
वक्री शनि के साथ 148 साल बाद 10 जून को कंकणाकृती का सूर्य ग्रहण*
*वक्री शनि के साथ 148 साल बाद 10 जून को कंकणाकृती का सूर्य ग्रहण*
खरोरा —-: जेष्ठ मास कृष्ण पक्ष में 10 जून को 16 दिन में दूसरा ग्रहण होगा ।ज्योतिषियों का कहना है कि यह ग्रहण 148 साल बाद वक्री शनि के साथ कंकनाकृति का होगा ।भारत में दिखाई नहीं देने के कारण इसका असर भारत व राशियों पर नही होगा। यह ग्रहण उत्तरी अमेरिका के पूर्वी भाग उत्तरी एशिया उत्तरी अटलांटिक महासागर में दिखाई देगा ।खरोरा के ज्योतिषाचार्य पंडित धनंजय शर्मा के अनुसार यह ग्रहण भारत के समयानुसार दोपहर 1:42 से शाम 6:43 तक लगेगा। इससे पहले 26 मई को भारत के पूर्वी क्षेत्र ,पश्चिम बंगाल में चंद्रग्रहण वैशाख पूर्णिमा को दिखाई दिया था। आने वाला सूर्य ग्रहण भी भारत में अदृश्य है इसलिए उसका कोई भी असर मान्य नहीं होगा ।राशि पर भी कोई असर नही होगा। इस बार सूर्य ग्रहण के साथ शनि जयंती भी है शनि के अपनी स्वयं की राशि मकर में रहते एवं शनि जयंती के साथ मकर में वक्री शनिके साथ यह सूर्य ग्रहण इससे 148 साल पहले 26 मई 1873 में हुआ था ।बृहद संहिता राहुचाराध्याय के अनुसार यदि वृषभ में सूर्य चंद्र ग्रहण होता है तो गौ का पालन करने वाले और पूजनीय मनुष्यों को पीड़ित करता है। यह सूर्य ग्रहण वृषभ राशि में होगा एवं नक्षत्र मृगशिरा होगा ।इस साल शनि भी मकर राशि में वक्री है एवं निच का मंगल कर्क राशि मेंहै । शनि के मकर राशि में वक्री रहते हैं इससे पहले दो ग्रहण सन 1962 में और 17 जुलाई 1965 को उपच्छाया चंद्र ग्रहण 25 जुलाई 1965 को सूर्य ग्रहण हुए थे। यदि ज्येष्ठ अमावस्या में सूर्य ग्रहण पूर्णिमा पर चंद्रग्रहण होतो ब्राह्मण धान्य वृष्टि उत्तर दिशा में रहने वाले मनुष्य इन सब को पीड़ा होती है। पंडित धनंजय शर्मा के अनुसार 10 जून के आसपास कोई बड़ी प्राकृतिक आपदा आने की आशंका है। जिसमें भूकंप और सुनामी सम्भावित है ।बृहद संहिता की मान्यता है कि यदि 1 महीने में सूर्य चंद्र ग्रहण हो को सेनाओं में हलचल मचने या शस्त्र प्रहार से राजाओं का नाश होता है। लेकिन इससे घबराने की आवश्यकता इसलिए नहीं है कि दोनों ग्रहण हमारे देश में दिखाई नहीं देंगे इसलिए यह वैसा असर नहीं करेगा जैसी संहिता कहती है।
खरोरा से लालजी वर्मा की रिपोर्ट====










