नीति आयोग की रिपोर्ट से साय सरकार का वित्तीय प्रबंधन फेल: सुशील आनंद शुक्ला का तीखा हमला, स्थिति दिवालिया होने की ओर
भारत सरकार के नीति आयोग द्वारा जारी ‘वित्तीय स्वास्थ्य सूचकांक रिपोर्ट’ के बाद छत्तीसगढ़ की सियासत गर्मा गई है। प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने रिपोर्ट के आंकड़ों का हवाला देते हुए राज्य सरकार पर वित्तीय बदहाली का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि 18 बड़े राज्यों की सूची में छत्तीसगढ़ 17वें स्थान (नीचे से दूसरे स्थान) पर पहुंच गया है, जो प्रदेश के विकास के लिए बेहद चिंताजनक है।
कांग्रेस द्वारा रेखांकित नीति आयोग रिपोर्ट के प्रमुख आंकड़े
- राजकोषीय अनुशासन स्कोर: 56 अंक से घटकर महज 7.4 अंक पर पहुंचा।
- राजकोषीय घाटा: तय लक्ष्य 2.99 प्रतिशत से बढ़कर 5.32 प्रतिशत हुआ।
- देश में रैंकिंग: 18 बड़े राज्यों की सूची में छत्तीसगढ़ 17वें स्थान पर।
- कर संग्रहण: कर प्राप्तियों में 60 प्रतिशत की वृद्धि के बावजूद राज्य कर्ज में डूब रहा है।
“वित्तीय प्रबंधन और अनुशासन में सरकार पूरी तरह नाकाम”
सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि नीति आयोग की रिपोर्ट यह साबित करती है कि भाजपा सरकार और वित्त मंत्री ओपी चौधरी वित्तीय अनुशासन व अर्थव्यवस्था का प्रबंधन करने में पूरी तरह से विफल साबित हुए हैं। उन्होंने कहा कि महज एक साल के भीतर राज्य का राजकोषीय अनुशासन स्कोर 56 से गिरकर 7.4 अंक पर आ जाना इस सरकार की नाकामी का प्रत्यक्ष प्रमाण है। नीति आयोग के आंकड़ों के मुताबिक राज्य की आर्थिक स्थिति दिवालिया होने के कगार पर पहुंच चुकी है, जिस पर सरकार को तत्काल स्पष्टीकरण जारी करना चाहिए।
“बेतहाशा टैक्स वसूली, महंगी बिजली, शराब की अंधाधुंध बिक्री और जमीनों की रजिस्ट्री पर भारी टैक्स लेने के बाद भी साय सरकार का वित्तीय प्रबंधन पूरी तरह ध्वस्त हो चुका है।” — सुशील आनंद शुक्ला, अध्यक्ष, संचार विभाग (प्रदेश कांग्रेस)
“अंग्रेजों से भी अधिक बेरहम बनी सरकार, भ्रष्टाचार में डूब रहा पैसा”
कांग्रेस नेता ने भाजपा सरकार की तुलना औपनिवेशिक शासन से करते हुए कहा कि आम जनता से टैक्स वसूली के मामले में यह सरकार अंग्रेजों से भी अधिक बेरहम साबित हो रही है। उन्होंने कहा कि पिछले ढाई वर्षों में राजस्व और कर संग्रहण में 60 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है, लेकिन इसके बावजूद छत्तीसगढ़ की वित्तीय स्थिति लगातार कमजोर हो रही है।
उन्होंने आरोप लगाया कि बजट में योजनाओं के लिए रखा गया पैसा धरातल पर विकास कार्यों में लगने के बजाय भ्रष्टाचार और कमीशनखोरी की भेंट चढ़ रहा है। यही कारण है कि जमीन पर कोई नया विकास नजर नहीं आ रहा है, जबकि राज्य पर कर्ज का बोझ और उसके ब्याज का भुगतान लगातार बढ़ रहा है। सरकार छत्तीसगढ़ के उज्ज्वल भविष्य को कर्ज के दलदल में धकेल रही है।














