1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में महारैली: भूपेश बघेल का हुंकार— “चलो दिल्ली! मिलेंगे हाथ से हाथ, बदलेंगे देश के हालात”
नई दिल्ली / रायपुर: देश की राजधानी दिल्ली का ऐतिहासिक रामलीला मैदान एक बार फिर से बड़े राजनीतिक संग्राम का साक्षी बनने जा रहा है। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस और INDIA गठबंधन के घटक दलों द्वारा 1 नवंबर 2026 को आयोजित की जा रही विशाल राष्ट्रीय महारैली को लेकर तैयारियां अंतिम चरण में हैं। इसी कड़ी में छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता भूपेश बघेल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर एक अत्यंत ऊर्जावान संदेश साझा करते हुए देश भर के कार्यकर्ताओं और आम जनता को दिल्ली पहुंचने का आह्वान किया है।
भूपेश बघेल का यह सोशल मीडिया पोस्ट तेजी से वायरल हो रहा है और कांग्रेस समर्थकों व INDIA गठबंधन के कार्यकर्ताओं में भारी उत्साह भर रहा है। इस पोस्ट के माध्यम से उन्होंने स्पष्ट संकेत दिया है कि 1 नवंबर का दिन देश की भावी राजनीति का एक नया अध्याय लिखेगा।
‘वोट बचाओ–देश बचाओ’ अभियान के तहत हो रहा है महारैली का आयोजन
कांग्रेस पार्टी और INDIA गठबंधन के शीर्ष नेताओं ने इस महारैली को ‘वोट बचाओ–देश बचाओ’ अभियान का नाम दिया है। विपक्ष का आरोप है कि मौजूदा शासनकाल में लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं, संवैधानिक संस्थाओं और निष्पक्ष चुनाव तंत्र पर गंभीर संकट मंडरा रहा है। विपक्षी नेताओं का कहना है कि देश के मतदाता अधिकारों की रक्षा, महंगाई, बेरोजगारी, सामाजिक सद्भाव और किसानों व युवाओं से जुड़े जमीनी मुद्दों को केंद्र सरकार के सामने मजबूती से रखने के लिए यह एक राष्ट्रव्यापी आंदोलन है।
रामलीला मैदान की इस महारैली में अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी, पार्टी की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा सहित INDIA गठबंधन के विभिन्न राष्ट्रीय और क्षेत्रीय क्षत्रप एक ही मंच पर नजर आएंगे। छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, बिहार और हरियाणा समेत देश के तमाम राज्यों से लाखों कार्यकर्ताओं के दिल्ली पहुंचने की संभावना जताई जा रही है।
1 नवंबर की महारैली की प्रमुख रूपरेखा:
- तारीख एवं समय: 1 नवंबर 2026, प्रातः 10:00 बजे से।
- स्थान: रामलीला मैदान, नई दिल्ली।
- मुख्य विषय: ‘वोट बचाओ–देश बचाओ’।
- आयोजक: कांग्रेस पार्टी एवं INDIA गठबंधन के सहयोगी दल।
- मुख्य जनसभा संबोधन: मल्लिकार्जुन खरगे, राहुल गांधी एवं गठबंधन के शीर्ष नेता।
छत्तीसगढ़ से हजारों कार्यकर्ताओं का दिल्ली कूच, भूपेश बघेल संभाल रहे कमान
छत्तीसगढ़ में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और प्रदेश कांग्रेस नेतृत्व लगातार बैठकों और संवाद कार्यक्रमों के माध्यम से राज्यभर के पदाधिकारियों व कार्यकर्ताओं को दिल्ली महारैली में शामिल होने के लिए लामबंद कर रहे हैं। रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग, सरगुजा, बस्तर और बिलासपुर संभागों से ट्रेन, बसों और निजी वाहनों के माध्यम से हजारों कार्यकर्ताओं के दिल्ली रवाना होने का सिलसिला शुरू हो चुका है।
भूपेश बघेल ने अपने हालिया बयानों में कहा है कि छत्तीसगढ़ का हर एक कार्यकर्ता और आम नागरिक देश में लोकतंत्र और संविधान को बचाने की इस निर्णायक लड़ाई में पूरी ताकत से कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा है। “हाथ से हाथ जोड़ो” और “बदलेंगे देश के हालात” का यह नारा केवल एक राजनीतिक पंक्तियाँ नहीं हैं, बल्कि यह जन-आक्रोश और जन-आकांक्षाओं का प्रतीक बन चुका है।
सुरक्षा चाक-चौबंद, तैयारियों का जायजा लेने पहुंचे के.सी. वेणुगोपाल
महारैली की भव्यता और व्यापकता को देखते हुए दिल्ली के रामलीला मैदान में तैयारियां जोरों पर हैं। कांग्रेस संगठन महासचिव के.सी. वेणुगोपाल ने स्वयं रामलीला मैदान का दौरा कर सुरक्षा, मंच व्यवस्था, वाटरप्रूफ पंडाल, साउंड सिस्टम और विभिन्न राज्यों से आने वाले प्रतिनिधियों के बैठने व ठहरने के प्रबंधों का जायजा लिया है।
दिल्ली पुलिस और केंद्रीय एजेंसियों ने भी रैली के मद्देनजर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं। मध्य दिल्ली क्षेत्र में यातायात प्रबंधन और सुचारू आवाजाही के लिए विशेष ट्रैफिक एडवाइजरी जारी की जा रही है ताकि आम जनता को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
राजनीतिक पारा चढ़ा: आरोपों और प्रत्यारोपों का दौर जारी
कांग्रेस और INDIA गठबंधन की इस महारैली की घोषणा के बाद से ही देश की राजनीति में जुबानी जंग तेज हो गई है। जहाँ विपक्ष इसे जनहित की आवाज और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए ऐतिहासिक पहल करार दे रहा है, वहीं सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी के नेताओं द्वारा इस रैली पर तीखे तंज कसे जा रहे हैं। भाजपा नेताओं का कहना है कि विपक्ष अपनी राजनीतिक जमीन खिसकते देख इस तरह के आयोजनों के माध्यम से देश का माहौल बिगाड़ने की कोशिश कर रहा है।
बहरहाल, इन तमाम राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोपों के बीच 1 नवंबर की यह महारैली 2026 की राजनीति के लिए एक मील का पत्थर मानी जा रही है, जो आगामी विधानसभा व राष्ट्रीय राजनीतिक समीकरणों को भी नया आकार दे सकती है।










