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वसई महावितरण कार्यालय में आत्मदाह का प्रयास: बढ़े बिजली बिल और स्मार्ट मीटर पर फूटा उपभोक्ता का गुस्सा






वसई महावितरण कार्यालय में आत्मदाह का प्रयास: बढ़े हुए बिजली बिल और स्मार्ट मीटर के खिलाफ फूटा उपभोक्ता का गुस्सा


वसई में बिजली बिल और स्मार्ट मीटर का खौफनाक विरोध: उपभोक्ता ने महावितरण कार्यालय के अंदर खुद पर छिड़का पेट्रोल, मची अफरा-तफरी

ब्यूरो रिपोर्ट: प्रदेश खबर नेटवर्क
स्थान: पालघर/वसई
दिनांक: 4 जुलाई, 2026

पालघर/वसई: महाराष्ट्र के पालघर जिले से एक बेहद चौंकाने वाली और डरा देने वाली घटना सामने आई है। वसई वेस्ट स्थित महाराष्ट्र स्टेट इलेक्ट्रिसिटी डिस्ट्रिब्यूशन कंपनी लिमिटेड (MSEDCL – महावितरण) के उप-विभागीय कार्यालय में एक 45 वर्षीय बिजली उपभोक्ता ने बढ़े हुए बिजली बिल और जबरन लगाए जा रहे स्मार्ट मीटर के खिलाफ विरोध जताते हुए खुद पर पेट्रोल छिड़ककर आत्मदाह का प्रयास किया। इस अप्रत्याशित कदम से कार्यालय परिसर के भीतर मौजूद अधिकारी, कर्मचारी और आम नागरिक हक्के-बक्के रह गए और वहां भारी अफरा-तफरी का माहौल पैदा हो गया।

आधिकारिक सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, यह घटना शुक्रवार, 3 जुलाई को घटित हुई। आत्मदाह का प्रयास करने वाले व्यक्ति की पहचान अजय लक्ष्मी त्रिपाठी के रूप में हुई है, जो वसई (पश्चिम) के माणिकपुर इलाके का निवासी है। बताया जा रहा है कि त्रिपाठी पिछले काफी समय से अपने घरेलू बिजली कनेक्शन के अत्यधिक बिल आने की समस्या से जूझ रहे थे और इस संबंध में अधिकारियों के चक्कर काट रहे थे।

घटनाक्रम की मुख्य बातें:

वसई वेस्ट के बिलिंग और राजस्व उप-विभाग के सहायक अभियंता की आधिकारिक रिपोर्ट के अनुसार, उपभोक्ता अजय लक्ष्मी त्रिपाठी का पुराना पारंपरिक बिजली मीटर मई महीने में जल गया था। इसके बाद विभाग द्वारा नियमों के तहत उनके परिसर में एक नया डिजिटल ‘स्मार्ट मीटर’ स्थापित किया गया था। उपभोक्ता का आरोप था कि इस नए मीटर की स्थापना के बाद से ही उनका बिल अप्रत्याशित रूप से बढ़ गया था, जिसे लेकर वे पुराने मीटर को वापस लगाने और बिल को संशोधित करने की मांग कर रहे थे।

कार्यालय में अचानक पहुंचा उपभोक्ता, मच गई चीख-पुकार

प्रत्यक्षदर्शियों और विभागीय अधिकारियों के मुताबिक, अजय लक्ष्मी त्रिपाठी शुक्रवार को दोपहर के समय वसई वेस्ट स्थित महावितरण कार्यालय के बिलिंग और राजस्व उप-मंडल दफ्तर में पहुंचे थे। उनके हाथ में एक बोतल थी, जिसमें पेट्रोल भरा हुआ था। वे सीधे जिम्मेदार अधिकारियों के केबिन की तरफ बढ़े और अपनी लंबित शिकायतों का तत्काल निवारण न होने पर नाराजगी जाहिर करने लगे।

बातचीत के दौरान ही, अचानक अपना आपा खोते हुए त्रिपाठी ने बोतल में रखा पेट्रोल अपने पूरे शरीर पर उड़ेल लिया। इससे पहले कि वहां मौजूद लोग कुछ समझ पाते, उन्होंने खुद को आग लगाने की कोशिश शुरू कर दी। पेट्रोल की गंध फैलते ही दफ्तर के अंदर मौजूद अन्य उपभोक्ताओं और क्लर्कों के बीच चीख-पुकार मच गई। कई लोग डर के मारे दफ्तर से बाहर की तरफ भागे।

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कर्मचारियों और नागरिकों की सजगता से टला बड़ा हादसा

इस बेहद तनावपूर्ण स्थिति में महावितरण कार्यालय के कुछ कर्मचारियों और वहां मौजूद जागरूक नागरिकों ने अदम्य साहस और सूझबूझ का परिचय दिया। जैसे ही उन्होंने त्रिपाठी को खुद पर पेट्रोल डालते देखा, उन्होंने तुरंत दौड़कर उन्हें पीछे से दबोच लिया। कर्मचारियों ने त्वरित कार्रवाई करते हुए उनके हाथ से माचिस और पेट्रोल की बची हुई बोतल को छीन लिया।

यदि कुछ सेकंड की भी देरी होती, तो कार्यालय के भीतर एक भयंकर त्रासदी घटित हो सकती थी, जिससे न सिर्फ उपभोक्ता की जान जाती बल्कि पूरे सरकारी कार्यालय में आग फैलने का गंभीर खतरा पैदा हो जाता। घटना की सूचना तुरंत स्थानीय पुलिस स्टेशन और आपातकालीन सेवाओं को दी गई। मौके पर पहुंची पुलिस टीम ने उपभोक्ता को अपनी कस्टडी में लिया और प्राथमिक सुरक्षात्मक जांच के लिए अस्पताल भिजवाया।

मामले की पृष्ठभूमि: क्या है पूरा तकनीकी विवाद?

इस पूरे मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए वसई वेस्ट के बिलिंग और राजस्व उप-विभाग के सहायक अभियंता ने एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार की है। इस रिपोर्ट के अनुसार, इस विवाद की जड़ें मई 2026 से जुड़ी हुई हैं।

विवाद का बिंदु विभागीय पक्ष / आधिकारिक रिपोर्ट उपभोक्ता का दावा / शिकायत
मूल मीटर की स्थिति मई महीने में पुराना बिजली मीटर तकनीकी खराबी या शॉर्ट सर्किट के कारण जला हुआ पाया गया था। मीटर में कोई बड़ी खराबी नहीं थी, उसे जानबूझकर बदला गया।
स्मार्ट मीटर की स्थापना जले हुए मीटर के स्थान पर शासन के निर्देशानुसार नया अत्याधुनिक स्मार्ट मीटर लगाया गया। बिना पूर्ण सहमति और बिना तकनीकी स्पष्टीकरण के नया मीटर थोपा गया।
बिजली बिल की विसंगति बिलिंग पूरी तरह से नए मीटर की वास्तविक रीडिंग और यूनिट खपत के आधार पर की गई है। स्मार्ट मीटर लगते ही बिल की राशि सामान्य से कई गुना अधिक (इन्फ्लेटेड) हो गई।
मुख्य मांग उपभोक्ता को नियमानुसार ही राहत दी जा सकती है, जिसके लिए जांच प्रक्रिया जारी थी। नए स्मार्ट मीटर को तुरंत हटाया जाए और पुराना पारंपरिक मीटर वापस लगाया जाए।

महावितरण का रुख: ‘कानून और सरकारी नीतियों का विरोध’

घटना के बाद महावितरण के वरिष्ठ अधिकारियों ने अपना पक्ष रखते हुए कहा है कि पूरे महाराष्ट्र में बिजली वितरण प्रणाली को आधुनिक और पारदर्शी बनाने के लिए पुराने मीटरों को चरणबद्ध तरीके से स्मार्ट मीटरों से बदला जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि वसई-विरार क्षेत्र में भी इस नीति को लागू किया जा रहा है।

विभागीय सूत्रों के अनुसार, संबंधित उपभोक्ता की बिजली आपूर्ति कुछ समय पहले तकनीकी कारणों से बाधित हुई थी, लेकिन उनकी शिकायतों और आक्रोश को देखते हुए महावितरण ने संवेदनशीलता दिखाते हुए बिजली आपूर्ति को बहाल कर दिया था। इसके बावजूद, उपभोक्ता ‘स्मार्ट मीटर नहीं चाहिए’ की अपनी मांग पर अड़े रहे। विभाग का आरोप है कि उपभोक्ता ने सरकारी निर्णय और उसकी तकनीकी प्रक्रियाओं को ठंडे दिमाग से समझने के बजाय सीधे दफ्तर में आकर आत्मघाती कदम उठाया, जो कि एक गंभीर कानून-व्यवस्था का मामला है।

माणिकपुर और वसई में उपभोक्ताओं का बढ़ता असंतोष

भले ही महावितरण इस घटना को एकल उपभोक्ता के आक्रोश के रूप में देख रहा हो, लेकिन स्थानीय नागरिक संगठनों और उपभोक्ता मंचों का कहना है कि यह घटना वसई-विरार क्षेत्र में बिजली उपभोक्ताओं के भीतर पनप रहे व्यापक असंतोष का एक हिंसक प्रकटीकरण है। पिछले कुछ महीनों में, विशेष रूप से जब से स्मार्ट मीटर लगाने के लिए ४८ घंटे के अल्टीमेटम वाले संदेश उपभोक्ताओं को भेजे जा रहे हैं, तब से आम जनता में भारी भ्रम और नाराजगी का माहौल है।

स्थानीय नागरिक समूहों का आरोप है कि स्मार्ट मीटरों की गति तेज है और इसके कारण मध्यमवर्गीय परिवारों का मासिक बजट पूरी तरह से बिगड़ रहा है। उपभोक्ताओं का कहना है कि महावितरण को पहले बिजली की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करनी चाहिए और स्मार्ट मीटर लगाने से पहले उपभोक्ताओं को विश्वास में लेकर उनकी शंकाओं का समाधान करना चाहिए।

पुलिसिया कार्रवाई और कानूनी प्रक्रिया

पालघर पुलिस के एक अधिकारी ने पुष्टि की है कि महावितरण के सहायक अभियंता की रिपोर्ट और कार्यालय के कर्मचारियों के बयानों के आधार पर मामले की जांच की जा रही है। सरकारी दफ्तर के भीतर इस तरह का आत्मघाती कदम उठाने, सरकारी काम में बाधा डालने और दफ्तर में मौजूद अन्य लोगों के जीवन को खतरे में डालने के विभिन्न पहलुओं को ध्यान में रखते हुए माणिकपुर पुलिस स्टेशन में आवश्यक विधिक धाराओं के तहत मामला दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

पुलिस अधिकारियों ने आम जनता से अपील की है कि किसी भी शिकायत या समस्या के निवारण के लिए कानून को अपने हाथ में न लें और न ही ऐसा कोई आत्मघाती कदम उठाएं। शिकायतों के निवारण के लिए विद्युत लोकपाल और उपभोक्ता शिकायत निवारण मंच (CGRF) जैसी वैधानिक संस्थाएं मौजूद हैं, जहां नागरिक अपनी बात रख सकते हैं।


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