ऐतिहासिक पुराना कचहरी परिसर बना युवाओं के सपनों का गढ़: सेंट्रल लाइब्रेरी सह ‘मावा मोदोल’ और ‘हमर लक्ष्य’ पहल से संवर रहा कांकेर का कल
कांकेर। जिला मुख्यालय कांकेर स्थित ऐतिहासिक पुराना कचहरी परिसर इन दिनों केवल एक प्रशासनिक धरोहर मात्र नहीं रह गया है, बल्कि यह जिला प्रशासन की दूरदर्शिता से शिक्षा, संस्कृति और स्थानीय युवाओं के उज्ज्वल भविष्य का सबसे सशक्त और जीवंत केंद्र बनकर उभर रहा है। कलेक्टर निलेश कुमार महादेव क्षीरसागर तथा जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी हरेश मंडावी के कुशल मार्गदर्शन में संचालित ‘सेंट्रल लाइब्रेरी सह मावा मोदोल’ अध्ययन केंद्र जिले के ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों से आने वाले विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा और सफलता का एक नया प्रकाश स्तंभ बन चुका है।
इस केंद्र की सबसे बड़ी खूबी यह है कि यहां अध्ययनरत छात्र-छात्राएं न केवल छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) और व्यापम जैसी कठिन प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं, बल्कि अपने जीवन के बड़े सपनों को साकार करने की दिशा में भी पूरी मजबूती से कदम आगे बढ़ा रहे हैं। जिला प्रशासन की महत्वाकांक्षी पहल ‘हमर लक्ष्य’ के अंतर्गत विकसित यह केंद्र आज आधुनिक शिक्षा प्रणाली, प्रतियोगी परीक्षा मार्गदर्शन, स्थानीय भाषा संरक्षण और सांस्कृतिक संवर्धन का एक उत्कृष्ट राष्ट्रीय उदाहरण बन चुका है। यह अनूठी प्रशासनिक पहल युवाओं के सपनों को नई उड़ान और दिशा देने के साथ-साथ जिले की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को भावी पीढ़ी के लिए सहेजने में मील का पत्थर साबित हो रही है।
1. ‘हमर लक्ष्य’ और ‘मावा मोदोल’ का उद्देश्य: एक नजर में
बस्तर संभाग का कांकेर जिला अपनी जनजातीय संस्कृति और असीम प्राकृतिक संसाधनों के लिए जाना जाता है। लेकिन लंबे समय से यहां के युवाओं को उच्च स्तरीय कोचिंग, शांत अध्ययन वातावरण और प्रासंगिक पाठ्य सामग्रियों के लिए बड़े शहरों जैसे रायपुर, बिलासपुर या दुर्ग-भिलाई का रुख करना पड़ता था। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों के लिए यह एक बड़ा अवरोध था। इसी अवरोध को दूर करने के लिए जिला प्रशासन ने पुराना कचहरी परिसर के ऐतिहासिक भवनों का पुनरुद्धार कर उन्हें ज्ञान के मंदिरों में तब्दील कर दिया।
‘मावा मोदोल’ का स्थानीय बोली में अर्थ होता है ‘हमारा आदर्श’ या ‘हमारा मार्गदर्शक’। इस केंद्र ने न केवल बुनियादी ढांचा तैयार किया, बल्कि एक ऐसा इकोसिस्टम तैयार किया है जहां करियर गाइडेंस से लेकर मानसिक तनाव को दूर करने तक की काउंसलिंग युवाओं को एक ही छत के नीचे मिल जाती है। ‘हमर लक्ष्य’ योजना के तहत यह सुनिश्चित किया गया है कि जिला मुख्यालय का यह प्रयास केवल चुनिंदा लोगों तक सीमित न रहे, बल्कि समाज के अंतिम छोर पर बैठे युवा भी इसका समान रूप से लाभ उठा सकें।
मुख्य विशेषताएं और उपलब्ध सुविधाएं:
- सुव्यवस्थित और शांत वातावरण: पूरी तरह से वातानुकूलित (AC) और आधुनिक फर्नीचर से सुसज्जित रीडिंग रूम, जहां छात्र बिना किसी व्यवधान के 12 से 14 घंटे तक पढ़ाई कर सकते हैं।
- डिजिटल और फिजिकल लाइब्रेरी: हजारों की संख्या में मानक संदर्भ पुस्तकें, एनसीईआरटी, छत्तीसगढ़ ग्रंथ अकादमी की किताबें, दैनिक समाचार पत्र और विभिन्न राष्ट्रीय पत्रिकाएं उपलब्ध हैं।
- विशेषज्ञ कोचिंग कक्षाएं: राज्य प्रशासनिक सेवा (CGPSC), बैंकिंग, रेलवे, और व्यापम की परीक्षाओं के लिए अनुभवी शिक्षकों और विषय विशेषज्ञों द्वारा नियमित और मानकीकृत कक्षाएं।
- शारीरिक और व्यावहारिक प्रशिक्षण: पुलिस और रक्षा सेवाओं में जाने के इच्छुक युवाओं के लिए मैराथन क्लासेस और व्यावहारिक मार्गदर्शन की व्यवस्था।
2. हर दिन 1000 युवाओं की उपस्थिति: नोडल अधिकारी ने साझा किए आंकड़े
सेंट्रल लाइब्रेरी सह मावा मोदोल के नोडल अधिकारी एवं जिला मिशन समन्वयक नवनीत पटेल ने इस सफलता यात्रा पर विस्तार से प्रकाश डाला है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में इस केंद्र की लोकप्रियता और उपयोगिता इस कदर बढ़ चुकी है कि प्रतिदिन लगभग एक हजार (1000) से अधिक विद्यार्थी इस अध्ययन केंद्र का प्रत्यक्ष लाभ उठा रहे हैं। युवाओं की इतनी बड़ी संख्या यह दर्शाती है कि कांकेर के युवाओं में आगे बढ़ने और अपनी तकदीर बदलने की कितनी तीव्र ललक है।
पटेल के अनुसार, यहां विद्यार्थियों के लिए शांत एवं पूरी तरह से सुव्यवस्थित अध्ययन वातावरण सुनिश्चित करना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता रही है। वर्तमान में छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) सहित विभिन्न राज्य स्तरीय प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए विशेष क्रैश कोर्स और नियमित कक्षाएं संचालित की जा रही हैं।
– नवनीत पटेल, नोडल अधिकारी व जिला मिशन समन्वयक
3. सफलता की नई इबारत: 89 युवा अब तक बन चुके हैं शासकीय अधिकारी-कर्मचारी
जिला शिक्षा अधिकारी रमेश कुमार निषाद के सतत मार्गदर्शन में इस अध्ययन केंद्र को लगातार और अधिक आधुनिक और छात्र-अनुकूल विकसित करने की दिशा में कार्य योजनाएं बनाई जा रही हैं। इस केंद्र में उपलब्ध उच्च स्तरीय सुविधाओं, तकनीकी संसाधनों और विषय विशेषज्ञों के निरंतर मार्गदर्शन का ही यह सुखद और सकारात्मक परिणाम है कि अब तक इस केंद्र से नियमित रूप से पढ़ाई कर चुके 89 युवाओं ने विभिन्न शासकीय पदों पर सफलता प्राप्त कर कांकेर जिले का गौरव बढ़ाया है।
सफलता का यह आंकड़ा किसी भी सरकारी या निजी संस्थान के लिए एक बड़ी उपलब्धि है। सफल होने वाले इन 89 युवाओं में से कई ऐसे हैं जो अत्यंत साधारण पृष्ठभूमि से आते हैं, जिनके परिवारों के पास बड़े शहरों में कोचिंग कराने की वित्तीय क्षमता नहीं थी। आज वे छत्तीसगढ़ शासन के विभिन्न विभागों में अधिकारी, कर्मचारी, शिक्षक और पुलिस बल के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। यह ऐतिहासिक संचय इस केंद्र की उपयोगिता, प्रासंगिकता और इसकी प्रशासनिक प्रभावशीलता को पूरी तरह से प्रमाणित करता है।
| क्र. | पहल/संस्थान का नाम | मार्गदर्शक/नेतृत्वकर्ता | प्रमुख लाभ/उपलब्धि |
|---|---|---|---|
| 1 | सेंट्रल लाइब्रेरी सह मावा मोदोल | कलेक्टर निलेश कुमार महादेव क्षीरसागर व सीईओ हरेश मंडावी | प्रतिदिन 1000 विद्यार्थियों को शांत और सुव्यवस्थित अध्ययन वातावरण। |
| 2 | ‘हमर लक्ष्य’ महत्वाकांक्षी पहल | जिला प्रशासन कांकेर | प्रतियोगी परीक्षा मार्गदर्शन, करियर काउंसलिंग और भाषा संरक्षण का एकीकरण। |
| 3 | विशेष मैराथन क्लासेस | नोडल अधिकारी नवनीत पटेल व टीम | उप निरीक्षक (SI) एवं CGPSC की परीक्षाओं के लिए त्वरित और सटीक तैयारी। |
| 4 | सफलता के कीर्तिमान | जिला शिक्षा अधिकारी रमेश कुमार निषाद का मार्गदर्शन | अब तक कुल 89 युवाओं का विभिन्न शासकीय विभागों एवं पदों पर चयन। |
| 5 | कोयाबाना आदिवासी संग्रहालय | स्थानीय जनजातीय विशेषज्ञ और प्रशासन | गोंडी और हल्बी भाषाओं का जीवित प्रशिक्षण और आदिवासी इतिहास का संरक्षण। |
4. शिक्षा के साथ संस्कृति का अनूठा संगम: कोयाबाना आदिवासी संग्रहालय
पुराना कचहरी परिसर की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह केवल आधुनिक और पारंपरिक किताबी ज्ञान का केंद्र नहीं है, बल्कि यह आदिवासी बाहुल्य बस्तर संभाग की समृद्ध संस्कृति, इतिहास और परंपराओं के संरक्षण का भी एक बेहद महत्वपूर्ण माध्यम बन चुका है। आधुनिकता की दौड़ में जहां स्थानीय बोलियां और संस्कृतियां पीछे छूटती जा रही हैं, वहीं कांकेर जिला प्रशासन ने इस परिसर के भीतर एक अद्भुत सांस्कृतिक अनूठा संगम स्थापित किया है।
परिसर में विशेष रूप से स्थापित ‘कोयाबाना आदिवासी संग्रहालय’ स्थानीय जनजातीय संस्कृति, उनकी प्राचीन परंपराओं, विशिष्ट जीवनशैली, बस्तर के ऐतिहासिक संघर्षों और उनके गौरवशाली इतिहास को जीवंत रूप से प्रदर्शित और संरक्षित करने का महती कार्य कर रहा है। यहाँ आने वाले युवा अपनी जड़ों से परिचित हो रहे हैं, जिससे उनमें अपनी संस्कृति के प्रति हीनभावना के बजाय एक गौरव की भावना विकसित हो रही है।
मातृभाषा का संरक्षण: गोंडी और हल्बी भाषाओं का प्रशिक्षण
संग्रहालय के साथ-साथ इस परिसर में बस्तर अंचल की मूल भाषा-बोलियों, जैसे गोंडी एवं हल्बी भाषाओं का नियमित और प्रामाणिक प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है। वर्तमान में जिले के लगभग 80 विद्यार्थी इन स्थानीय भाषाओं के गहन अध्ययन और व्याकरण से जुड़े हुए हैं। इस प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य यह है कि नई पीढ़ी अपनी मातृभाषा, लोकगीतों, लोककथाओं और अपनी सांस्कृतिक जड़ों से वैचारिक और व्यावहारिक रूप से जुड़ी रह सके। साथ ही, शासकीय सेवाओं में जाने वाले स्थानीय युवाओं को भी इन भाषाओं की जानकारी होने से फील्ड में काम करते समय ग्रामीण जनता से सीधा और आत्मीय संवाद स्थापित करने में मदद मिल रही है।
5. सौंदर्य और स्वच्छता का प्रतीक: पर्यटकों और अभिभावकों के लिए आकर्षण का केंद्र
प्रशासनिक उपेक्षा के कारण कभी जर्जर हो रहे इस पुराने कचहरी परिसर की कायापलट इस तरह की गई है कि आज इसका ऐतिहासिक प्रवेश द्वार अपनी प्राचीन भव्यता के साथ इतिहास की गवाही देता नजर आता है। परिसर के भीतर विकसित किया गया सुंदर उद्यान, चारों तरफ फैली मखमली हरियाली, छायादार वृक्ष और पूरी तरह से स्वच्छ एवं प्रदूषण मुक्त वातावरण इसकी सुंदरता में चार चांद लगाते हैं।
यह परिसर न केवल पढ़ाई करने वाले छात्र-छात्राओं को मानसिक शांति प्रदान करता है, बल्कि यहां आने वाले अभिभावकों, स्थानीय नागरिकों और जिले के बाहर से आने वाले पर्यटकों को भी अपनी ओर आकर्षित करता है। यहाँ आने वाले हर एक आगंतुक इस परिसर की स्थापत्य कला, रखरखाव, स्वच्छता और जिला प्रशासन द्वारा की गई इस अनूठी व्यवस्था की मुक्त कंठ से सराहना करते हैं। यह परिसर इस बात का जीवंत उदाहरण बन गया है कि अगर प्रशासनिक इच्छाशक्ति सुदृढ़ हो, तो पुरानी और अनुपयोगी हो रही ऐतिहासिक धरोहरों को समाज के पुनर्निर्माण का सबसे बड़ा केंद्र बनाया जा सकता है।
निश्चित रूप से, कांकेर का यह ‘मावा मोदोल’ और ‘हमर लक्ष्य’ मॉडल आज पूरे छत्तीसगढ़ के लिए एक अनुकरणीय उदाहरण है। शिक्षा और संस्कृति का यह तालमेल न केवल बस्तर के युवाओं को नक्सलवाद और भटकाव के रास्तों से दूर रखकर मुख्यधारा में स्थापित कर रहा है, बल्कि देश के विकास की अग्रिम पंक्ति में खड़े होने का हौसला भी दे रहा है।
Ashish Sinha
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