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केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा: सरगुजा में कांग्रेस की विजय रैली और जश्न






केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर सरगुजा में कांग्रेस की विजय रैली: युवाओं के संघर्ष की ऐतिहासिक जीत


विशेष रिपोर्ट | राष्ट्रीय राजनीति और क्षेत्रीय प्रभाव

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के उपरांत सरगुजा ज़िला कांग्रेस कमेटी द्वारा अंबिकापुर में निकाली गई विजय रैली, जश्न और तीखी प्रतिक्रियाएं

प्रणय संवाददाता | अंबिकापुर, सरगुजा | अपडेटेड: जुलाई 26, 2026

अंबिकापुर: देश की शिक्षा व्यवस्था को झकझोर देने वाले और प्रतियोगी परीक्षाओं में लगातार सामने आ रहे धांधली व पेपर लीक मामलों के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के आखिरकार अपने पद से इस्तीफे की खबर सामने आते ही देश भर के छात्र संगठनों और राजनीतिक दलों में हलचल तेज हो गई है। इसी क्रम में सरगुजा ज़िला कांग्रेस कमेटी की ओर से आज अंबिकापुर में राजीव भवन से संगम चौक तक एक विशाल रैली निकाली गई। इस दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं और नेताओं ने जोरदार आतिशबाजी कर शिक्षा मंत्री के इस्तीफे का जश्न मनाया।

ज्ञात हो कि मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर कांग्रेस पार्टी सहित पूरे देश के छात्र और युवा लंबे समय से आंदोलनरत थे। केंद्र सरकार के लगातार अडिग रवैये और शुरुआती आनाकानी के बाद कांग्रेस पार्टी ने देश भर के सभी जिला मुख्यालयों में आज भव्य मशाल रैली निकालने का रणनीतिक निर्णय लिया था। हालांकि, ठीक मशाल रैली के पूर्व ही केंद्र सरकार को झुकना पड़ा और मांग पूर्ण होने पर कांग्रेस ने इस निर्धारित कार्यक्रम को ‘विजय रैली’ के रूप में तब्दील कर दिया।

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आंदोलन की मुख्य पृष्ठभूमि

देशभर के लाखों-करोड़ों युवाओं के भविष्य से जुड़े नीट (NEET) और अन्य प्रवेश परीक्षाओं के पेपर लीक मामलों ने देश की प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे। लगातार हो रही परीक्षाओं की विफलता और इसके दबाव में छात्रों द्वारा आत्महत्या जैसी चरम कदम उठाए जाने से पूरे देश में रोष व्याप्त था। आज की इस विजय रैली में सरगुजा के तमाम दिग्गज कांग्रेसी नेता, पदाधिकारी, ब्लॉक अध्यक्ष, मोर्चा संगठनों के प्रमुख और बड़ी संख्या में कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

दिग्गज कांग्रेसी नेताओं के प्रमुख बयान

“अनगिनत पेपर लीक के कारण छात्रों की आत्महत्या होने से पूरे देश में छात्रों, उनके अभिभावकों और सामान्य नागरिकों में भारी रोष था, जिसका स्वाभाविक नतीजा इस देशव्यापी आंदोलन के रूप में उभरा। मोदी सरकार ने इस जायज आंदोलन का बर्बरतापूर्ण तरीके से दमन करने का पूरा प्रयास किया। यदि सरकार समझदारी दिखाते हुए इस्तीफे के निर्णय पर पहले ही अमल कर लेती, तो शायद उसकी थोड़ी बहुत इज्जत बच जाती।”
— अमरजीत भगत, पूर्व कैबिनेट मंत्री
“नीट पेपर लीक के उपरांत देश में शिक्षा, रोजगार और पारदर्शी व्यवस्था जैसे बुनियादी विषयों को लेकर हमारे सर्वोच्च नेता राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी ने मजबूत छात्र आंदोलन की नींव रखी थी। आज उसी संघर्ष के बल पर इस आंदोलन में एक प्रतीकात्मक विजय प्राप्त हुई है, लेकिन शिक्षा व्यवस्था की संपूर्ण शुचिता और सुधार के रास्ते में अभी एक लंबा सफर तय करना बाकी है।”
— जे पी श्रीवास्तव, प्रदेश कांग्रेस उपाध्यक्ष
“देशभर के छात्रों ने अपनी एकजुटता और अदम्य साहस का परिचय देते हुए एक ऐतिहासिक आंदोलन को अंजाम दिया, जिसके परिणामस्वरुप अंततः अहंकार में डूबी सरकार को झुकना पड़ा है। पेपर लीक और प्रशासनिक घपलेबाजी के चलते अपनी अमूल्य जान गंवाने वाले छात्रों को मैं अपनी नम आंखों से श्रद्धांजलि अर्पित करता हूँ और छात्र एकता तथा उसकी इस ऐतिहासिक सफलता को सलाम करता हूँ।”
— शफ़ी अहमद, नेता प्रतिपक्ष, नगर निगम
“धर्मेंद्र के इस इस्तीफे से हमें कदापि यह नहीं मान लेना चाहिए कि यह वर्तमान सरकार शिक्षा और रोजगार जैसे गंभीर मुद्दों को लेकर संवेदनशील हो गई है। यह महज एक बहुत छोटा कदम है। देश के युवाओं और छात्रों के हक व हित के लिए कांग्रेस पार्टी अपनी यह लड़ाई आगे भी पूरी मजबूती के साथ जारी रखेगी।”
— द्वितेंद्र मिश्रा, प्रदेश कांग्रेस महामंत्री
“सरकार के इस विवशता भरे कदम से देश के युवाओं का चरमराई शिक्षा व्यवस्था पर दोबारा विश्वास कायम हो जाएगा, ऐसा दूर-दूर तक दिखाई नहीं देता। इस सरकार ने स्वेच्छा से नहीं बल्कि तीव्र जनदबाव में यह कदम उठाया है। इस मौजूदा सरकार से युवाओं को बहुत ज्यादा उम्मीदें रखने की आवश्यकता नहीं है।”
— राकेश गुप्ता, पूर्व कांग्रेस जिलाध्यक्ष

रैली में दिखा अभूतपूर्व उत्साह

राजीव भवन से शुरू हुई यह विजय रैली शहर के मुख्य मार्गों से होते हुए संगम चौक तक पहुंची, जहां कार्यकर्ताओं ने ढोल-नगाड़ों की थाप पर जश्न मनाया, पटाखे फोड़े और मिठाइयां बांटी। रैली के दौरान ब्लॉक कार्यकारणी के पदाधिकारी, मंडल अध्यक्ष, विभिन्न मोर्चा संगठनों के प्रमुख और छत्तीसगढ़ के आम नागरिकों व युवाओं की भारी मौजूदगी देखी गई।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री का यह इस्तीफा आने वाले दिनों में राष्ट्रीय स्तर पर विपक्षी दलों और छात्र संगठनों के लिए एक बड़ा राजनीतिक टर्निंग पॉइंट साबित हो सकता है, वहीं अंबिकापुर में कांग्रेस का यह शक्ति प्रदर्शन ग्रामीण व शहरी इलाकों में पार्टी कार्यकर्ताओं के भीतर नए जोश का संचार कर गया है।

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