इंदौर में राज्य का पहला साइबर वेलनेस सेंटर शुरू: महिलाओं और बच्चों को मिलेगी नि:शुल्क सहायता | Pradesh Khabar

यह केंद्र महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा 'अहान फाउंडेशन' के प्रोजेक्ट 'रिस्पॉन्सिबल नेटिज़्म' और 'कोगटा फाउंडेशन' के साझा सहयोग से शुरू किया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य डिजिटल अपराधों से प्रभावित पीड़ितों और सर्वाइवर्स को तत्काल, नि:शुल्क और संवेदनशील सहायता प्रदान करना है। इसके साथ ही, पूरे राज्य में सुरक्षित डिजिटल वातावरण और जिम्मेदार ऑनलाइन व्यवहार के लिए एक मजबूत तंत्र विकसित करना भी शामिल है।
साइबर वेलनेस सेंटर में मिलने वाली नि:शुल्क सुविधाएं:
- काउंसलिंग और मानसिक सहयोग: साइबर अपराध की वजह से मानसिक और भावनात्मक तनाव झेल रहे पीड़ितों को नि:शुल्क मनो-सामाजिक (Psycho-social) सहायता दी जाएगी।
- तकनीकी व कानूनी सहायता: ऑनलाइन धोखाधड़ी, ब्लैकमेलिंग और उत्पीड़न के मामलों में विशेषज्ञों द्वारा तकनीकी और कानूनी मार्गदर्शन मिलेगा।
- रिपोर्ट दर्ज कराने में मदद: साइबर घटनाओं की आधिकारिक शिकायत और FIR दर्ज कराने में पीड़ितों को सहयोग प्रदान किया जाएगा।
- डिजिटल साक्षरता और जागरूकता: महिलाओं, बच्चों और स्थानीय समुदायों के लिए डिजिटल रेजिलिएंस, साइबर अधिकारों और ऑनलाइन सुरक्षा पर जागरूकता अभियान चलाए जाएंगे।
"महिलाओं और बच्चों को डिजिटल दुनिया में सुरक्षित और आत्मनिर्भर बनाने के लिए सरकार, सामाजिक संस्थाओं और समाज को एक साथ मिलकर काम करना होगा। साइबर सुरक्षा सिर्फ एक तकनीकी मुद्दा नहीं है, बल्कि इससे प्रभावित लोगों को मानसिक और भावनात्मक संबल देना बेहद जरूरी है।"
— निर्मला भूरिया, मंत्री, महिला एवं बाल विकास विभाग
इस पहल से इंदौर ही नहीं, बल्कि आसपास के क्षेत्रों की महिलाओं और बच्चों को डिजिटल सुरक्षा का एक सुरक्षित और भरोसा-योग्य माध्यम मिलेगा।












