Advertisement

HEI Innovation & Collaborate: IISc बेंगलुरु में रिसर्च, डीप-टेक और ग्लोबल पार्टनरशिप का नया मॉडल

HEI Innovation & Collaborate: IISc बेंगलुरु बना भारत का ग्लोबल साइंस और डीप-टेक हब

भारत के उच्च शिक्षा और वैज्ञानिक अनुसंधान परिदृश्य में इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस (IISc), बेंगलुरु एक बार फिर केंद्र में है। केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय (Ministry of Education) ने #HEIInnovationandCollaborate अभियान के तहत IISc को देश की ऐसी प्रमुख संस्था के रूप में रेखांकित किया है, जहां फ्रंटियर रिसर्च, डीप-टेक उद्यमिता और वैश्विक साझेदारियां एक साथ आगे बढ़ रही हैं। मंत्रालय के अनुसार, IISc न सिर्फ प्रयोगशाला से बाज़ार तक नवाचार को बढ़ावा दे रहा है, बल्कि वैश्विक कक्षाओं और आजीवन सक्रिय एलुमनी नेटवर्क के जरिए विज्ञान आधारित विकास को राष्ट्रीय उद्देश्य से जोड़ रहा है।

IISc बेंगलुरु को लंबे समय से भारत की अग्रणी विज्ञान एवं अनुसंधान संस्था माना जाता रहा है। अब यह संस्थान रिसर्च के साथ-साथ स्टार्टअप और डीप-टेक इकोसिस्टम को मजबूती देने में भी अग्रणी भूमिका निभा रहा है। शिक्षा मंत्रालय के मुताबिक, IISc का फोकस केवल अकादमिक उत्कृष्टता तक सीमित नहीं है, बल्कि वह इनक्यूबेशन, इंडस्ट्री लिंकज और ग्लोबल पार्टनरशिप के जरिए देश के लिए ठोस समाधान विकसित कर रहा है।

IISc में विकसित किया गया इन्क्यूबेशन मॉडल भारत के उच्च शिक्षण संस्थानों के लिए एक उदाहरण बनकर उभरा है। संस्थान में कई फ्लैगशिप सेंटर सक्रिय हैं, जिनमें शामिल हैं—

  • STEM Cell
  • GEECI (GaN सेमीकंडक्टर्स पर केंद्रित)
  • INCeNSE (नैनोसाइंस और नैनोइंजीनियरिंग)
  • CPDMeD (मेडटेक और जेरियाट्रिक हेल्थकेयर)

इन केंद्रों के माध्यम से अब तक

  • 118 से अधिक स्टार्टअप्स इनक्यूबेट किए जा चुके हैं
  • 150 से ज्यादा प्रोडक्ट्स विकसित किए गए हैं

इन स्टार्टअप्स का फोकस डीप साइंस, क्लाइमेट-टेक, बायोटेक, एयरोस्पेस, सस्टेनेबिलिटी और एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग जैसे रणनीतिक क्षेत्रों पर है।

IISc का एक प्रमुख लक्ष्य रिसर्च को सिर्फ जर्नल्स तक सीमित न रखकर उसे मार्केट रेडी टेक्नोलॉजी में बदलना है। शिक्षा मंत्रालय के अनुसार, संस्थान ने Lab-to-Market इनोवेशन मॉडल को सफलतापूर्वक अपनाया है, जिससे अनुसंधान का सीधा लाभ उद्योग, समाज और अर्थव्यवस्था तक पहुंच रहा है।

IISc की वैश्विक पहचान इसकी अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों से भी झलकती है। संस्थान के पास वर्तमान में

  • 117 से अधिक सक्रिय अंतरराष्ट्रीय MoUs
    हैं।

इसके अलावा IISc ने

  • University of Melbourne
  • Australian National University
  • University of Manchester
    के साथ जॉइंट डॉक्टोरल प्रोग्राम्स शुरू किए हैं।

IISc कई अंतरराष्ट्रीय रिसर्च प्लेटफॉर्म्स का हिस्सा है, जिनमें शामिल हैं—

file_0000000093d882119d122d54d9d757b5
WhatsApp Image 2026-08-14 at 23.50.40 (4)
WhatsApp Image 2026-08-14 at 23.50.38
WhatsApp Image 2026-08-14 at 23.50.39 (1)
WhatsApp Image 2026-08-14 at 23.50.40
WhatsApp Image 2026-08-14 at 23.50.39 (3)
  • Future Earth (South Asia Office – IISc में स्थित)
  • Indo-French Cell for Water Science (CEFIRSE)
  • British Telecom India Research Centre (BTIRC)

ये प्लेटफॉर्म जलवायु परिवर्तन, जल संसाधन, डिजिटल टेक्नोलॉजी और सस्टेनेबल डेवलपमेंट जैसे अहम विषयों पर वैश्विक सहयोग को बढ़ावा देते हैं।

शिक्षा मंत्रालय के अनुसार, IISc ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रिसर्च मोबिलिटी को बढ़ाने के लिए संयुक्त सीड फंडिंग और पार्टनर-ड्रिवन मॉडल अपनाया है।
अब तक

  • 45 अंतरराष्ट्रीय संयुक्त रिसर्च प्रोजेक्ट्स
    को समर्थन दिया जा चुका है।

इन परियोजनाओं में University College London, Imperial College London, Technical University of Delft, Penn State University, Rice University और University of New South Wales जैसे प्रतिष्ठित संस्थान शामिल हैं।

IISc ने उच्च शिक्षा में अंतरराष्ट्रीयकरण को बढ़ावा देने के लिए कई अहम कदम उठाए हैं।

  • UG, PG और PhD प्रोग्राम्स में सुपरन्यूमेरेरी सीट्स
  • अंतरराष्ट्रीय छात्रों को भारतीय छात्रों के समान सुविधाएं
  • अकादमिक और रिसर्च सपोर्ट में समानता

इन पहलों से IISc ग्लोबल टैलेंट के लिए आकर्षण का केंद्र बनता जा रहा है।

IISc के

  • 36,000 से अधिक पंजीकृत एलुमनी
    दुनिया भर में सक्रिय हैं।

यह एलुमनी नेटवर्क

  • रिसर्च सहयोग
  • मेंटरशिप
  • और संस्थागत विकास
    में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

IISc ने 1998 में Office of International Relations (OIR) की स्थापना की थी, जो संस्थान की अंतरराष्ट्रीय गतिविधियों का संचालन करता है। इसके जरिए

  • फैकल्टी मोबिलिटी
  • इंटरनेशनल विज़िटिंग प्रोफेसरशिप
  • और वैश्विक अकादमिक साझेदारियां
    सुनियोजित रूप से आगे बढ़ाई जाती हैं।

राष्ट्रीय पहलों से जुड़ाव

IISc की फैकल्टी मोबिलिटी को

  • GIAN
  • VAJRA
  • SPARC
  • VAIBHAV
    जैसी राष्ट्रीय पहलों से भी समर्थन मिलता है, जिससे अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ भारत आकर रिसर्च और शिक्षण में योगदान दे रहे हैं।

शिक्षा मंत्रालय का मानना है कि IISc का मॉडल विकसित भारत के लक्ष्य के अनुरूप है, जहां

  • विज्ञान
  • तकनीक
  • इनोवेशन
  • और वैश्विक सहयोग
    एक साथ मिलकर राष्ट्रीय विकास को गति देते हैं।

आने वाले वर्षों में IISc का लक्ष्य

  • डीप-टेक स्टार्टअप्स की संख्या बढ़ाना
  • ग्लोबल रिसर्च पार्टनरशिप को और मजबूत करना
  • और समाज-केंद्रित तकनीकी समाधान विकसित करना
    है।

#HEIInnovationandCollaborate अभियान के तहत IISc बेंगलुरु को मिली यह पहचान भारत की उच्च शिक्षा प्रणाली के लिए एक मजबूत संदेश है। यह दर्शाता है कि भारतीय संस्थान न सिर्फ वैश्विक मानकों पर खरे उतर रहे हैं, बल्कि विज्ञान आधारित राष्ट्र निर्माण में भी अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं।

 

ChatGPT Image Jul 20, 2026, 05_14_44 PM
ChatGPT Image Jul 20, 2026, 05_53_50 PM
ChatGPT Image Jul 20, 2026, 06_08_26 PM
ChatGPT Image Jul 20, 2026, 06_16_13 PM
ChatGPT Image Jul 20, 2026, 06_22_41 PM
WhatsApp Image 2026-08-14 at 23.12.06
WhatsApp Image 2026-08-14 at 23.16.05