NEP 2020 के तहत कौशल शिक्षा से बदली स्कूल शिक्षा की दिशा, ‘विकसित भारत’ की नींव मजबूत
नई दिल्ली | 10 जनवरी 2026 | केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने कहा है कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 और नेशनल करिकुलम फ्रेमवर्क (NCF-SE) के तहत कौशल शिक्षा (Skill Education) भारतीय शिक्षा प्रणाली में क्रांतिकारी बदलाव ला रही है। यह पहल पारंपरिक स्कूली शिक्षा और कौशल-आधारित सीखने के बीच की खाई को पाटते हुए विद्यार्थियों को भविष्य के लिए तैयार कर रही है।
शिक्षा मंत्रालय के अनुसार, कौशल शिक्षा छात्रों में फ्यूचर-रेडी स्किल्स विकसित कर रही है, जिससे आज के विद्यार्थी कल के विकसित भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकेंगे।
कक्षा 6 से 8 तक ‘10 बैगलेस डे’ से सीखने का नया अनुभव
NEP 2020 के अनुरूप, कक्षा 6 से 8 के विद्यार्थियों के लिए 10 बैगलेस डे गतिविधियों के माध्यम से विभिन्न कौशल क्षेत्रों से परिचय कराया जा रहा है। इन गतिविधियों में हैंड्स-ऑन और एक्टिविटी-बेस्ड लर्निंग पर विशेष जोर दिया गया है, जिससे छात्रों में व्यावहारिक समझ और रचनात्मक सोच विकसित हो रही है।
कक्षा 9 से 12 तक ‘वर्ल्ड ऑफ वर्क’ से सीधा जुड़ाव
वहीं कक्षा 9 से 12 के छात्रों को स्किल लैब्स, उद्योग विशेषज्ञों से संवाद, इंडस्ट्री विजिट और इंटर्नशिप के माध्यम से कार्य-जगत (World of Work) से जोड़ा जा रहा है। इससे विद्यार्थियों को करियर विकल्पों की स्पष्ट समझ मिल रही है और वे अपने भविष्य को लेकर अधिक सूचित निर्णय ले पा रहे हैं।
शिक्षा मंत्रालय ने कहा कि यह पहल छात्रों के समग्र विकास, अकादमिक और कौशल आधारित मार्गों की तैयारी तथा करियर निर्माण की दिशा में एक सशक्त आधार प्रदान कर रही है।
कौशल शिक्षा का यह मॉडल न केवल रोजगारपरक शिक्षा को बढ़ावा देता है, बल्कि अनुभवात्मक शिक्षण (Experiential Learning) के माध्यम से आत्मनिर्भर और सक्षम नागरिक तैयार करने में सहायक सिद्ध हो रहा है।










