गुवाहाटी में BRICS एंटी-ड्रग बैठक: भारत ने रखा वर्चुअल वर्किंग ग्रुप का प्रस्ताव






गुवाहाटी में BRICS एंटी-ड्रग प्रमुखों की बैठक: भारत ने रखा वर्चुअल वर्किंग ग्रुप का प्रस्ताव | प्रदेश खबर



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गुवाहाटी में BRICS एंटी-ड्रग प्रमुखों की बैठक शुरू: भारत ने वैश्विक मादक पदार्थ नेटवर्क को तोड़ने के लिए रखा ‘वर्चुअल वर्किंग ग्रुप’ का ऐतिहासिक प्रस्ताव

गुवाहाटी, 6 जुलाई: असम की राजधानी गुवाहाटी में सोमवार से BRICS (ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका, मिस्र, इथियोपिया, ईरान, इंडोनेशिया, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात) संगठन के सदस्य देशों की एंटी-ड्रग एजेंसियों के प्रमुखों की एक अत्यंत महत्वपूर्ण और उच्च स्तरीय दो-दिवसीय बैठक का शुभारंभ हुआ। वैश्विक स्तर पर पैर पसार रहे संगठित मादक पदार्थ नेटवर्क, सिंथेटिक ड्रग्स के बढ़ते खतरे और डार्कनेट आधारित ड्रग सिंडिकेट्स पर नकेल कसने के उद्देश्य से भारत ने इस मंच पर एक बड़ा और रणनीतिक प्रस्ताव रखा है। भारत की ओर से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रियल-टाइम खुफिया सूचनाओं के आदान-प्रदान और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल के लिए एक समर्पित ‘BRICS वर्चुअल वर्किंग ग्रुप’ (Virtual Working Group) स्थापित करने की वकालत की गई है।

वैश्विक खतरा बना आधुनिक मादक पदार्थ व्यापार: महानिदेशक अनुराग गर्ग

इस ऐतिहासिक सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए भारत के नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) के महानिदेशक अनुराग गर्ग ने वर्तमान समय में नशीले पदार्थों की तस्करी के लिए अपनाए जा रहे तकनीकी और परिष्कृत तरीकों पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने दो-टूक शब्दों में कहा कि मादक पदार्थों की तस्करी के आधुनिक और अत्यधिक परिष्कृत तरीकों के उभरने से यह समस्या अब किसी एक क्षेत्र या देश तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि इसने एक अत्यंत जटिल वैश्विक खतरे का रूप ले लिया है।

महानिदेशक अनुराग गर्ग ने अपने संबोधन में कहा, “आधुनिक, अत्यधिक परिष्कृत और तकनीकी रूप से उन्नत तस्करी प्रणालियों के उदय ने उस समस्या को एक ‘हाइपर-कनेक्टेड वैश्विक खतरे’ में बदल दिया है जो कभी केवल एक स्थानीय या क्षेत्रीय चुनौती मानी जाती थी। आज के ड्रग तस्कर पारंपरिक सीमाओं को लांघकर डिजिटल दुनिया और वैश्विक वित्तीय प्रणालियों का दुरुपयोग कर रहे हैं। इस बहुआयामी और अदृश्य चुनौती का सामना करने के लिए दुनिया भर की कानून प्रवर्तन एजेंसियों को भी अपनी पारंपरिक कार्यप्रणाली से बाहर निकलकर डिजिटल और नेटवर्क-केंद्रित दृष्टिकोण अपनाना होगा।”

भारत का बड़ा कदम: ‘BRICS वर्चुअल वर्किंग ग्रुप’ का प्रस्ताव

वैश्विक स्तर पर उभरते मादक पदार्थ तस्करी के पैटर्न्स और तकनीकी चुनौतियों से प्रभावी ढंग से निपटने में BRICS देशों की सामूहिक भूमिका को रेखांकित करते हुए एनसीबी प्रमुख ने एक विशेष और दूरगामी तंत्र बनाने का सुझाव दिया। उन्होंने सम्मेलन में आधिकारिक तौर पर प्रस्ताव प्रस्तुत करते हुए कहा, “मैं मादक पदार्थों की तस्करी के इन तेजी से बदलते और तकनीकी रूप से उन्नत रुझानों को व्यवस्थित रूप से हल करने के लिए एक समर्पित ‘BRICS वर्चुअल वर्किंग ग्रुप’ की स्थापना का प्रस्ताव करता हूँ।”

इस प्रस्तावित वर्चुअल ग्रुप के कार्य और फायदों को स्पष्ट करते हुए उन्होंने आगे कहा कि यह तंत्र सदस्य देशों के लिए एक अत्यंत जीवंत और गतिशील डिजिटल मंच के रूप में कार्य करेगा। इसके मुख्य लाभ निम्नलिखित होंगे:

  • नियमित डिजिटल बैठकें: सदस्य देशों के अधिकारी और विशेषज्ञ बिना किसी भौगोलिक बाधा के नियमित अंतराल पर जुड़ सकेंगे और तात्कालिक चुनौतियों पर विमर्श कर सकेंगे।
  • रियल-टाइम इंटेलिजेंस शेयरिंग: अंतरराष्ट्रीय सीमाओं के पार सक्रिय ड्रग रैकेट और खेपों के बारे में वास्तविक समय (Real-Time) में खुफिया जानकारी साझा की जा सकेगी, जिससे अपराधियों को संभलने का मौका नहीं मिलेगा।
  • बदलते पैटर्न्स का विश्लेषण: डार्कनेट, क्रिप्टोकरेंसी और नई साइकोएक्टिव सामग्रियों (NPS) के उपयोग से जुड़े ट्रेंड्स का गहन डेटा-आधारित विश्लेषण किया जाएगा।
  • संयुक्त कानून प्रवर्तन संचालन: विभिन्न देशों की एजेंसियों के बीच बिना किसी प्रशासनिक देरी के निर्बाध समन्वय स्थापित किया जा सकेगा, जिससे समन्वित और संयुक्त अंतरराष्ट्रीय ऑपरेशन्स को अंजाम देना बेहद आसान हो जाएगा।

अग्रिम पंक्ति के अधिकारियों की क्षमता निर्माण पर जोर

अनुराग गर्ग ने मादक पदार्थ नियंत्रण के क्षेत्र में केवल कड़े कानूनों या खुफिया सूचनाओं तक सीमित रहने के बजाय मैदानी स्तर पर काम करने वाले फ्रंटलाइन अधिकारियों (सीमा सुरक्षा, बंदरगाह अधिकारियों और जमीनी पुलिस बल) की क्षमता निर्माण (Capacity Building) को सबसे महत्वपूर्ण कड़ी बताया। उन्होंने सदस्य देशों से आग्रह किया कि वे आपसी सहयोग के माध्यम से विशेष सीमा-पार प्रशिक्षण पहल (Cross-Border Training Initiatives) शुरू करें और अपनी सर्वोत्तम प्रथाओं (Best Practices) को निरंतर एक-दूसरे के साथ साझा करें।

एनसीबी महानिदेशक ने विस्तारित BRICS परिवार की सामूहिक शक्ति को याद दिलाते हुए विश्वास व्यक्त किया और कहा, “एक विस्तारित और मजबूत BRICS परिवार के रूप में, हम सभी सदस्य देशों के पास वह सामूहिक और अप्रतिरोध्य शक्ति है जो वास्तव में इस वैश्विक खतरे के खिलाफ पूरी दुनिया में एक ठोस और सकारात्मक बदलाव ला सकती है। हमारा साझा प्रयास और दृढ़ संकल्प ही एक ड्रग-मुक्त समाज (Drug-Free Society) की कल्पना को वास्तविकता में बदलने का एकमात्र मार्ग है।”

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गुवाहाटी बैठक के तीन मुख्य प्राथमिकता वाले क्षेत्र

गृह मंत्रालय के तत्वावधान में नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो द्वारा गुवाहाटी में आयोजित की जा रही इस दो-दिवसीय बैठक का एजेंडा बेहद व्यापक और परिणाम-उन्मुख रखा गया है। भारत की अध्यक्षता में हो रही इस बैठक के दौरान मुख्य रूप से तीन सर्वोच्च प्राथमिकता वाले क्षेत्रों पर विस्तृत और बहुपक्षीय चर्चाएं केंद्रित हैं:

1. सिंथेटिक ड्रग्स और प्रिकर्सर केमिकल्स के डायवर्जन का मुकाबला

हाल के वर्षों में पारंपरिक प्राकृतिक नशीले पदार्थों (जैसे अफीम या हेरोइन) की तुलना में सिंथेटिक ड्रग्स (जैसे मेथामफेटामाइन, फेंटानिल और न्यू साइकोएक्टिव सब्सटेंस) का निर्माण और खपत तेजी से बढ़ी है। इन दवाओं को बनाने में इस्तेमाल होने वाले औद्योगिक रसायनों, जिन्हें ‘प्रिकर्सर केमिकल्स’ कहा जाता है, को कानूनी फैक्ट्रियों और दवा उद्योगों से अवैध रूप से डायवर्ट कर ड्रग्स लैब तक पहुंचाया जाता है। इस सत्र में इस डायवर्जन को रोकने के लिए सख्त अंतरराष्ट्रीय ट्रैकिंग सिस्टम और नियामक ढांचा मजबूत करने पर रणनीतिक चर्चा की जा रही है।

2. इंटेलिजेंस शेयरिंग और परिचालन समन्वय को सुदृढ़ करना

तस्करों के अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त करने के लिए सदस्य देशों की राष्ट्रीय खुफिया प्रणालियों को आपस में जोड़ना अनिवार्य है। बैठक में इस बात पर सर्वसम्मति बनाने का प्रयास किया जा रहा है कि कैसे खुफिया एजेंसियों के बीच सूचनाओं के प्रवाह को सुरक्षित, त्वरित और अधिक विश्वसनीय बनाया जाए ताकि संदिग्ध समुद्री जहाजों, हवाई खेपों और कूरियर नेटवर्क्स पर त्वरित कार्रवाई की जा सके।

3. संस्थागत सहयोग और क्षमता निर्माण में वृद्धि

सभी 11 सदस्य देशों की एंटी-नारकोटिक्स संस्थाओं के बीच दीर्घकालिक संस्थागत निरंतरता बनाए रखने के लिए बुनियादी ढांचे और तकनीकी विशेषज्ञता को साझा करने पर ध्यान केंद्रित किया गया है। इसमें डिजिटल फॉरेंसिक, वित्तीय जांच (Financial Investigation) और ड्रग्स के माध्यम से होने वाली मनी लॉन्ड्रिंग को पकड़ने के लिए अत्याधुनिक तकनीकों के प्रशिक्षण पर विशेष बल दिया जा रहा है।

छह विषयगत सत्रों में डिजिटल और डार्कनेट चुनौतियों पर मंथन

गुवाहाटी के इस सम्मेलन में कुल छह विशेष विषयगत सत्र (Thematic Sessions) आयोजित किए जा रहे हैं। इन सत्रों में भाग ले रहे विभिन्न देशों के नीति निर्माता और सुरक्षा विशेषज्ञ मादक पदार्थों की तस्करी के नए युग के डिजिटल आयामों पर गंभीर मंथन कर रहे हैं। विशेष रूप से निम्नलिखित बिंदुओं पर चर्चा की जा रही है:

  • डिजिटल इंटरडिक्शन (Digital Interdiction): मादक पदार्थों की रियल-टाइम डिजिटल ट्रैकिंग और इंटरनेट ट्रैफिकिंग पर रोक लगाने के लिए एआई (AI) और मशीन लर्निंग टूल्स का उपयोग करना।
  • डार्कनेट आधारित तस्करी (Darknet-enabled Trafficking): इंटरनेट के छिपे हुए हिस्सों (डार्क वेब) पर चल रहे अवैध ड्रग बाजारों की पहचान करना और उन्हें होस्ट करने वाले सर्वर्स को डाउन करना।
  • क्रिप्टोकरेंसी वित्तीय जांच: ड्रग्स के बदले किए जाने वाले अनट्रेसेबल क्रिप्टोकरेंसी पेमेंट्स और ब्लॉकचेन वित्तीय लेन-देन को डिकोड करना तथा अपराधियों की अवैध संपत्तियों को फ्रीज करना।
  • मांग में कमी और पुनर्वास: तस्करी रोकने के साथ-साथ समाज में नशीले पदार्थों की मांग को कम करने के लिए जागरूकता अभियान चलाना और प्रभावित लोगों के उपचार तथा पुनर्वास के लिए सामाजिक मॉडल साझा करना।

भारत की ‘ड्रग-फ्री इंडिया’ दृष्टि और विजन डॉक्यूमेंट (2026-2029)

इस अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत अपनी राष्ट्रीय उपलब्धियों और सख्त घरेलू नीतियों को भी प्रमुखता से प्रदर्शित कर रहा है। भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने इस बैठक में देश की ‘नशामुक्त भारत’ (Drug-Free India) की व्यापक दृष्टि को साझा किया। भारत सरकार ने स्पष्ट किया है कि उसकी नीति नशीले पदार्थों के प्रति ‘जीरो टॉलरेंस’ (Zero Tolerance) की है, जिसे प्राप्त करने के लिए कानून प्रवर्तन को अत्यधिक सख्त बनाने के साथ-साथ जनभागीदारी, सामुदायिक चेतना और सामाजिक सुधार कार्यक्रमों को समानांतर रूप से क्रियान्वित किया जा रहा है।

हाल ही में भारत सरकार द्वारा अनावरण किए गए ‘नारकोटिक्स कंट्रोल विजन डॉक्यूमेंट (2026-2029)’ की मुख्य रणनीतियों को भी इस बैठक में रेखांकित किया गया है। यह विजन डॉक्यूमेंट एक व्यापक ‘होल-ऑफ-गवर्नमेंट’ (Whole-of-Government) और नेटवर्क-केंद्रित दृष्टिकोण पर आधारित है, जो विभिन्न केंद्रीय मंत्रालयों, राज्य सरकारों की एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) और अंतरराष्ट्रीय सहयोगियों को एक ही कमान और नियंत्रण प्रणाली के तहत लाकर एक मजबूत अभेद्य सुरक्षा चक्र का निर्माण करता है।

विस्तारित BRICS का बढ़ता भू-राजनीतिक और सुरक्षा प्रभाव

मूल रूप से ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका के साथ शुरू हुआ BRICS संगठन हाल के वर्षों में एक अत्यंत प्रभावशाली वैश्विक ब्लॉक के रूप में उभरा है। वर्ष 2024 में मिस्र, इथियोपिया, ईरान और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के पूर्ण सदस्य बनने और वर्ष 2025 में इंडोनेशिया के इसमें शामिल होने के बाद इस संगठन का आकार और वैश्विक प्रभाव काफी बढ़ गया है।

वर्तमान में यह 11 प्रमुख उभरती अर्थव्यवस्थाओं का एक ऐसा सुदृढ़ समूह है जो दुनिया की एक बहुत बड़ी आबादी, वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के एक बड़े हिस्से और महत्वपूर्ण भू-रणनीतिक व्यापारिक मार्गों का प्रतिनिधित्व करता है। ऐसे में गुवाहाटी में हो रही एंटी-ड्रग प्रमुखों की यह बैठक न केवल वैश्विक सुरक्षा के लिहाज से मील का पत्थर साबित होगी, बल्कि यह इस बात का भी प्रमाण है कि यह समूह अब आर्थिक सहयोग से आगे बढ़कर वैश्विक सुरक्षा, साइबर अपराध और अंतरराष्ट्रीय संगठित अपराधों के खिलाफ एक निर्णायक और एकजुट मोर्चा तैयार कर रहा है।

दो दिवसीय गहन विचार-विमर्श और तकनीकी सत्रों की समाप्ति के बाद, यह बैठक एक सर्वसम्मत ‘संयुक्त घोषणा पत्र’ (Joint Declaration) को अपनाने के साथ समाप्त होगी, जो आने वाले वर्षों में अंतरराष्ट्रीय ड्रग सिंडिकेट्स के खिलाफ BRICS देशों की साझा कार्रवाई का रोडमैप तय करेगा।