छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में मेडिकल सर्टिफिकेट बनवाने गए 10वीं के छात्र के साथ एडॉप्शन सेंटर के संचालक और डॉक्टर पर अश्लील हरकत करने का आरोप लगा

छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में मेडिकल सर्टिफिकेट बनवाने गए 10वीं के छात्र के साथ एडॉप्शन सेंटर के संचालक और डॉक्टर पर अश्लील हरकत करने का आरोप लगा है। शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने पॉक्सो एक्ट के तहत केस दर्ज कर आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया, जहां से उसे न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।

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कलेक्टर अभिजीत सिंह ने महिला एवं बाल विकास विभाग को मातृ छाया एडॉप्शन सेंटर की जांच करने और उसका पंजीयन रद्द करने के निर्देश दिए हैं। इस सेंटर से विदेश समेत कई राज्यों में 12 बच्चे गोद लिए जा चुके हैं। मामला पद्मनाभपुर थाना इलाके का है।

जानिए क्या है पूरा मामला

पुलिस के अनुसार, घटना शुक्रवार दोपहर की है। 10वीं कक्षा का एक छात्र अपने दोस्त का मेडिकल सर्टिफिकेट बनवाने के लिए बोरसी स्थित डॉक्टर सुधीर हिसीकर के क्लीनिक पहुंचा था। आरोप है कि इसी दौरान डॉक्टर ने उसके साथ अश्लील हरकत की। छात्र किसी तरह वहां से निकलकर घर पहुंचा और परिजनों को पूरी घटना की जानकारी दी।

परिजनों की शिकायत पर तत्काल कार्रवाई

घटना की जानकारी मिलने के बाद परिजन छात्र को लेकर पद्मनाभपुर थाना पहुंचे और लिखित शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने तत्काल पॉक्सो एक्ट की धाराओं में मामला दर्ज कर आरोपी डॉक्टर से पूछताछ की। इसके बाद शनिवार को उसे गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया।

एडॉप्शन सेंटर की भी होगी जांच

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पुलिस का कहना है कि, जांच केवल क्लीनिक तक सीमित नहीं रहेगी। आरोपी जिस मातृ छाया एडॉप्शन सेंटर का संचालन करता है, उसकी कार्यप्रणाली की भी जांच की जाएगी। यह पता लगाया जाएगा कि सेंटर का संचालन निर्धारित नियमों के अनुरूप किया जा रहा था या नहीं।

मातृ छाया एडॉप्शन सेंटर राज्य के बड़े एडॉप्शन सेंटरों में शामिल है। यहां अनाथ और बेसहारा बच्चों की देखभाल की जाती है। बच्चों को गोद देने की प्रक्रिया जिला प्रशासन और कलेक्टर कार्यालय की निगरानी में पूरी होती है।

विदेश समेत कई राज्यों में 12 बच्चे लिए जा चुके हैं गोद

बताया जा रहा है कि इस सेंटर से अब तक 12 से अधिक बच्चों को गोद दिया जा चुका है, जिनमें कुछ बच्चों को विदेशी परिवारों ने भी गोद लिया है। कुछ महीने पहले महाराष्ट्र की एक महिला जज ने भी इसी सेंटर से दो बच्चों को गोद लिया था।

कलेक्टर ने पंजीयन रद्द करने के दिए निर्देश

घटना की जानकारी मिलते ही कलेक्टर अभिजीत सिंह ने महिला एवं बाल विकास विभाग की टीम को एडॉप्शन सेंटर भेजकर जांच के निर्देश दिए। साथ ही सेंटर का पंजीयन रद्द करने की प्रक्रिया शुरू करने के लिए भी कहा है।

प्रशासन का कहना है कि जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। वहीं, पुलिस ने स्पष्ट किया है कि जांच के दौरान यदि किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ भी नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।