घरेलू आईटी कंपनियों के शेयरों में बड़ी गिरावट देखी जा रही है। ये ट्रेंड अब सिर्फ वैश्विक अर्थव्यवस्था में उठापटक का नतीजा नहीं रहा। विश्लेषकों के मुताबिक, यह नई टेक्नोलॉजी जेनरेटिव एआई से पैदा हुए ढांचागत खतरे की कहानी बन चुकी है। इसने दशकों पुराने बिजनेस मॉडल पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
भारत के चार सबसे बड़े आईटी शेयर-टीसीएस, इंफोसिस, विप्रो और एलटीआईमाइंडट्री ऑल-टाइम हाई से 57% तक टूट चुके हैं। 10 प्रमुख आईटी कंपनियों का मार्केट कैप पीक से 19.3 लाख करोड़ रुपए घट चुका है। इस गिरावट की दो बड़ी वजहें हैं- अमेरिका में सख्त होती मौद्रिक नीति और जेनरेटिव एआई से कोडिंग व बैक-ऑफिस काम का ऑटोमेशन। यह आईटी कंपनियों के पारंपरिक बिजनेस मॉडल को सीधी चुनौती दे रहा है। एक्सपर्ट्स अब सिर्फ कमाई में गिरावट नहीं, बल्कि सेक्टर के स्थायी डी-रेटिंग की आशंका जता रहे हैं। यानी हालात नहीं सुधरे तो आईटी शेयर और गिर सकते हैं।
रिस्क बढ़ा – अब पूंजी क्लाउड इंफ्रा















