यूपी में पढ़ाई का खर्च और हॉस्टल फीस चुकाने के लिए खून बेचने को मजबूर छात्र: स्टिंग ऑपरेशन पर कांग्रेस का बड़ा हमला
उत्तर प्रदेश के प्रयागराज से एक बेहद दर्दनाक और चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां आर्थिक तंगी से जूझ रहे प्रतियोगी छात्र अपनी पढ़ाई और हॉस्टल का खर्च उठाने के लिए अपना खून बेचने को मजबूर हैं। एक हालिया स्टिंग ऑपरेशन के खुलासे के बाद मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की सरकार पर तीखा हमला बोला है।
स्टिंग ऑपरेशन में क्या खुलासे हुए?
सामने आई रिपोर्ट और खुलासों के अनुसार, प्रयागराज के प्रमुख मेडिकल संस्थानों और ब्लड बैंकों के बाहर दलालों का एक ऐसा सिंडिकेट सक्रिय है जो गरीब और आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों को निशाना बनाता है।
- दलालों का जाल: ये दलाल हॉस्टल और कमरों में रहने वाले ऐसे छात्रों की तलाश करते हैं जो नीट (NEET), एसएससी (SSC) या अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं और आर्थिक तंगी से गुजर रहे हैं।
- फर्जी दस्तावेज: मजबूर छात्रों के फर्जी कागजात और डॉक्यूमेंटेशन तैयार कराए जाते हैं ताकि ब्लड बैंक या अस्पताल में खून आसानी से बेचा जा सके।
- आवृत्ति और मजबूरी: पेट की आग और पढ़ाई जारी रखने की जिद में छात्र महीने में 4-4 बार तक अपना खून बेचने को मजबूर हैं।
- आर्थिक लाभ: एक यूनिट ब्लड बेचने पर छात्रों को 4 से 5 हजार रुपये मिलते हैं, जिसमें से प्रोसेसिंग और दलालों के कट के बाद छात्रों के हाथ बहुत कम राशि लगती है।
छात्रों की व्यथा
स्टिंग के दौरान कई नीट और एसएससी की तैयारी करने वाले छात्रों ने दर्द बयां किया कि उनके पिता किसान हैं या परिवार की आर्थिक स्थिति इतनी मजबूत नहीं है कि वे महंगी कोचिंग फीस और हॉस्टल/मेस का खर्च उठा सकें। कमरे का किराया और पढ़ाई का खर्च बचाने के लिए वे अपना खून बेचने जैसा जोखिम उठाने को विवश हैं, क्योंकि उनका मानना है कि “खून तो फिर बन जाएगा, लेकिन पढ़ाई का मौका दोबारा नहीं मिलेगा।”
कांग्रेस पार्टी और नेतृत्व का तीखा प्रहार
इस पूरे घटनाक्रम पर उत्तर प्रदेश कांग्रेस के प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम (@AdvRajendraPal) और पार्टी के आधिकारिक हैंडल से सरकार पर करारा प्रहार किया गया है। कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि उत्तर प्रदेश की बीजेपी सरकार सिर्फ झूठे विकास के दावे और बड़े-बड़े विज्ञापन देती है, जबकि जमीनी हकीकत यह है कि राज्य का युवा और छात्र दांव पर लगा हुआ है।
पार्टी ने यह भी कहा कि एक तरफ जहां छात्र अपनी फीस भरने के लिए अपना खून बेचने को मजबूर हैं, वहीं दूसरी तरफ पेपर लीक जैसी घटनाओं ने युवाओं के भविष्य को अंधकार में धकेल दिया है।
यह मामला प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था, रोजगार के अवसरों और शिक्षा की लागत पर गंभीर सवाल खड़े करता है। एक तरफ जहां सरकारें युवाओं को सशक्त बनाने के दावे करती हैं, वहीं प्रयागराज की इस घटना ने सिस्टम के दावों की पोल खोलकर रख दी है।












