पालघर साइबर फ्रॉड: शेयर मार्केट के नाम पर बैंक मैनेजर से 46.41 लाख की ठगी, 9 पर केस दर्ज






पालघर साइबर फ्रॉड: शेयर मार्केट में मुनाफे का लालच देकर को-ऑपरेटिव बैंक के सीनियर अधिकारी से 46.41 लाख रुपये की बड़ी ठगी

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पालघर | अपडेट: 4 जुलाई

डिजिटल डकैती: शेयर बाजार में बंपर मुनाफे का झांसा देकर बैंक के डिप्टी मैनेजर से ₹46.41 लाख की ऑनलाइन ठगी, 9 जालसाजों पर FIR दर्ज

महाराष्ट्र के पालघर जिले से साइबर अपराध का एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां एक नामी को-ऑपरेटिव बैंक के वरिष्ठ अधिकारी (डिप्टी मैनेजर) को शातिर साइबर ठगों ने अपने जाल में फंसाकर 46.41 लाख रुपये की मोटी चपत लगा दी। वित्तीय और बैंकिंग मामलों के जानकार होने के बावजूद, पीड़ित अधिकारी इन अपराधियों की सोची-समझी डिजिटल साजिश और सोशल इंजीनियरिंग का शिकार हो गए।

यह पूरी वारदात आधुनिक दौर में बढ़ते डिजिटल निवेश घोटालों की भयावहता को दर्शाती है। पुलिस अधिकारियों द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, पीड़ित की लिखित शिकायत के आधार पर मीरा-भायंदर वसाई-विरार (MBVV) पुलिस ने इस संगठित धोखाधड़ी को अंजाम देने वाले गिरोह के खिलाफ एक विस्तृत आपराधिक मामला दर्ज किया है। पुलिस ने इस मामले में कुल नौ लोगों को नामजद किया है, जिनमें शेयर ट्रेडिंग के नाम पर चलाए जा रहे फर्जी वॉट्सऐप ग्रुप के मुख्य एडमिन भी शामिल हैं।

दर्ज की गई प्राथमिकी के मुताबिक, मुख्य आरोपियों की पहचान अभिनav राजपूत, विक्रांत ठाकुर, नीलम अग्रवाल और काव्या नामक एक महिला के रूप में हुई है, जो इस पूरे नेटवर्क को संचालित कर रहे थे। पुलिस इन सभी आरोपियों के डिजिटल फुटप्रिंट्स और बैंक खातों की कड़ियों को खंगालने में जुट गई है ताकि इस अंतरराज्यीय साइबर गिरोह का पर्दाफाश किया जा सके।

साजिश का ताना-बाना: कैसे शुरू हुआ ठगी का यह खेल

शिकायतकर्ता अधिकारी मुंबई स्थित एक प्रतिष्ठित सहकारी बैंक की शाखा में डिप्टी मैनेजर के पद पर कार्यरत हैं और वर्तमान में पालघर जिले के वसाई इलाके के निवासी हैं। चूंकि पीड़ित खुद बैंकिंग और वित्तीय प्रणाली से जुड़े हुए थे, इसलिए जालसाजों ने उन्हें फंसाने के लिए बेहद परिष्कृत और पेशेवर तरीका अपनाया ताकि किसी भी प्रकार का संदेह पैदा न हो।

धोखाधड़ी के इस सिलसिले की शुरुआत अप्रैल 2024 में हुई थी, जो जून 2024 के अंत तक लगातार चलती रही। इस अवधि के दौरान, आरोपियों ने पीड़ित का मोबाइल नंबर उनकी अनुमति के बिना स्टॉक मार्केट इन्वेस्टमेंट और हाई-रिटर्न वेल्थ मैनेजमेंट से जुड़े कई अनधिकृत वॉट्सऐप ग्रुपों में जोड़ दिया। इन ग्रुप्स के भीतर का माहौल पूरी तरह से पेशेवर और किसी अंतरराष्ट्रीय ब्रोकरेज फर्म जैसा दिखाया गया था।

जांच में सामने आया अपराधियों का ‘मोडस ऑपेरंडी’ (काम करने का तरीका):

  • प्रतिष्ठित कंपनियों के नाम का दुरुपयोग: गिरोह के सदस्य खुद को देश और दुनिया की जानी-मानी इन्वेस्टमेंट कंपनियों के मुख्य कार्यकारी, पोर्टफोलियो मैनेजर और मान्यता प्राप्त मार्केट एक्सपर्ट के रूप में पेश करते थे।
  • फर्जी स्क्रीनशॉट और ‘पेड बॉट्स’ का इस्तेमाल: इन वॉट्सऐप ग्रुप्स में सैकड़ों अन्य नंबर भी शामिल थे, जो असल में इसी गिरोह के सदस्य या कंप्यूटर जनित बॉट्स थे। ये नंबर लगातार ग्रुप में लाखों रुपये के मुनाफे के नकली स्क्रीनशॉट और ग्रुप एडमिन की तारीफों के पुल बांधने वाले झूठे संदेश भेजते थे, जिससे किसी भी व्यक्ति को उनके असली होने का भरोसा हो जाए।
  • थर्ड-पार्टी अनवेरिफाइड लिंक्स: पीड़ित को मुख्यधारा के सुरक्षित ऐप स्टोर (जैसे गूगल प्ले स्टोर) के बजाय सीधे चैट बॉक्स में कस्टमाइज्ड हाइपरलिंक भेजे गए और वहां से विशेष मोबाइल एप्लिकेशन डाउनलोड करने के लिए मजबूर किया गया।

फर्जी एप्लीकेशंस ‘DRWAI’ और ‘IIFL’ का मायाजाल

पीड़ित का भरोसा पूरी तरह से जीतने के बाद, ग्रुप एडमिन अभिनव राजपूत और उनके सहयोगियों ने बैंक मैनेजर को विशेष संस्थागत ट्रेडिंग का हिस्सा बनने की सलाह दी। इसके लिए उन्हें डिजिटल माध्यम से कस्टमाइज्ड लिंक्स भेजे गए, जिसके जरिए पीड़ित ने अपने स्मार्टफोन में ‘DRWAI’ और असली कंपनी से मिलती-जुलती एक फर्जी ‘IIFL’ नामक मोबाइल एप्लीकेशन इंस्टॉल कर ली।

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इन ऐप्स का इंटरफेस इतना सटीक और आधुनिक था कि उस पर लाइव मार्केट के उतार-चढ़ाव और शेयर की कीमतें बिल्कुल वास्तविक दिखाई देती थीं। हालांकि, इन ऐप्स के पीछे का सच यह था कि इनका पूरा नियंत्रण और डेटा डेटाबेस अपराधियों के सर्वर से संचालित हो रहा था। यह एक प्रकार का सिमुलेटर था, जहां दिखाई देने वाला हर आंकड़ा पूरी तरह नकली था।

जब डिप्टी मैनेजर ने गिरोह द्वारा दिए गए शुरुआती बैंक खातों में निवेश की राशि ट्रांसफर की, तो ऐप के डैशबोर्ड पर उनका बैलेंस तुरंत अपडेट हो गया और कुछ ही दिनों में उसमें भारी मुनाफा दिखाई देने लगा। इस आभासी मुनाफे को देखकर पीड़ित का भरोसा और मजबूत हो गया। इसके बाद, उन्होंने अधिक रिटर्न कमाने के चक्कर में अपनी जीवनभर की जमा-पूंजी और बचत खातों से किश्तों में कुल 46,41,000 रुपये अपराधियों द्वारा बताए गए विभिन्न अज्ञात बैंक खातों में ट्रांसफर कर दिए।

मुनाफा निकालने पर खुला राज: कानूनी कार्रवाई शुरू

इस बड़ी धोखाधड़ी का खुलासा तब हुआ जब जून के आखिरी हफ्ते में पीड़ित बैंक अधिकारी ने अपनी बेटी की शादी या अन्य पारिवारिक आवश्यकताओं के लिए ऐप में दिख रहे मुनाफे की रकम को अपने वास्तविक बैंक खाते में निकालने (विड्रॉ करने) का प्रयास किया। जैसे ही उन्होंने विड्रॉल रिक्वेस्ट डाली, ऐप ने तकनीकी खराबी दिखाना शुरू कर दिया और ट्रांजैक्शन ब्लॉक हो गया।

जब उन्होंने इस संबंध में वॉट्सऐप ग्रुप के एडमिन काव्या और विक्रांत ठाकुर से संपर्क किया, तो उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी रकम निकालने के लिए भारत सरकार के नियमों के मुताबिक एडवांस टैक्स, सिक्योरिटी क्लियरेंस फीस और इंटरनेशनल ट्रांसफर ड्यूटी जमा करनी होगी। इसके लिए आरोपियों ने उनसे 10 लाख रुपये और ट्रांसफर करने की मांग की।

चूंकि पीड़ित खुद बैंक के डिप्टी मैनेजर थे, इसलिए एडवांस फीस मांगने की इस प्रक्रिया से उन्हें तुरंत समझ आ गया कि वे एक बेहद सुनियोजित साइबर अपराध का शिकार हो चुके हैं। उन्होंने तुरंत अपने स्तर पर खातों की जांच की और पाया कि उनके द्वारा ट्रांसफर किए गए 46.41 लाख रुपये देश के विभिन्न राज्यों में खुले फर्जी और ‘शेल’ (फर्जी कंपनियों के) खातों में डाइवर्ट किए जा चुके हैं।

केस का मुख्य विवरण महत्वपूर्ण तथ्य और आंकड़े
कुल ठगी की राशि ₹46.41 लाख (INR 46,41,000)
संबंधित पुलिस थाना/क्षेत्र मीरा-भायंदर वसाई-विरार (MBVV) पुलिस, पालघर जिला
नामित मुख्य आरोपी अभिनव राजपूत, विक्रांत ठाकुर, नीलम अग्रवाल, काव्या और 5 अन्य सदस्य
इस्तेमाल किए गए फर्जी ऐप्स ‘DRWAI’ और क्लोन किया गया ‘IIFL’ मोबाइल एप्लीकेशन
अपराध की समयावधि अप्रैल 2024 से जून 2024 के बीच

ठगी का अहसास होने के तुरंत बाद, पीड़ित ने बिना समय गंवाए एमबीवीवी पुलिस की साइबर क्राइम सेल में एक विस्तृत लिखित शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (IT Act) के प्रावधानों के तहत धोखाधड़ी और जालसाजी का मामला दर्ज कर लिया है। साइबर सेल की तकनीकी टीम अब उन सभी बैंक खातों को फ्रीज करने की कोशिश कर रही है जहां पैसे भेजे गए थे, साथ ही आरोपियों के मोबाइल नंबरों के आईपी एड्रेस और लोकेशन को ट्रैक किया जा रहा है।

साइबर पुलिस की विशेष एडवाइजरी: ऐसे सुरक्षित रखें अपनी गाढ़ी कमाई

देशभर में तेजी से बढ़ रहे ‘फेक ट्रेडिंग ऐप’ घोटालों को देखते हुए साइबर विशेषज्ञों और पुलिस विभाग ने नागरिकों के लिए विशेष सुरक्षा निर्देश जारी किए हैं:

  • सेबी (SEBI) रजिस्ट्रेशन की जांच करें: किसी भी संस्था या व्यक्ति के कहने पर निवेश करने से पहले यह अवश्य जांच लें कि क्या वह ब्रोकर भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) के पास पंजीकृत है या नहीं। कोई भी वैध ब्रोकर वॉट्सऐप या टेलीग्राम पर गुप्त रूप से ग्रुप चलाकर व्यक्तिगत ट्रेडिंग नहीं करवाता।
  • अपरिचित लिंक्स से ऐप्स डाउनलोड न करें: कभी भी किसी अनजान व्यक्ति द्वारा व्हाट्सएप या एसएमएस पर भेजे गए लिंक (APK फाइल) के जरिए अपने फोन में कोई भी फाइनेंशियल या बैंकिंग ऐप इंस्टॉल न करें। हमेशा केवल आधिकारिक प्लेटफॉर्म जैसे गूगल प्ले स्टोर या एप्पल ऐप स्टोर का ही उपयोग करें।
  • ‘गोल्डन आवर’ में तुरंत शिकायत करें: यदि आप किसी भी प्रकार की ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी का शिकार होते हैं, तो तुरंत राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें या www.cybercrime.gov.in पर अपनी शिकायत दर्ज करें। शुरुआती 1-2 घंटों के भीतर शिकायत करने पर बैंक खातों में पैसे ब्लॉक होने की संभावना काफी अधिक होती है।