ठाणे में डिजिटल डकैती: ऑनलाइन गेमिंग और ‘वर्क फ्रॉम होम’ निवेश के जाल में फंसा 26 वर्षीय युवक, गँवाए 1.36 करोड़ रुपये; साइबर सेल ने शुरू की जांच
ठाणे: महाराष्ट्र के ठाणे शहर से ऑनलाइन धोखाधड़ी का एक बेहद चौंकाने वाला और बड़ा मामला सामने आया है। यहाँ एक 26 वर्षीय युवक को ऑनलाइन गेम खेलने और निवेश पर भारी रिटर्न (मुनाफा) कमाने का लालच देकर ₹1,36,00,000 (1.36 करोड़ रुपये) की भारी-भरकम राशि की चपत लगा दी गई। पुलिस ने रविवार (5 जुलाई) को इस घटना की जानकारी देते हुए बताया कि पीड़ित युवक एक सुनियोजित ऑनलाइन गेमिंग और निवेश रैकेट का शिकार हुआ है।
ठाणे साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन ने पीड़ित की शिकायत के आधार पर मामले की गंभीरता को देखते हुए 7 अलग-अलग संस्थाओं (Entities) के खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज कर ली है। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, इन आरोपियों में तीन संदिग्ध गेमिंग/निवेश वेबसाइटें और विभिन्न बैंक खातों के धारक शामिल हैं, जिनका इस्तेमाल ठगी की रकम को ट्रांसफर करने के लिए किया गया था।
सोशल मीडिया से हुई शुरुआत: कैसे बिछाया गया ठगी का मायाजाल?
साइबर सेल के एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि अज्ञात आरोपियों ने सबसे पहले डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म (जैसे टेलीग्राम, व्हाट्सएप या इंस्टाग्राम) के जरिए पीड़ित युवक से संपर्क साधा था। शुरुआती बातचीत में युवक को घर बैठे आसान काम करने, ऑनलाइन टास्क पूरे करने और कुछ विशेष प्रकार के ऑनलाइन गेम खेलकर मोटी कमाई करने का ऑफर दिया गया था।
आरोपियों ने पीड़ित को भरोसा दिलाने के लिए कुछ शुरुआती “गेमिंग टास्क” दिए। इन टास्क को पूरा करने के बाद पीड़ित के डिजिटल वॉलेट या स्क्रीन पर भारी मुनाफा दिखाई देने लगा। इस फर्जी मुनाफे को देखकर पीड़ित युवक के मन में लालच आ गया और वह धोखेबाजों की रणनीतियों को भांप नहीं सका।
फर्जी वेबसाइट्स और वर्चुअल वॉलेट का खेल
पुलिस जांच में सामने आया है कि इस सिंडिकेट ने पीड़ित को झांसा देने के लिए बकायदा तीन ऐसी वेबसाइटों का इस्तेमाल किया, जो पूरी तरह से फर्जी थीं लेकिन दिखने में वैध निवेश पोर्टल्स की तरह लगती थीं। इन वेबसाइट्स पर पीड़ित का एक ‘पर्सनल अकाउंट’ बनाया गया था, जहाँ उसका निवेश और उस पर मिलने वाला ‘काल्पनिक मुनाफा’ डॉलर या रुपयों में प्रदर्शित होता था। वास्तव में, वह पैसा कभी किसी निवेश में नहीं जा रहा था, बल्कि सीधे धोखेबाजों के बैंक खातों में ट्रांसफर हो रहा था।
स्कैम की क्रोनोलॉजी: किश्तों में ऐंठे 1.36 करोड़ रुपये
साइबर अपराधियों ने पीड़ित को एक बार में बड़ी रकम लगाने को नहीं कहा। उन्होंने एक सोची-समझी स्क्रिप्ट के तहत काम किया:
- शुरुआती भरोसा (अक्टूबर 2024): पीड़ित से कुछ हजार रुपयों का निवेश कराया गया और गेम खेलने के बदले उसे छोटा-मोटा रिफंड या प्रॉफिट वापस उसके बैंक खाते में भेजा गया, ताकि उसका विश्वास जीता जा सके।
- प्रीमियम मेंबरशिप और बड़ा टास्क: एक बार भरोसा कायम होने के बाद, धोखेबाजों ने कहा कि अगर वह बड़े लेवल के गेम खेलता है या ‘वीआईपी’ निवेश प्लान चुनता है, तो उसका रिटर्न 200% तक बढ़ जाएगा।
- पेनल्टी और टैक्स का डर: जब पीड़ित ने अपनी जमा पूंजी लगाने के बाद पैसे निकालने (Withdraw) की कोशिश की, तो फर्जी वेबसाइट ने एरर दिखाना शुरू कर दिया। ठगों ने कहा कि रकम निकालने के लिए उसे ‘विथड्रॉल टैक्स’, ‘गवर्नमेंट प्रोसेसिंग फीस’ और ‘लॉन्ड्री क्लीयरेंस’ के नाम पर और पैसे जमा करने होंगे, नहीं तो उसकी पुरानी पूरी रकम जब्त हो जाएगी।
- अंतिम प्रहार (जून 2026): अपनी फंसी हुई रकम को वापस पाने के चक्कर में पीड़ित कर्ज और अपनी जमा-पूंजी मिलाकर कुल 1.36 करोड़ रुपये ट्रांसफर कर बैठा। 30 जून तक जब आरोपियों ने उसकी सारी पहुंच ब्लॉक कर दी, तब जाकर उसे एहसास हुआ कि वह पूरी तरह से लुट चुका है।
साइबर पुलिस की कार्रवाई और कानूनी धाराएं
30 जून को संपर्क पूरी तरह टूट जाने और निवेश पोर्टल बंद हो जाने के बाद, निराश पीड़ित ने ठाणे के साइबर पुलिस स्टेशन में अपनी शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने मामले की प्राथमिक जांच के बाद भारतीय न्याय संहिता (BNS) और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (IT Act) की प्रासंगिक धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है।
पुलिस अधिकारी ने कहा, “हमने उन तीन वेबसाइटों के डोमेन विवरण और जिन बैंक खातों में पैसे ट्रांसफर किए गए थे, उनके लेन-देन (Bank Statements) को ट्रैक करना शुरू कर दिया है। ये खाते देश के अलग-अलग राज्यों में स्थित हो सकते हैं, जो अक्सर ‘खच्चर खाते’ (Mule Accounts) होते हैं, जिन्हें गरीब या भोले-भाले लोगों से किराए पर लिया जाता है।”
एक्सपर्ट एनालिसिस: क्यों बढ़ रहे हैं ऑनलाइन गेमिंग और टास्क-बेस्ड स्कैम?
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, देश में पिछले कुछ समय से ‘गेमिंग और पार्ट-टाइम जॉब’ के नाम पर होने वाले घोटालों में भारी उछाल आया है। इसके पीछे मुख्य कारण लोगों में जल्दी अमीर बनने की चाहत और डिजिटल साक्षरता की कमी है। अपराधी अक्सर मनोवैज्ञानिक दबाव (Psychological Manipulation) का इस्तेमाल करते हैं। वे पीड़ित को ‘फोमो’ (FOMO – Fear of Missing Out) यानी मौका छूट जाने का डर दिखाते हैं।
🚨 साइबर सुरक्षा विंग की महत्वपूर्ण एडवाइजरी:
- अज्ञात लिंक्स से बचें: व्हाट्सएप या टेलीग्राम पर आने वाले किसी भी “घर बैठे गेम खेलकर पैसे कमाएं” या “लाइक और शेयर करके कमाई करें” जैसे दावों वाले लिंक पर क्लिक न करें।
- कोई भी वैध संस्था पहले पैसे नहीं मांगती: यदि कोई वेबसाइट आपका कमाया हुआ पैसा निकालने के लिए आपसे ‘टैक्स’ या ‘सिक्योरिटी मनी’ एडवांस में मांगती है, तो वह 100% फ्रॉड है।
- रजिस्ट्रेशन की जांच करें: किसी भी वित्तीय निवेश योजना में पैसा लगाने से पहले यह सुनिश्चित करें कि वह संस्था भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) या भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) द्वारा मान्यता प्राप्त है या नहीं।
यदि आप भी हो जाएं शिकार, तो क्या करें?
यदि अनजाने में आप किसी ऐसे ही ऑनलाइन फ्रॉड का शिकार हो जाते हैं, तो घबराने के बजाय शुरुआती सुनहरे घंटे (Golden Hours) में कार्रवाई करें। जितनी जल्दी आप शिकायत करेंगे, बैंक द्वारा आपके पैसे को ब्लॉक करने की संभावना उतनी ही अधिक होगी।
- तुरंत केंद्रीय गृह मंत्रालय के राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें।
- अपनी शिकायत दर्ज कराने के लिए आधिकारिक पोर्टल www.cybercrime.gov.in पर जाएं।
- अपने बैंक को तुरंत सूचित करें ताकि फ्रॉड वाले खातों को फ्रीज किया जा सके।
ठाणे पुलिस फिलहाल इस रैकेट के मास्टरमाइंड तक पहुँचने के लिए तकनीकी विश्लेषण (IP Address ट्रैकिंग और कॉल डेटा रिकॉर्ड्स) का सहारा ले रही है। पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी अज्ञात ऑनलाइन लुभावने प्रस्तावों के बहकावे में न आएं और सतर्क रहें।















