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सतना में बड़ा हादसा: कुएं में गिरे सांड को बचाने उतरे एक ही परिवार के 3 लोगों की दम घुटने से मौत, 1 गंभीर






सतना में बड़ा हादसा: कुएं में गिरे सांड को बचाने उतरे एक ही परिवार के तीन लोगों की दम घुटने से मौत, गांव में मातम


मध्य प्रदेश समाचार (MP News)

सतना में दिल दहला देने वाला हादसा: कुएं में गिरे सांड को बचाने उतरे एक ही परिवार के तीन लोगों की दम घुटने से दर्दनाक मौत, एक की हालत गंभीर

स्थान: सतना (मध्य प्रदेश)
दिनांक: 4 जुलाई, 2026
ब्यूरो रिपोर्ट: न्यूज़ अपडेट नेटवर्क
सतना (मध्य प्रदेश): मध्य प्रदेश के सतना जिले से एक बेहद दर्दनाक और झकझोर देने वाली खबर सामने आई है। यहाँ अमरपाटन थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले एक गाँव में एक बेजुबान जानवर (सांड) की जान बचाने के प्रयास में एक ही परिवार के तीन सदस्यों की कुएं के भीतर दम घुटने से मौत हो गई। इस घटना में एक अन्य ग्रामीण गंभीर रूप से झुलस गया (जहरीली गैस की चपेट में आ गया), जिसे नाजुक हालत में जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है। घटना के बाद से पूरे इलाके में मातम पसरा हुआ है और पीड़ित परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है।

पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, यह पूरी घटना शुक्रवार रात करीब 8:30 बजे अमरपाटन थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्राम खरमसेडा के अहिरन टोला में घटित हुई। गाँव के एक पुराने और लगभग 40 फीट गहरे कुएं में एक सांड अचानक गिर गया था। सांड के कुएं में गिरने की आवाज सुनकर ग्रामीण वहाँ इकट्ठा हो गए। बेजुबान को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए परिवार के सदस्यों ने खुद ही रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू करने का फैसला किया, लेकिन वे इस बात से पूरी तरह अनजान थे कि कुएं के भीतर मौत उनका इंतजार कर रही है।

एक के बाद एक कुएं में उतरे चार लोग, जहरीली गैस ने बनाया शिकार

थाना प्रभारी विजय सिंह परस्ते ने घटना की विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि सांड को कुएं से बाहर निकालने के लिए सबसे पहले परिवार का एक सदस्य रस्सी के सहारे नीचे उतरा। कुएं की गहराई लगभग 40 फीट थी और वह काफी समय से बंद या कम इस्तेमाल में था, जिसके कारण उसके निचले हिस्से में भारी मात्रा में जहरीली गैसें (टॉक्सिक फ्यूम्स) जमा हो चुकी थीं और ऑक्सीजन का स्तर बेहद कम था।

जैसे ही पहला व्यक्ति कुएं के नीचे पहुंचा, जहरीली गैस के प्रभाव और ऑक्सीजन की कमी के कारण वह बेहोश होने लगा और उसने मदद के लिए आवाज लगाई। उसे तड़पता देख और कोई प्रतिक्रिया न मिलता देख, उसे बचाने के लिए परिवार का दूसरा सदस्य भी कुएं में उतर गया। कुछ ही पलों में वह भी उसी जहरीली गैस का शिकार हो गया। इसके बाद क्रमशः तीसरा और चौथा व्यक्ति भी अपनों को बचाने की व्याकुलता में बिना किसी सुरक्षा उपकरण के कुएं के भीतर चले गए।

कुएं के अंदर गए चारों लोग दम घुटने के कारण अंदर ही फंस गए और चीख-पुकार मच गई। कुएं के बाहर खड़े अन्य ग्रामीणों को जब स्थिति की गंभीरता का एहसास हुआ, तो उन्होंने तुरंत शोर मचाना शुरू किया और मामले की सूचना स्थानीय अमरपाटन पुलिस स्टेशन को दी।

पुलिस और प्रशासन का रेस्क्यू ऑपरेशन, तीन शव बरामद

घटना की सूचना मिलते ही अमरपाटन थाना प्रभारी विजय सिंह परस्ते पुलिस बल और रेस्क्यू टीम के साथ तुरंत मौके पर पहुंचे। कुएं के भीतर गहरी और जहरीली गैस होने के कारण स्थानीय लोगों के लिए सीधे अंदर जाना मुमकिन नहीं था। इसके बाद प्रशासन ने एहतियात बरतते हुए और सुरक्षात्मक उपायों के साथ रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया।

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कड़ी मशक्कत के बाद कुएं में फंसे चारों लोगों को बाहर निकाला गया। हालांकि, तब तक बहुत देर हो चुकी थी। जहरीली गैस के अत्यधिक सेवन और दम घुटने के कारण तीन लोगों ने कुएं के भीतर ही दम तोड़ दिया था। डॉक्टरों की टीम ने मौके पर ही तीनों को मृत घोषित कर दिया। वहीं, चौथे व्यक्ति की सांसें चल रही थीं, जिसे बिना वक्त गंवाए तुरंत नजदीकी एम्बुलेंस की मदद से जिला अस्पताल रेफर किया गया, जहाँ उसकी हालत अभी भी अत्यंत नाजुक और चिंताजनक बनी हुई है।

हादसे का मुख्य विवरण (Key Highlights):

  • घटनास्थल: अहिरन टोला, ग्राम खरमसेडा, थाना अमरपाटन, जिला सतना (म.प्र.)
  • समय: शुक्रवार रात्रि लगभग 8:30 बजे।
  • कुएं की गहराई: लगभग 40 फीट।
  • हताहत: एक ही परिवार के 3 सदस्यों की मौत, 1 गंभीर रूप से घायल (अस्पताल में भर्ती)।
  • कारण: कुएं के भीतर जमा जहरीली गैस (Toxic Gases) और ऑक्सीजन की भारी कमी।

गाँव में पसरा सन्नाटा, परिवार का रो-रोकर बुरा हाल

शनिवार सुबह जब तीनों मृतकों के शवों का पोस्टमार्टम कराने के बाद उन्हें परिजनों को सौंपा गया, तो पूरे खरमसेडा गाँव में कोहराम मच गया। एक ही घर से एक साथ तीन अर्थियां उठने की इस हृदयविदारक घटना ने हर किसी की आंखें नम कर दी हैं। गाँव के चूल्हे नहीं जले हैं और हर कोई इस अनहोनी से स्तब्ध है। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि वे लोग केवल एक बेजुबान की जान बचाना चाहते थे, उन्हें क्या पता था कि परोपकार का यह कार्य उनके पूरे परिवार को तबाह कर देगा। पुलिस ने इस मामले में मर्ग कायम कर आगे की कानूनी जांच शुरू कर दी है।

विशेषज्ञों की राय: गहरे कुओं में क्यों बनती है जहरीली गैस?

इस दुखद हादसे ने एक बार फिर ग्रामीण इलाकों में पुराने और गहरे कुओं या गड्ढों में बिना सुरक्षा के उतरने के खतरों को उजागर कर दिया है। भूगर्भ वैज्ञानिकों और सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, जो कुएं लंबे समय से बंद रहते हैं या जिनमें कचरा, पत्तियां और जैविक पदार्थ गिरकर सड़ते रहते हैं, उनके निचले हिस्से में रासायनिक प्रतिक्रिया के कारण खतरनाक गैसों का निर्माण होता है।

इन कुओं में मुख्य रूप से कार्बन कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂), मीथेन (CH₄), अमोनिया और हाइड्रोजन सल्फाइड (H₂S) जैसी भारी और जहरीली गैसें जमा हो जाती हैं। चूंकि ये गैसें हवा से भारी होती हैं, इसलिए ये कुएं के निचले तल पर बैठ जाती हैं और वहाँ मौजूद ऑक्सीजन को पूरी तरह से विस्थापित (खत्म) कर देती हैं। ऐसे बंद स्थानों में जब कोई व्यक्ति अचानक प्रवेश करता है, तो उसे एक भी सांस ऑक्सीजन की नहीं मिलती और मात्र कुछ ही सेकंड के भीतर वह अचेत (बेहोश) हो जाता है, जिसके बाद समय पर इलाज न मिलने पर मौत निश्चित हो जाती है।

भविष्य में ऐसे हादसों से बचने के लिए जरूरी गाइडलाइंस

प्रशासन और नागरिक सुरक्षा मंचों द्वारा समय-समय पर ऐसे हादसों से बचने के लिए जागरूकता अभियान चलाए जाते हैं। यदि किसी भी कारणवश कुएं या गहरे टैंक में उतरना अनिवार्य हो, तो निम्नलिखित बातों का विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए:

1. ‘मोमबत्ती या लालटेन’ टेस्ट जरूर करें

किसी भी गहरे या पुराने कुएं में उतरने से पहले एक जलती हुई मोमबत्ती, दीया या लालटेन को रस्सी के सहारे कुएं के तल तक नीचे भेजें। यदि मोमबत्ती नीचे जाते ही बुझ जाती है, तो इसका स्पष्ट अर्थ है कि वहाँ ऑक्सीजन की कमी है और जहरीली गैस मौजूद है। ऐसी स्थिति में कुएं के भीतर कदम रखना साक्षात मौत को आमंत्रण देने जैसा है।

2. सीधे उतरने के बजाय गैस को बाहर निकालें

यदि कुएं में जहरीली गैस होने का संदेह हो, तो उसमें तुरंत उतरने के बजाय बड़े ब्लोअर, पंखे या पानी की बौछार (वाटर स्प्रे) के जरिए गैस को हटाने का प्रयास किया जाना चाहिए। कुएं के भीतर बार-बार खाली बाल्टी या कोई भारी कपड़ा ऊपर-नीचे करने से भी हवा का संचलन (Air Circulation) सुधरता है और जहरीली गैसें कुछ हद तक कम होती हैं।

3. सुरक्षा रस्सी और सुरक्षा उपकरणों का प्रयोग

बिना सुरक्षा कवच या जीवन रक्षक रस्सी (Life-line Rope) के कभी भी कुएं में न उतरें। कुएं में उतरने वाले व्यक्ति की कमर में एक मजबूत रस्सी बंधी होनी चाहिए और ऊपर कम से कम 4-5 मजबूत लोग मौजूद होने चाहिए, ताकि अंदर कोई भी असहजता महसूस होते ही उसे तुरंत ऊपर खींच लिया जाए।

4. भावुकता में न लें फैसला, विशेषज्ञों को बुलाएं

सतना के इस हादसे से सबसे बड़ी सीख यह मिलती है कि जब कोई व्यक्ति कुएं में गिरकर अचेत हो जाए, तो भावुकता या जल्दबाजी में उसे बचाने के लिए दूसरे व्यक्ति को तुरंत कुएं में नहीं कूदना चाहिए। ऐसे समय में तुरंत स्थानीय पुलिस, फायर ब्रिगेड या एसडीआरएफ (SDRF) की टीम को सूचित करना चाहिए जो आधुनिक गैस मास्क और ऑक्सीजन सिलेंडर के साथ रेस्क्यू करने में सक्षम होते हैं।


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