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ओडिशा में बनेगा भव्य ‘लक्ष्मी पुराण कॉरिडोर’, बांटी जाएंगी 1 करोड़ पुस्तकें






ओडिशा में बनेगा ऐतिहासिक ‘लक्ष्मी पुराण कॉरिडोर’: महिला सशक्तीकरण और सामाजिक न्याय की नई क्रांति, बांटी जाएंगी 1 करोड़ प्रतियां


ओडिशा में आकार लेगा भव्य ‘लक्ष्मी पुराण कॉरिडोर’: 15वीं सदी के कवि बलराम दास की स्मृति में ₹28 करोड़ की परियोजना; पूरे राज्य में बांटी जाएगी 1 करोड़ मूल प्रतियां

प्रदेश खबर नेटवर्क | अपडेटेड: 3 जुलाई 2026
स्थान: भुवनेश्वर/पुरी

भुवनेश्वर: ओडिशा की सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और सामाजिक चेतना को वैश्विक पटल पर एक नई पहचान देने के लिए राज्य सरकार ने एक ऐतिहासिक और युगांतरकारी निर्णय लिया है। ओडिशा सरकार ने लगभग 500 वर्ष पहले देवी महालक्ष्मी पर प्रसिद्ध धार्मिक और सामाजिक ग्रंथ ‘लक्ष्मी पुराण’ लिखने वाले महान ओड़िया कवि बलराम दास की पावन स्मृति में एक भव्य ‘लक्ष्मी पुराण कॉरिडोर’ (Lakshmi Purana Corridor) विकसित करने की घोषणा की है।

इस महत्वाकांक्षी सांस्कृतिक परियोजना की आधिकारिक घोषणा ओडिशा की उप मुख्यमंत्री प्रवती परिदा ने पुरी जिले के गोप ब्लॉक के अंतर्गत आने वाले बेगुनिया गांव में आयोजित एक राष्ट्रीय संगोष्ठी के दौरान की। यह वही पावन स्थल है जहां ओड़िया साहित्य के पंचसखाओं में से एक, महाकवि बलराम दास की समाधि पीठ स्थित है। पर्यटन और महिला एवं बाल विकास विभाग का प्रभार संभाल रही उप मुख्यमंत्री ने बताया कि इस पूरे कॉरिडोर के निर्माण के लिए खाका (ब्लूप्रिंट) पूरी तरह तैयार कर लिया गया है और इस पर लगभग 28 करोड़ रुपये की राशि खर्च की जाएगी।

उप मुख्यमंत्री प्रवती परिदा का मुख्य संदेश: “महाकवि बलराम दास द्वारा रचित ‘लक्ष्मी पुराण’ केवल एक धार्मिक या भक्ति ग्रंथ नहीं है, बल्कि यह एक महान सामाजिक क्रांति का दस्तावेज है। यह ग्रंथ हमें सिखाता है कि समाज की प्रगति और समृद्धि के लिए महिलाओं का सशक्तीकरण, सामाजिक समानता और गरिमा अत्यंत आवश्यक हैं। यह कॉरिडोर हमारी आने वाली पीढ़ियों को सामाजिक न्याय का पाठ पढ़ाएगा।”

महिला सशक्तीकरण और स्वच्छता के प्रसार के लिए बांटी जाएंगी 1 करोड़ पुस्तकें

इस परियोजना के साथ-साथ राज्य सरकार ने सामाजिक चेतना जगाने के लिए एक बहुत बड़ा अभियान शुरू करने का फैसला किया है। उप मुख्यमंत्री ने बताया कि महिलाओं के सशक्तीकरण, जातिगत भेदभाव के उन्मूलन और स्वच्छता के संदेश को घर-घर तक फैलाने के लिए राज्य सरकार ‘लक्ष्मी पुराण’ की लगभग 1 करोड़ प्रामाणिक और संशोधित प्रतियां पूरे राज्य में निःशुल्क वितरित करेगी।

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यह वितरण अभियान ओडिशा साहित्य अकादमी के माध्यम से संचालित किया जाएगा। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इस बार जो प्रतियां वितरित की जाएंगी, वे कवि बलराम दास की मूल पांडुलिपि पर आधारित होंगी, ताकि वर्तमान में बाजार में चल रही कुछ अधूरी या त्रुटिपूर्ण कड़ियों को सुधारा जा सके और लोगों तक सही ज्ञान पहुंच सके।

परियोजना की मुख्य विशेषताएं और बुनियादी ढांचा

यह कॉरिडोर न केवल पर्यटन को बढ़ावा देगा बल्कि ओड़िया संस्कृति के शोधार्थियों के लिए एक अंतरराष्ट्रीय केंद्र के रूप में भी उभरेगा। इस ‘लक्ष्मी पुराण कॉरिडोर’ के अंतर्गत निम्नलिखित प्रमुख संरचनाओं का निर्माण किया जाएगा:

परियोजना का घटक विवरण और उद्देश्य
बलराम दास गैलरी महान कवि के जीवन, उनकी रचनाओं और पंचसखा आंदोलन में उनके योगदान को प्रदर्शित करने वाली एक अत्याधुनिक डिजिटल और भौतिक गैलरी।
लक्ष्मी रिसर्च गैलरी ‘लक्ष्मी पुराण’ के दार्शनिक, सामाजिक और साहित्यिक पहलुओं पर शोध करने के लिए देश-विदेश के विद्वानों के लिए एक उन्नत अनुसंधान केंद्र।
सामुदायिक पाठ स्थल एक विशाल परिसर जहां सामूहिक रूप से सांस्कृतिक कार्यक्रम और धार्मिक पाठ आयोजित किए जा सकेंगे।
आजीविका के अवसर स्थानीय स्तर पर हस्तशिल्प, प्रसाद और पर्यटन से जुड़े रोजगार सृजित कर स्थानीय ग्रामीणों को आर्थिक रूप से सुदृढ़ बनाना।

मूल संगीतमय धुन में तैयार होगा ऑडियो संस्करण

इस ग्रंथ की पहुंच को और अधिक सुलभ और प्रभावी बनाने के लिए ओडिशा सरकार इसका एक विशेष ऑडियो संस्करण भी तैयार करवा रही है। प्रख्यात संगीतकार सीताराम अग्रवाल और प्रसिद्ध गायिकाएं नामिता अग्रवाल एवं गीता दास इस संशोधित और शुद्ध संस्करण को अपनी आवाज देंगी। कार्यक्रम में जगन्नाथ संस्कृति के प्रख्यात विद्वान गौरांग चरण दास ने प्रदर्शन करके दिखाया कि मूल ‘लक्ष्मी पुराण’ को किस राग और छंद में गाया जाना चाहिए, ताकि इसकी मूल भावना को अक्षुण्ण रखा जा सके।

500 वर्ष पूर्व सामाजिक क्रांति और लैंगिक समानता की नींव

राष्ट्रीय संगोष्ठी ‘शक्ति वंदना का महागाथा – बलराम दास का लक्ष्मी पुराण’ में देश भर से आए विद्वानों और शोधकर्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि बलराम दास अपने समय से बहुत आगे की सोच रखने वाले क्रांतिकारी कवि थे।

संगोष्ठी में शामिल प्रख्यात शोधकर्ता और स्तंभकार असित मोहंती ने एक बेहद महत्वपूर्ण तथ्य उजागर किया। उन्होंने बताया, “आज से 500 साल पहले जब दुनिया में महिलाओं के अधिकारों की बात सोची भी नहीं जाती थी, तब बलराम दास ने ‘लक्ष्मी पुराण’ में स्पष्ट रूप से लिखा था कि बेटियों का अपने पिता की संपत्ति पर पूर्ण अधिकार है। यह विचार आज के आधुनिक युग में भी क्रांतिकारी माना जाता है।”

इसके साथ ही, ‘लक्ष्मी पुराण’ की कथा इस बात पर आधारित है कि कैसे देवी महालक्ष्मी एक दलित महिला ‘श्रिया चंडालूनी’ के घर में प्रवेश करती हैं और उसकी भक्ति से प्रसन्न होकर उसे आशीर्वाद देती हैं। जब भगवान जगन्नाथ और उनके बड़े भाई बलभद्र इस बात पर देवी लक्ष्मी का विरोध करते हैं, तो देवी लक्ष्मी अपने अधिकारों और स्वाभिमान के लिए अपने दिव्य पति से भी संघर्ष करती हैं। यह कहानी सीधे तौर पर जातिवाद, छुआछूत और लैंगिक भेदभाव पर कड़ा प्रहार करती है।

तीन वर्षों के भीतर पूरा होगा निर्माण कार्य

ओडिशा के कानून, लोक निर्माण और आबकारी मंत्री पृथ्वीराज हरिचंदन ने इस आयोजन में सम्मानित अतिथि के रूप में भाग लिया। उन्होंने कहा कि लक्ष्मी पुराण केवल एक पूजा की किताब नहीं है, बल्कि यह एक जातिविहीन और समतावादी समाज के निर्माण का मार्गदर्शक मार्ग है। पर्यटन विभाग ने संस्कृति विभाग के साथ समन्वय स्थापित कर इस परियोजना को आगामी तीन वर्षों (2029 तक) के भीतर पूरी तरह से संपन्न करने का लक्ष्य रखा है। इसके अतिरिक्त, ओडिशा की इस प्रगतिशील सोच को वैश्विक स्तर पर प्रसारित करने के लिए ‘लक्ष्मी पुराण’ का विभिन्न प्रमुख भारतीय भाषाओं में अनुवाद भी किया जाएगा।


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