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अपडेटेड: अक्टूबर 2026 | नई दिल्ली / लखनऊ
यूपी में दलित व वंचित छात्रों की स्कॉलरशिप में कटौती पर कांग्रेस का बड़ा हमला: केंद्र की राशि आधी हुई, 5 लाख छात्र वंचित!
“2023-24 में मिले 674.83 करोड़ के मुकाबले 2024-25 में सिर्फ 366.02 करोड़ रुपये जारी किए गए। यूपी के कॉलेजों में जानबूझकर आवेदनों को अटकाने और खारिज करने के कारण लाखों गरीब छात्र पढ़ाई छोड़ने को मजबूर।” — एआईसीसी यूपी प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम
मुद्दे की गंभीरता और मुख्य तथ्य
उत्तर प्रदेश में अनुसूचित जाति (SC) और वंचित वर्ग के उच्च शिक्षा हासिल कर रहे लाखों छात्रों के भविष्य पर अनिश्चितता के बादल मंडरा रहे हैं। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (@INCIndia) ने केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार पर निशाना साधते हुए आंकड़े जारी किए हैं, जिनसे स्पष्ट होता है कि SC पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति (SC Post-Matric Scholarship) के लिए दिए जाने वाले केंद्रीय बजट में करीब 50 प्रतिशत की भारी कटौती की गई है।
नई दिल्ली में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में यूपी कांग्रेस प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम (@AdvRajendraPal) ने केंद्र और राज्य सरकार पर सीधा हमला बोला। उन्होंने कहा कि एक तरफ सरकार सामाजिक न्याय और बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर के सपनों को पूरा करने की बातें करती है, वहीं दूसरी तरफ दलित, शोषित और पिछड़े समाज के बच्चों को उच्च शिक्षा से बेदखल करने के लिए वित्तीय बजट में आधी कटौती कर दी गई है।
Congress
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यूपी में छात्रों की स्कॉलरशिप में कटौती की जा रही है।
- SC पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति: केंद्र की तरफ से 2023-24 में 674 करोड़ 83 लाख रुपये मिले थे।
- 2024-25 में: इसे आधा कर 366 करोड़ 2 लाख रुपये कर दिया गया।
- स्वीकारोक्ति: CM योगी भी इस बात को स्वीकार कर चुके हैं कि राज्य में 5 लाख के करीब बच्चे छात्रवृत्ति से वंचित रह गए।
यूपी के ज्यादातर कॉलेजों में यही हालात हैं। छात्रों के स्कॉलरशिप एप्लीकेशन को जानबूझकर रिजेक्ट किया जाता है या फिर लटका दिया जाता है। ऐसे में मजबूरी में बच्चे पढ़ाई छोड़ने के लिए मजबूर हो जाते हैं।
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वित्तीय कटौती का विजुअल विश्लेषण (वर्षवार तुलना)
केंद्रीय अनुदान में भारी गिरावट (करोड़ रुपये में)
आंकड़े: उत्तर प्रदेश SC पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति आवंटन
-45.76% (लगभग 50% की गिरावट)
ग्राउंड रिपोर्ट: कॉलेजों में कैसे लटकाई जा रही छात्रवृत्ति?
कांग्रेस पार्टी द्वारा जारी रिपोर्ट और छात्र संगठनों द्वारा किए गए सर्वेक्षणों से पता चलता है कि यह केवल आंकड़ों में कटौती का मामला नहीं है, बल्कि प्रशासनिक स्तर पर भी गंभीर लापरवाही बरती जा रही है। यूपी के बहुसंख्यक उच्च शिक्षण संस्थानों में निम्नलिखित समस्याएं पाई गई हैं:
तकनीकी कमियों का बहाना
छात्रों के फॉर्म ‘PFMS Portal mismatch’, ‘Aadhaar NPCI linking issue’ या ‘Data Error’ जैसे तकनीकी कारणों का हवाला देकर अंतिम समय में निरस्त कर दिए जाते हैं।
कॉलेज फॉरवर्डिंग में देरी
कई निजी व सरकारी महाविद्यालयों के प्रशासनिक कार्यालयों द्वारा छात्रों के सत्यापित आवेदनों को समय सीमा के भीतर समाज कल्याण विभाग को फॉरवर्ड ही नहीं किया जाता।
पढ़ाई छोड़ने की मजबूरी
फीस जमा न कर पाने की स्थिति में कॉलेज प्रशासन गरीब दलित छात्रों के रोल नंबर रोक देता है या उन्हें परीक्षा में बैठने नहीं देता, जिससे वे पढ़ाई छोड़ने (Drop-out) को विवश हो रहे हैं।
अत्यधिक मानसिक तनाव
सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले प्रथम-पीढ़ी के शिक्षार्थी आर्थिक तंगी के कारण भारी कर्ज लेने या खून बेचने जैसी दर्दनाक परिस्थितियों में धकेले जा रहे हैं।
कांग्रेस नेता राजेंद्र पाल गौतम ने प्रेस वार्ता में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के पूर्व बयानों का हवाला देते हुए कहा, “खुद सूबे के मुख्यमंत्री यह मान चुके हैं कि राज्य के करीब 5 लाख बच्चे स्कॉलरशिप से वंचित रह गए हैं। जब सरकार खुद मान रही है कि लाखों बच्चे प्रभावित हैं, तो फिर बजट को आधा क्यों किया गया? यह वंचित समाज के प्रति सरकार की नीयत को दर्शाता है।”
छात्रवृत्ति प्रभाव कैलकुलेटर (Impact Estimator)
अपने जिले या कॉलेज क्षेत्र में स्कॉलरशिप में हुई कटौती के प्रभाव का अनुमान लगाएं।
उदाहरण के लिए: 100, 500, या 1000 छात्र
अनुमानित प्रभाव विश्लेषण:
*यह गणना 45.76% की केंद्रीय बजट कटौती के अनुपात पर आधारित अनुमान है।
राजनीतिक घटनाक्रम व बयानबाजी
आरोप
“भाजपा सरकार दलित और गरीब बच्चों के हाथों से किताबें छीनना चाहती है। जब बाबा साहेब ने शिक्षा को शेरनी का दूध कहा था, तो सरकार उस दूध की आपूर्ति ही बंद कर देना चाहती है। 674 करोड़ रुपये से घटाकर 366 करोड़ रुपये करना शिक्षा के अधिकार पर सीधा हमला है।”
सफाई
विभाग का तर्क रहता है कि आधार लिंकिंग में गड़बड़ी, फर्जी शिक्षण संस्थानों पर लगाम कसने और सीधे DBT व्यवस्था को चुस्त-दुरुस्त करने के कारण सत्यापन प्रक्रिया सख्त की गई है। हालांकि, छात्र संगठन इसे केवल टालमटोल मान रहे हैं।
जनसंदेश लाइव पोल (अपनी राय दें)
प्रश्न: क्या यूपी में SC छात्रों की स्कॉलरशिप में हुई कटौती के लिए प्रशासनिक अकर्मण्यता और बजट में की गई कमी मुख्य रूप से जिम्मेदार है?
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पाठकों की राय एवं टिप्पणियां
458 टिप्पणियां
रमेश कुमार (लखनऊ)
2 घंटे पहले
मैं खुद B.Sc द्वितीय वर्ष का छात्र हूँ। पिछले 8 महीनों से स्कॉलरशिप स्टेटस में ‘Pending at District Scholarship Committee’ ही दिखाई दे रहा है। कॉलेज वाले फीस जमा करने का दबाव बना रहे हैं।
संगीता गौतम (गोरखपुर)
4 घंटे पहले
कटौती का सबसे बुरा असर उन लड़कियों पर पड़ रहा है जो पहली बार अपने परिवार से निकलकर डिग्री कॉलेज में पढ़ रही हैं। अगर स्कॉलरशिप नहीं मिली तो घरवाले पढ़ाई छुड़वा देंगे।