रीय बैंकों में आयोजित संयुक्त भर्ती परीक्षा इन दिनों विवादों के घेरे में है। तकनीकी और प्रबंधकीय पदों के लिए हुई इस बड़ी भर्ती प्रक्रिया में ‘इंटरव्यू’ के स्तर पर अपनाई जा रही अलग-अलग कार्यप्रणाली ने प्रदेश के लाखों युवाओं के भविष्य को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अभ्यर्थियों का कहना है कि जब परीक्षा संयुक्त थी, तो चयन प्रक्रिया का अंतिम चरण यानी साक्षात्कार भी केंद्रीकृत होना चाहिए।
भर्ती का आधार और वर्तमान विसंगति
छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी बैंक (अपेक्स बैंक) और जिला सहकारी केंद्रीय बैंकों (रायपुर, दुर्ग, बिलासपुर, अंबिकापुर आदि) में कनिष्ठ प्रबंधक (आई.टी./प्रोग्रामर/कृषि), उप प्रबंधक (प्रोग्रामर) और सहायक प्रोग्रामर के पदों के लिए संयुक्त भर्ती आयोजित की गई थी। नियम के अनुसार, व्यापम द्वारा आयोजित लिखित परीक्षा के प्राप्तांकों के आधार पर साक्षात्कार (10% अंक) निर्धारित किए गए थे।
विसंगति तब सामने आई जब कनिष्ठ प्रबंधक पदों के लिए इंटरव्यू अपेक्स बैंक मुख्यालय द्वारा केंद्रीयकृत तरीके से लिए गए, लेकिन उप प्रबंधक (प्रोग्रामर) जैसे महत्वपूर्ण पदों के लिए रायपुर, बिलासपुर और जगदलपुर जैसे जिला सहकारी केंद्रीय बैंक अपना-अपना साक्षात्कार व्यक्तिगत (Individually) स्तर पर आयोजित करने की तैयारी में हैं।
‘इंडिविजुअल इंटरव्यू’ की जिद क्यों अनुचित है?
विशेषज्ञों और अभ्यर्थियों का मानना है कि भर्ती प्रक्रिया की नोडल एजेंसी ‘छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी बैंक’ को बनाया गया था। ऐसे में जिला स्तर पर इंटरव्यू का विकेंद्रीकरण पूरी तरह से अनुचित है। इसके प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं:
- पारदर्शिता पर संकट: जब अलग-अलग जिला बैंक अपने स्तर पर साक्षात्कार लेंगे, तो मूल्यांकन के मापदंडों में एकरूपता का अभाव रहेगा। एक जिले की इंटरव्यू कमेटी के सवाल और दृष्टिकोण दूसरे जिले से पूरी तरह अलग हो सकते हैं।
- समानता के अधिकार का हनन: एक ही पद के लिए अलग-अलग जिलों में उम्मीदवारों का सामना अलग-अलग कठिनाई स्तर की प्रक्रियाओं से होगा, जो मेरिट में आए प्रतिभावान अभ्यर्थियों के लिए अन्यायपूर्ण है।
- पक्षपात की आशंका: स्थानीय स्तर पर इंटरव्यू आयोजित करने से प्रशासनिक हेरफेर, भाई-भतीजावाद और स्थानीय प्रभाव की गुंजाइश बढ़ जाती है, जिससे पूरी चयन प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न लग सकता है।
नोडल एजेंसी की भूमिका और संवैधानिक जिम्मेदारी
विज्ञापन की कंडिकाएं स्पष्ट करती हैं कि सहकारिता विभाग ने इस संयुक्त भर्ती के लिए अपेक्स बैंक को मुख्य नोडल एजेंसी नियुक्त किया था। यदि कनिष्ठ प्रबंधकों का साक्षात्कार केंद्रीय स्तर पर हो सकता है, तो उप प्रबंधक (प्रोग्रामर) के लिए जिला स्तरीय व्यवस्था का कोई तार्किक आधार नहीं बनता। जिला सहकारी केंद्रीय बैंकों को यह समझना होगा कि वे एक स्वायत्त इकाई होने के बावजूद समग्र सहकारिता तंत्र का हिस्सा हैं। तकनीकी पदों के लिए इंटरव्यू अपेक्स बैंक की केंद्रीय विशेषज्ञ समिति द्वारा ही लिया जाना चाहिए ताकि निष्पक्षता सुनिश्चित हो सके।
युवाओं की मांग और शासन से उम्मीद
भर्ती प्रक्रियाओं में शुचिता बनाए रखना सरकार और बैंक प्रबंधन की नैतिक जिम्मेदारी है। प्रदेश के युवा अब मुख्यमंत्री और सहकारिता मंत्री से इस विषय पर त्वरित संज्ञान लेने की मांग कर रहे हैं। विवादों और संभावित न्यायालयीन अड़चनों से बचने का एकमात्र रास्ता यह है कि सभी पदों के साक्षात्कार जिला बैंकों के बजाय मुख्य नोडल एजेंसी (अपेक्स बैंक) द्वारा एक ही केंद्रीय व्यवस्था के तहत संपन्न कराए जाएं।
यदि इस प्रक्रिया को अभी नहीं सुधारा गया, तो छत्तीसगढ़ के युवाओं का बैंकिंग चयन प्रक्रिया से भरोसा डगमगा सकता है। पारदर्शिता ही वह माध्यम है जिससे योग्य युवाओं को अवसर मिल सकता है और सहकारिता विभाग की गरिमा बनी रह सकती है।
(यह खबर छत्तीसगढ़ के सहकारिता क्षेत्र की प्रशासनिक कार्यप्रणाली और अभ्यर्थियों के हितों के विश्लेषण पर आधारित है।)












