अर्नब चक्रवात से फसलों की तबाही: पूर्व सीएम भूपेश बघेल का साय सरकार पर करारा हमला, कहा- नमी के नाम पर होगा किसानों का शोषण
भूपेश बघेल का सोशल मीडिया पोस्ट: किसानों की चिंता या प्रशासनिक तंत्र पर सवाल?
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने अपने आधिकारिक X हैंडल से राज्य के वर्तमान जमीनी हालात और धान खरीदी केंद्रों की व्यवस्था पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए लिखा:
पूर्व मुख्यमंत्री का यह बयान ऐसे समय में आया है जब पूरे प्रदेश में बस्तर से लेकर सरगुजा संभाग तक चक्रवात ‘अर्नब’ का असर देखा जा रहा है। खेतों में खड़ी धान की फसलें गिर गई हैं और जो फसलें कटकर खलिहानों में रखी थीं, वे जलभराव और बारिश के कारण पानी में भीग चुकी हैं। बघेल का आरोप है कि सरकारी व्यवस्था में पहले से ही व्याप्त ढिलाई के बीच अब नमी का नया बहाना बनाकर किसानों को परेशान किया जाएगा।
चक्रवात ‘अर्नब’ का प्रकोप: खेती-किसानी पर गहराया संकट
अक्टूबर के अंतिम सप्ताह में आए चक्रवाती तूफान ‘अर्नब’ के कारण छत्तीसगढ़ के मैदानी और पहाड़ी दोनों इलाकों में मौसम में भारी बदलाव दर्ज किया गया है। हवा की तेज रफ्तार और मुसलाधार बारिश ने धान उत्पादक किसानों के सामने बड़ा संकट खड़ा कर दिया है।
1. फसलों में नमी की मात्रा बढ़ना
धान की कटाई के समय धूप का होना अति आवश्यक माना जाता है ताकि अनाज में नमी का प्रतिशत 17% या उससे कम बना रहे। लगातार हो रही बारिश और बादलों के जमावड़े की वजह से फसलों में नमी का स्तर मानक सीमा से काफी ऊपर चला गया है। इससे धान के दानों में कालापन आने, अंकुरित होने और सड़ने का खतरा बढ़ गया है।
2. गुणवत्ता में गिरावट और रिजेक्शन की आशंका
जब नमी के कारण धान की गुणवत्ता प्रभावित होती है, तो सरकारी उपार्जन केंद्रों (समर्थन मूल्य केंद्रों) पर तैनात सर्वेयर और केंद्र प्रभारी नमी मापक यंत्र (Moisture Meter) का हवाला देकर किसानों की उपज खरीदने से इनकार कर देते हैं। बघेल का कहना है कि इसी स्थिति का फायदा उठाकर बिचौलिए और भ्रष्ट अधिकारी किसानों से औने-पौने दामों में धान बेचने या प्रति क्विंटल अतिरिक्त धान काटने का दबाव बनाते हैं।
- कटाई में देरी: खेतों में जलभराव के कारण हार्वेस्टर और मजदूर काम नहीं कर पा रहे हैं।
- नमी मानक: छत्तीसगढ़ में धान खरीदी के लिए अधिकतम 17% नमी की सीमा तय की जाती है, जबकि वर्तमान में नमी 22% से 25% तक पहुंचने का अनुमान है।
- अतिरिक्त कटौती का डर: पिछले सत्रों में भी किसानों को नमी के नाम पर प्रति बोरा 1 से 2 किलो अतिरिक्त धान देने के लिए मजबूर करने के आरोप लगते रहे हैं।
15 नवंबर से शुरू हो रही धान खरीदी: सरकार के सामने दोहरी चुनौती
विष्णुदेव साय सरकार ने प्रदेश में 15 नवंबर 2026 से समर्थन मूल्य पर धान की खरीदी शुरू करने का ऐलान किया है। हालांकि, चक्रवात अर्नब के कारण उत्पन्न परिस्थितियों ने सरकार और सहकारिता विभाग के सामने कई बड़ी चुनौतियां खड़ी कर दी हैं:
- खरीदी केंद्रों में सुखाने (Drying) और तिरपाल की व्यवस्था: क्या उपार्जन केंद्रों पर गीले धान को सुरक्षित रखने और सुखाने के लिए पर्याप्त ड्रेनेज और कवरिंग मैटेरियल उपलब्ध है?
- नमी मापक मानकों में छूट की मांग: किसान संगठनों और विपक्षी दलों की ओर से यह मांग उठने लगी है कि प्राकृतिक आपदा को देखते हुए इस वर्ष नमी के मानकों में ढील दी जानी चाहिए।
- पारदर्शी नाप-तौल एवं टोकन व्यवस्था: कटाई पिछड़ने की स्थिति में उपार्जन केंद्रों पर किसानों की भारी भीड़ जमा हो सकती है, जिससे टोकन वितरण और खरीदी पारदर्शी बनाए रखना मुश्किल होगा।
राजनीतिक गरमाहट: कांग्रेस और भाजपा के बीच वार-पलटवार
भूपेश बघेल के इस बयान के बाद राज्य की राजनीति में भूचाल आ गया है। कांग्रेस जहां किसानों के अधिकारों, मुआवजे और नमी मानकों में छूट को लेकर आक्रामक रुख अपना रही है, वहीं भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेताओं ने बघेल के आरोपों का जवाब देना शुरू कर दिया है।
कांग्रेस का कहना है कि प्रदेश की सरकार को तत्काल गिरदावरी का पुनर्मूल्यांकन कराकर प्रभावित किसानों के लिए राहत पैकेज और फसल बीमा क्षतिपूर्ति का आंकलन करना चाहिए। साथ ही, 15 तारीख से शुरू होने वाली खरीदी में भ्रष्ट अधिकारियों पर लगाम लगाने के लिए विशेष निगरानी समितियां गठित की जानी चाहिए ।
दूसरी ओर, सरकार के प्रतिनिधियों का दावा है कि राज्य सरकार किसानों के हितों के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उपार्जन केंद्रों पर किसानों को किसी भी प्रकार की परेशानी नहीं होने दी जाएगी और नमी की जांच पूरी तरह से पारदर्शी एवं वैज्ञानिक तरीके से की जाएगी ।
किसानों के लिए क्या हैं रास्ते?
कृषि विशेषज्ञों और विशेषज्ञों का मानना है कि आपदा की इस स्थिति में किसानों को निम्नलिखित सावधानियां बरतनी चाहिए:
- फसल सुखाने पर ध्यान: जिन किसानों की फसल कट चुकी है, वे उसे खलिहानों में तिरपाल से ढककर रखें और हवा लगते ही सुखाने की प्रक्रिया शुरू करें।
- फसल बीमा का दावा: प्राकृतिक आपदा से हुए नुकसान की सूचना 72 घंटे के भीतर संबंधित बीमा कंपनी और कृषि विभाग को दें ताकि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत मुआवजा मिल सके।
- सामूहिक शिकायत दर्ज कराना: यदि खरीदी केंद्र पर नमी या गुणवत्ता के नाम पर अनुचित कटौती या रिजेक्शन की स्थिति बनती है, तो तुरंत नोडल अधिकारी या जिला विपणन अधिकारी से शिकायत करें।
छत्तीसगढ़ की अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार खेती-किसानी है और धान यहां की पहचान है। चक्रवात ‘अर्नब’ ने दिवाली और धान खरीदी के ऐन पहले किसानों की मेहनत पर पानी फेरने का काम किया है। भूपेश बघेल के बयान ने यह स्पष्ट कर दिया है कि आगामी दिनों में धान खरीदी का मुद्दा प्रदेश की राजनीति का केंद्र बिंदु रहने वाला है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि राज्य की साय सरकार किसानों को प्राकृतिक आपदा से उबारने और सरकारी तंत्र द्वारा संभावित शोषण से बचाने के लिए क्या ठोस कदम उठाती है ।
Ashish Sinha
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