मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य में मध्यप्रदेश का डंका: ‘सुमन पंचायत’ और ‘सुमन सखी चैटबॉट’ को मिली राष्ट्रीय पहचान, अन्य राज्य भी करेंगे लागू
भोपाल: मध्यप्रदेश में मातृ एवं नवजात शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़, सुरक्षित और सुलभ बनाने के लिए शुरू किए गए डिजिटल व सामुदायिक नवाचारों को राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी सफलता और पहचान मिली है। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में आयोजित ‘नेशनल वर्कशॉप ऑन सुमन रोडमैप 2030’ में मध्यप्रदेश के दो प्रमुख मॉडल—‘सुमन पंचायत’ और ‘सुमन सखी चैटबॉट’ को राष्ट्रीय स्तर पर ‘बेस्ट प्रैक्टिस’ और अन्य राज्यों के लिए ‘स्केलेबल इंटरवेंशन’ के रूप में मान्यता दी गई है।
केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा जारी **सुमन रोडमैप 2030 गाइडलैंस** में मध्यप्रदेश की इन दोनों पहलों को आधिकारिक रूप से शामिल कर लिया गया है। इसका सीधा तात्पर्य यह है कि अब मध्यप्रदेश के इन सफल मॉडलों को देशभर के अन्य राज्य भी अपनी स्थानीय आवश्यकताओं के अनुसार अपनाएंगे।
मुख्य बिंदु: राष्ट्रीय कार्यशाला में मध्यप्रदेश की उपलब्धियां
- राष्ट्रीय पहचान: ‘सुमन पंचायत’ और ‘सुमन सखी चैटबॉट’ को देश में मॉडल प्रैक्टिस के रूप में स्वीकारा गया।
- ₹1 लाख का पुरस्कार: 1 वर्ष तक शून्य (Zero) मातृ और शिशु मृत्यु दर बनाए रखने वाली ग्राम पंचायत को मिलेगा 1 लाख रुपये का इनाम।
- डिजिटल क्रांति: ‘सुमन सखी चैटबॉट’ के माध्यम से गर्भावस्था और प्रसव संबंधी जानकारी 24×7 डिजिटल मोड पर उपलब्ध।
- अनमोल 2.0 डैशबोर्ड: हाई-रिस्क प्रेग्नेंट वोमेन (HRP) की रियल-टाइम ट्रैकिंग और संस्थागत प्रसव सुनिश्चित करने वाला अत्याधुनिक सिस्टम।
- प्रतिनिधिमंडल: एमडी एनएचएम डॉ. सलोनी सिडाना और वरिष्ठ संयुक्त संचालक डॉ. अर्चना मिश्रा ने कार्यशाला में प्रस्तुत किया मॉडल।
उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने जताई प्रसन्नता: “यह पूरे प्रदेश के लिए गौरव का क्षण”
मध्यप्रदेश के उप मुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल ने इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए स्वास्थ्य विभाग की पूरी टीम को बधाई दी है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य को अपनी सर्वोच्च प्राथमिकताओं में रखकर काम कर रही है। राज्य का लक्ष्य हर गर्भवती महिला और नवजात शिशु को सुरक्षित, सुलभ और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करना है।
उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल का वक्तव्य:
“यह मध्यप्रदेश के लिए अत्यंत गौरव का विषय है कि हमारे स्वास्थ्य नवाचारों को केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय स्तर पर रोल मॉडल माना है। प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के साथ-साथ जन-भागीदारी, आधुनिक डिजिटल तकनीक और डेटा-आधारित रियल टाइम मॉनिटरिंग को बढ़ावा दिया जा रहा है। ‘सुमन पंचायत’ और ‘सुमन सखी चैटबॉट’ जैसे प्रयासों से गर्भवती महिलाओं और उनके परिजनों तक स्वास्थ्य जानकारी की पहुंच बेहद आसान हुई है। राष्ट्रीय स्तर पर बेस्ट प्रैक्टिस के रूप में चुना जाना हमारी नीतियों की प्रभावशीलता का सीधा प्रमाण है।”
लखनऊ राष्ट्रीय कार्यशाला (2-3 सितंबर 2026) में जीवंत प्रदर्शन
2 और 3 सितंबर 2026 को लखनऊ में आयोजित दो दिवसीय ‘नेशनल वर्कशॉप ऑन सुमन रोडमैप 2030’ के दौरान मध्यप्रदेश के प्रतिनिधिमंडल ने इन नवाचारों की कार्यप्रणाली का प्रेजेंटेशन दिया। मध्यप्रदेश के दल का नेतृत्व एनएचएम की प्रबंध संचालक (MD NHM) डॉ. सलोनी सिडाना तथा वरिष्ठ संयुक्त संचालक डॉ. अर्चना मिश्रा एवं विभागीय वरिष्ठ अधिकारियों ने किया। कार्यशाला में देशभर से आए विभिन्न राज्यों के स्वास्थ्य प्रतिनिधियों ने सामुदायिक जुड़ाव के इन मॉडलों की सराहना की।
1. सुमन पंचायत: शून्य मातृ-शिशु मृत्यु दर पर ₹1 लाख का इनाम
सुरक्षित मातृत्व आश्वासन (सुमन) योजना के तहत ‘सुमन पंचायत’ पहल का मुख्य उद्देश्य पंचायत स्तर पर सामुदायिक सहभागिता को मजबूत करना है। इस मॉडल की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह मातृ स्वास्थ्य को केवल स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी न मानकर पूरे समाज की सामूहिक जिम्मेदारी बनाता है।
| पहल का नाम | मुख्य उद्देश्य | विशेष प्रोत्साहन / इंसेंटिव |
|---|---|---|
| सुमन पंचायत (Suman Panchayat) | पंचायत स्तर पर सुरक्षित मातृत्व, प्रसव पूर्व जांच (ANC), प्रसव पश्चात देखभाल और संस्थागत प्रसव के प्रति जागरूकता बढ़ाना। | यदि कोई ग्राम पंचायत लगातार 1 वर्ष तक शून्य (Zero) मातृ और शिशु मृत्यु दर बनाए रखती है, तो सरकार द्वारा उसे ₹1 लाख की प्रोत्साहन राशि दी जाती है। |
2. सुमन सखी चैटबॉट: 24×7 डिजिटल स्वास्थ्य मार्गदर्शक
डिजिटल इंडिया की दिशा में ‘सुमन सखी चैटबॉट’ एक ऐसा यूजर-फ्रेंडली प्लेटफॉर्म है जो गर्भवती महिलाओं, धात्री माताओं और उनके परिवारों को व्हाट्सएप/वेब माध्यम से सही समय पर सटीक जानकारी देता है।
- गर्भावस्था की देखभाल: तिमाही के अनुसार खान-पान, टीकाकरण और आवश्यक दवाइयों की जानकारी।
- भ्रांतियों का निवारण: प्रसव और नवजात शिशु देखभाल से जुड़े मिथकों को दूर कर प्रामाणिक जानकारी देना।
- सूचना अंतर में कमी: दूरस्थ ग्रामीण इलाकों में रहने वाली महिलाओं को बिना अस्पताल भागे तुरंत परामर्श सुविधा उपलब्ध कराना।
3. अनमोल 2.0 डैशबोर्ड: हाई-रिस्क गर्भवती महिलाओं की जीवनरक्षा का कवच
कार्यशाला में मध्यप्रदेश द्वारा विकसित **’अनमोल 2.0′ (ANMOL 2.0) डैशबोर्ड** को भी प्रमुख आकर्षण के रूप में प्रदर्शित किया गया। यह डेटा-संचालित डैशबोर्ड हाई-रिस्क प्रेग्नेंट वोमेन (HRP – High Risk Pregnant Women) की समय रहते पहचान करने और उनकी निरंतर मॉनिटरिंग के लिए डिज़ाइन किया गया है।
- समय पर पहचान: एनीमिक, हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज या अन्य जटिलता वाली गर्भवती महिलाओं को हाई-रिस्क श्रेणी में स्वचालित रूप से चिन्हित करना।
- निरंतर फॉलोअप: मैदानी एएनएम (ANM), आशा (ASHA) और पर्यवेक्षकों को रियल-टाइम अलर्ट भेजना ताकि समय पर जांच और दवाइयां सुनिश्चित हो सकें।
- संस्थागत प्रसव एवं समय पर रेफरल: प्रसव के दौरान संभावित जटिलताओं को देखते हुए महिलाओं को ऐन वक्त पर उच्च स्तरीय रेफरल अस्पतालों (FRU) में सुरक्षित पहुंचाना।
निष्कर्ष: सुरक्षित मातृत्व की ओर बढ़ता मध्यप्रदेश
मध्यप्रदेश के ये स्वास्थ्य नवाचार इस बात का उत्कृष्ट उदाहरण हैं कि कैसे सामुदायिक सहभागिता और डिजिटल तकनीक का संगम जमीनी स्तर पर जीवन बचा सकता है। राष्ट्रीय स्तर पर ‘सुमन पंचायत’ और ‘सुमन सखी चैटबॉट’ को मान्यता मिलने से न केवल मध्यप्रदेश का मान बढ़ा है, बल्कि 2030 तक मातृ एवं शिशु मृत्यु दर को न्यूनतम स्तर पर लाने के भारत के राष्ट्रीय लक्ष्यों को भी नई गति मिलेगी।















