“18 घंटे काम करने वाले पीएम अब सीटें गिन रहे”: भूपेश बघेल का पीएम मोदी पर तंज, MLC चुनाव नतीजों के आंकड़ों पर उठाए सवाल
“18 घंटे काम करने वाले” प्रधानमंत्री अब MLC चुनाव की सीटें गिन रहे हैं और वो भी ग़लत ट्वीट कर रहे हैं।
— भूपेश बघेल (@bhupeshbaghel), पूर्व मुख्यमंत्री, छत्तीसगढ़ (सोशल मीडिया हैंडल ‘X’ पर पोस्ट)
नई दिल्ली / रायपुर: देश की राजनीति में एक बार फिर बयानों के तीर चलने शुरू हो गए हैं। छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के वरिष्ठ नेता भूपेश बघेल ने देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा राजनीतिक हमला बोला है। चार राज्यों में हुए हालिया विधान परिषद (MLC) चुनावों के नतीजों के बाद प्रधानमंत्री द्वारा किए गए सोशल मीडिया पोस्ट पर पलटवार करते हुए बघेल ने कहा कि देश के सर्वोच्च पद पर बैठे नेता अब स्थानीय स्तर के विधान परिषद चुनाव की सीटें गिनने में व्यस्त हैं और वह भी गलत आंकड़ों के साथ ट्वीट कर रहे हैं।
भूपेश बघेल का यह बयान ऐसे समय में आया है जब देश के चार प्रमुख राज्यों—उत्तर प्रदेश, बिहार, कर्नाटक और महाराष्ट्र की 28 विधान परिषद सीटों पर हाल ही में हुए चुनाव के नतीजे घोषित किए गए हैं। इन चुनावों में कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिला, लेकिन नतीजों के बाद सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में बयानों का दौर तेज हो गया है।
विवाद की जड़: पीएम मोदी का ट्वीट और बैलेट पेपर पर बहस
पूरे विवाद की शुरुआत उस वक्त हुई जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल ‘X’ पर एक पोस्ट साझा करते हुए विपक्षी दल कांग्रेस और विपक्ष के उस आक्रामक रवैये पर सवाल उठाया, जिसमें चुनाव प्रक्रियाओं और इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) पर सवाल खड़े किए जाते रहे हैं।
प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में उल्लेख किया था कि चार बड़े राज्यों की 28 विधान परिषद सीटों पर चुनाव सीधे बैलेट पेपर (Ballot Paper) के माध्यम से कराए गए थे। पीएम ने कटाक्ष करते हुए लिखा था कि विपक्ष लगातार बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग करता रहा है, लेकिन बैलेट पेपर से हुए इन चुनावों में भी जनता ने किस पार्टी को चुना और किसे पूरी तरह खारिज किया, यह आंकड़े खुद बयान कर रहे हैं। पीएम मोदी के इस ट्वीट में विपक्षी दलों, विशेषकर कांग्रेस के प्रदर्शन पर तंज कसा गया था।
भूपेश बघेल का करारा पलटवार: 3 प्रमुख बिंदु
भूपेश बघेल ने प्रधानमंत्री के इस पोस्ट पर तुरंत प्रतिक्रिया देते हुए कई गंभीर सवाल खड़े किए और तीन प्रमुख पहलुओं पर ध्यान केंद्रित किया:
- “18 घंटे काम” के दावे पर सवाल: पूर्व मुख्यमंत्री ने कटाक्ष करते हुए कहा कि बीजेपी और उनके समर्थक हमेशा पीएम मोदी के 18-18 घंटे काम करने की बात करते हैं, लेकिन अब देश के प्रधानमंत्री राज्य स्तरीय MLC चुनावों के छोटे-छोटे आंकड़ों की गिनती करने और उस पर सोशल मीडिया टिप्पणी करने में अपना समय बिता रहे हैं।
- आंकड़ों की सटीकता और गलत दावा: बघेल ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री ने अपने ट्वीट में सीटों और नतीजों के जो आंकड़े प्रस्तुत किए हैं, वे तथ्यात्मक रूप से सही नहीं हैं। कांग्रेस नेता का दावा है कि पीएम की टीम द्वारा दिए गए आंकड़े जल्दबाजी में तैयार किए गए और वे जमीनी नतीजों से मेल नहीं खाते।
- मुद्दों से ध्यान भटकाने का प्रयास: विपक्षी दल का तर्क है कि देश के सामने बेरोजगारी, महंगाई और आर्थिक चिंताओं जैसे बड़े राष्ट्रीय मुद्दे मौजूद हैं, लेकिन सत्ता पक्ष का शीर्ष नेतृत्व चुनावी आंकड़ों और तंज कसने की राजनीति में उलझा हुआ है।
MLC चुनाव नतीजे 2026: क्या कहते हैं आंकड़े?
चार राज्यों की 28 विधान परिषद सीटों पर हुए चुनाव नतीजे काफी मिला-जुला और रोचक परिदृश्य पेश करते हैं। चुनाव परिणामों के मुख्य आंकड़े इस प्रकार रहे हैं:
1. उत्तर प्रदेश (UP MLC Elections)
उत्तर प्रदेश की 11 शिक्षक और स्नातक सीटों पर हुए चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने 5 सीटों पर जीत हासिल की। हालांकि, सबसे बड़ा उलटफेर प्रधानमंत्री के अपने संसदीय क्षेत्र **वाराणसी** में देखने को मिला, जहां वाराणसी शिक्षक सीट पर समाजवादी पार्टी (SP) के प्रत्याशी ने बड़ी जीत दर्ज की। इसके अतिरिक्त, आगरा और झांसी की सीटों पर भी समाजवादी पार्टी और निर्दलीय प्रत्याशियों ने कड़ा मुकाबला दिया। इस चुनाव में कांग्रेस ने यूपी की सीटों पर अपने प्रत्याशी नहीं उतारे थे, जिस पर भी राजनीतिक विश्लेषकों का ध्यान गया है।
2. बिहार (Bihar MLC Elections)
बिहार में नतीजों ने कई बड़े दिग्गज नेताओं को चौंका दिया। पटना शिक्षक सीट से बीजेपी के 5 बार के एमएलसी नवल किशोर यादव को राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के उम्मीदवार से हार का सामना करना पड़ा। इसके अलावा प्रशांत किशोर की नवगठित ‘जन सुराज’ पार्टी ने दरभंगा शिक्षक सीट जीतकर विधान परिषद में अपनी पहली ऐतिहासिक दस्तक दी, जहां उन्होंने मौजूदा कांग्रेस प्रत्याशी को पराजित किया।
3. कर्नाटक (Karnataka MLC Elections)
कर्नाटक की सभी 4 सीटों पर भारतीय जनता पार्टी और जनता दल (सेक्युलर) यानी BJP-JDS गठबंधन का दबदबा देखने को मिला और उन्होंने इन चारों सीटों पर परचम लहराया। राज्य में सत्तारूढ़ कांग्रेस के लिए ये नतीजे चिंता का विषय रहे।
बैलेट पेपर बनाम EVM की बहस हुई और तेज
विपक्ष हमेशा से चुनाव आयोग और केंद्र सरकार पर EVM के दुरुपयोग का आरोप लगाता रहा है। कांग्रेस, सपा, आरजेडी और टीएमसी जैसे प्रमुख दल समय-समय पर यह मांग उठाते रहे हैं कि देश के सभी चुनाव पारंपरिक बैलेट पेपर से कराए जाने चाहिए।
जब MLC चुनाव के नतीजे आए, तो बीजेपी समर्थकों और सत्ता पक्ष ने इसे अपनी रणनीति के रूप में इस्तेमाल किया। बीजेपी का तर्क है: “जब चुनाव बैलेट पेपर से हुए, तब भी विपक्ष की हार हुई, जिससे यह स्पष्ट होता है कि जनता का विश्वास किसी तकनीक या मशीन पर नहीं, बल्कि सरकार की नीतियों और नीयत पर निर्भर करता है।”
दूसरी तरफ, भूपेश बघेल और कांग्रेस का कहना है कि विधान परिषद (शिक्षक और स्नातक क्षेत्रों) के चुनाव का मतदाता वर्ग आम चुनाव के मतदाताओं से अलग होता है। इसमें केवल पंजीकृत स्नातक और शिक्षक ही मतदान करते हैं। इसलिए इस सीमित और विशिष्ट चुनाव प्रक्रिया की तुलना देश के आम चुनाव या विधानसभा चुनावों से करना लोकतांत्रिक सिद्धांतों के खिलाफ है।
छत्तीसगढ़ और राष्ट्रीय राजनीति पर इसका प्रभाव
भूपेश बघेल द्वारा पीएम मोदी पर सीधा हमला बोलना यह दर्शाता है कि छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री अब राष्ट्रीय स्तर पर पार्टी के प्रमुख प्रवक्ता और आक्रामक चेहरे के रूप में अपनी भूमिका को विस्तार दे रहे हैं। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) में उनकी बढ़ती सक्रियता और विभिन्न राज्यों के प्रभार के बाद, बघेल लगातार केंद्रीय नेतृत्व और पीएम मोदी को सीधे निशाने पर ले रहे हैं।
छत्तीसगढ़ में भारतीय जनता पार्टी के स्थानीय नेताओं ने भी भूपेश बघेल के इस ट्वीट का विरोध किया है। राज्य बीजेपी नेताओं का कहना है कि लोकतंत्र में चुनाव चाहे कोई भी हो—ग्राम पंचायत से लेकर संसद तक—एक जनप्रतिनिधि और राष्ट्रीय नेता का अधिकार है कि वह जनता के जनादेश का सम्मान करे और नतीजों पर अपनी बात रखे।
भूपेश बघेल का ’18 घंटे काम’ वाला तंज और पीएम मोदी के आंकड़ों को चुनौती देना केवल एक ट्वीट का जवाब भर नहीं है, बल्कि यह आगामी राष्ट्रीय व राज्यीय चुनावी बहसों की एक झलक पेश करता है। चुनाव प्रणाली, बैलेट पेपर की विश्वसनीयता और नेताओं के बयानों को लेकर शुरू हुआ यह वाकयुद्ध आने वाले दिनों में और अधिक तीखा होने के संकेत दे रहा है।










