Advertisement

स्वतंत्रता दिवस पर हिंदी साहित्य परिषद की गोष्ठी सम्पन्न

स्वतंत्रता दिवस पर हिंदी साहित्य परिषद की गोष्ठी सम्पन्न

 

प्रभा सिंह यादव/ब्यूरो चीफ/सरगुजा//  स्वतंत्रता दिवस पर हिंदी साहित्य परिषद सरगुजा इकाई की कवि गोष्ठी वन संरक्षक भवन में शायरे शहरे यादव विकास के मुख्य अतिथ्य, वरिष्ठ साहित्यकार मीना वर्मा, पूर्णिमा पटेल,एसबी पांडे के विशिष्ट अतिथ्य व हिंदी साहित्य परिषद अध्यक्ष विनोद हर्ष की अध्यक्षता में संपन्न हुई। इस अवसर पर मुख्य अतिथि शायरे शहर यादव विकास ने अपनी नज्म- ‘‘राहगीरों को अंधेरों से निकलने दीजिए, आशिया मेरा गर जलता है जलने दीजिए’’ सुनाकर शमां बांध दिया। वरिष्ठ कवियित्री मीना वर्मा ने गंभीर रचना ‘‘वह लाल बैग आज उदास है,कोने में पड़ी चुपचाप बदहवास है’’ का पाठ किया। कवि श्याम बिहारी पांडे ने- ‘‘भारत मां के वीर सपूतों ने खुशियां दिलवाई हैं, वर्षों की त्याग तपस्या से यह आजादी आई है’’ सुनाकर देशभक्ति का माहौल बना दिया।

हिंदी साहित्य परिषद अध्यक्ष कवि विनोद हर्ष ने देशवासियों को स्वतंत्रता दिवस की बधाई देते हुए देशभक्ति पर शानदार रचना सुनाकर सबको देशभक्ति से ओतप्रोत कर दिया। कवियित्री पूर्णिमा पटेल ने देशभक्ति पर शानदार गीत सुनाकर सबका मन मोह लिया। वरिष्ठ कवि अंजनी सिन्हा ने ‘‘आओ एक साथ हम प्रण करें, जिए तो राष्ट्र के लिए मरे तो राष्ट्र के लिए’’ सुंदर भावों से सजी रचना सुनाई। वरिष्ठ साहित्यकार देवेंद्र नाथ दुबे ने देशभक्ति पर अपनी सुंदर रचना प्रस्तुत कर कार्यक्रम में चार चांद लगा दिया। कवि संतोष सरल ने- ‘‘जब जब तुमको देश पुकारे,बिन सोचे दौड़ के तुम आना.. भारत माता के आह्वान पर सब कुछ छोड़ के तुम आना’’ सुना कर देशभक्ति का शमां बांध दिया।

Gemini_Generated_Image_fohysbfohysbfohy
WhatsApp-Image-2026-03-12-at-6.48.17-PM-1-298x300 (1)
sjjj

कवि मुकुंद लाल साहू ने-‘‘शीश समर्पित कर दिए रहे किंतु गुमनाम, वीर शहीदों को करें बारंबार प्रणाम’’ दोहा सुनाकर देशभक्ति का अलख जगाया। साहित्यकार दिग्विजय सिंह तोमर ने- ‘आहा संप्रदाय निर्मल निर्झरणी, पावन सलिल सुधा निर्वरणी’ सुंदर पंक्तियां प्रस्तुत की। कवियित्री पूनम दुबे ने- ‘लहरा रहा तिरंगा यह जिसकी बदौलत है, जो मौत से खेले हैं यह उनकी मोहब्बत है’ सुंदर देश भक्ति गीत प्रस्तुत किया। कवि प्रकाश कश्यप ने- ‘निराशा के अंधेरों को चलो मिलकर भगाते हैं, दीया उम्मीद का यारों हर एक दिल में जलाते हैं’’ की सुंदर प्रस्तुति दी। कवियित्री अर्चना पाठक ने, ‘‘मना रहा उत्साह से अमृत महोत्सव देश, आजादी का पर्व है नूतन है परिवेश‘‘ की सुंदर प्रस्तुति दी। कवियित्री सीमा तिवारी ने- ‘‘भारत मां को फूलों से सजाएंगे, एक नया हिंदुस्तान बनाएंगे’’ सुना कर सबका मन मोह लिया।

कवियित्री आशा पांडे ने अपनी रचना- ‘‘देश की आजादी की खातिर मां के लालों ने जान गवाई है’’ सुना कर भाव विभोर कर दिया। कवियित्री माधुरी जायसवाल ने- ‘‘इस धरा के लिए इस गगन के लिए, हम जिएंगे मरेंगे वतन के लिए’’ की सुंदर प्रस्तुति दी। सरगुजिहा कवि राजेंद्र विश्वकर्मा ने- ‘‘मैं हों हिंदुस्तानी’’ सुंदर सरगुजिहा गीत प्रस्तुत किया। कवि राज नारायण द्विवेदी ने अपनी रचना ‘‘धधक रही ज्वाला मन में कैसे अंतर्मन को शांत करूं’’ सुनाई, कवि चंद्र भूषण मिश्र ने अपनी रचना में बदलता युग बदलता परिवेश की बात की। कवि अंबरीश कश्यप ने अपनी रचना, ‘‘क्या है स्वतंत्रता का महत्व सब को यह समझाना है, 15 अगस्त का पर्व हमें मिलजुल कर आज मनाना है’’ की सुंदर प्रस्तुति दी। कार्यक्रम का संचालन हिंदी साहित्य परिषद वरिष्ठ उपाध्यक्ष कवि देवेंद्र नाथ दुबे ने किया।

banar-02

file_0000000093d882119d122d54d9d757b5
WhatsApp Image 2026-08-14 at 23.12.06
WhatsApp Image 2026-08-14 at 23.50.38
WhatsApp Image 2026-08-14 at 23.50.39
WhatsApp Image 2026-08-14 at 23.50.39 (1)
WhatsApp Image 2026-08-14 at 23.50.40
WhatsApp Image 2026-08-14 at 23.50.40 (1)
WhatsApp-Image-2026-08-15-at-00.21.47