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चीन का आरोप, अमेरिका दक्षिण चीन सागर में ‘पनडुब्बी की टक्कर’ मामले में सच नहीं बता रहा

चीन का आरोप, अमेरिका दक्षिण चीन सागर में ‘पनडुब्बी की टक्कर’ मामले में सच नहीं बता रहा

चीन ने एक बार फिर अमेरिका पर आरोप लगाया है कि वो पिछले महीने साउथ चाइना सी में एक नौसैनिक पनडुब्बी की टक्कर के बारे में खुलकर सारी बात नहीं बता रहा है.

पिछले महीने अमेरिका के एक न्यूक्लियर सबमरीन की टक्कर की इस घटना के बारे में अमेरिकी अधिकारियों ने तब कहा था कि यूएसएस कनेक्टिकट नाम की ये पनडुब्बी पानी के भीतर किसी अज्ञात वस्तु से टकरा गई थी, जिससे उनके कुछ नौसैनिक घायल हो गए.

अमेरिकी नौसेना की ओर से जारी बयान में ना तो जगह की जानकारी दी गई और ना ही ये बताया गया कि कितने लोग घायल हुए.

लेकिन तब कुछ अधिकारियों के हवाले से अमेरिकी मीडिया में ये भी ख़बर चली थी कि ये टक्कर दक्षिण चीन सागर में अंतरराष्ट्रीय जल क्षेत्र में हुई और इसमें 11 नौसैनिक घायल हुए.

कुछ अधिकारियों के हवाले से ये भी ख़बर चली कि दुर्घटना के वक्त पनडुब्बी अपने नियमित अभियान पर थी और नेवी ने सुरक्षा को ध्यान में रखकर इस घटना को पहले सार्वजनिक नहीं किया.

अमेरिकी नौसेना ने घटना के लगभग एक महीने बाद फिर से एक बयान जारी किया है, जिसमें कहा गया है कि यूएसएस कनेक्टिकट की इस घटना की जाँच में पता चला है कि ये पनडुब्बी “एशिया-प्रशांत क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय जल क्षेत्र में काम करते हुए समुद्र के भीतर एक नामालूम टीले (अनचार्टर्ड सीमाउंट) पर रूक गई”.

चीन सरकार ने अब इसके बाद इसी घटना को लेकर अमेरिका पर पारदर्शिता और ज़िम्मेदारी नहीं दिखाने का आरोप लगाया है.

‘क्या कर रही थी पनडुब्बी’

चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता वांग वेनबिन ने मंगलवार को अपनी दैनिक ब्रीफ़िंग में कहा कि अमेरिका को इस बारे में पूरा ब्यौरा देना चाहिए.

वांग वेनबिन ने कहा कि अमेरिका ने अपने बयान में जान-बूझकर दुर्घटनास्थल की जगह को एशिया-प्रशांत क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय जल क्षेत्र बताया, और गंभीर चिंता की बातों का जवाब नहीं दिया, जैसे कि वो पनडुब्बी वहाँ क्या कर रही थी, और क्या उससे किसी और देश की जल सीमा में किसी तरह का कोई परमाणु लीकेज हुआ, और क्या इससे समुद्र के पर्यावरण को कोई नुक़सान पहुँचा है.

प्रवक्ता ने कहा, “हम एक बार फिर अमेरिका से उस घटना का विस्तार से ब्यौरा देने का आग्रह करते हैं.”

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वांग वेनबिन ने कहा, “ज़रूरी बात ये है कि अमेरिका को हर जगह जंगी जहाज़ और लड़ाकू विमान भेजना बंद करना चाहिए, अपनी सैन्य धौंस दिखाना बंद करना चाहिए और दूसरे देशों की सुरक्षा का उल्लंघन नहीं करना चाहिए. अगर ऐसा नहीं होता, तो ऐसी घटनाएँ बार-बार होंगी.”

इस घटना के बारे में सिंगापुर स्थित एक सुरक्षा विशेषज्ञ अलेक्ज़ेंडर नील ने बीबीसी को बताया था कि जिस संख्या में लोग घायल हुए हैं, उससे ऐसा लगता है कि ये पनडुब्बी “बहुत तेज़ी से” जा रही थी और “किसी बड़ी चीज़” से टकराई.

उन्होंने कहा कि ऐसी घटना “सामान्य नहीं है लेकिन ऐसा नहीं कि पहले नहीं हुई है” और इससे पता चलता है कि ये इलाक़ा सैन्य गतिविधियों के हिसाब से कितना व्यस्त है.

अलेक्ज़ेंडर नील ने कहा, “साउथ चाइना सी में दुनिया के कई देशों के नौसैनिक जहाज़ भरते जा रहे हैं. पानी के ऊपर शक्ति प्रदर्शन तो दिखता रहता है, लेकिन पानी के भीतर जो सक्रियता है वो नज़र नहीं आती.”

बाद में बताया गया कि ये पनडुब्बी गुआम की ओर जा रही था जो अमेरिकी क्षेत्र है.

दक्षिण चीन सागर विवाद

दक्षिण चीन सागर इंडोनेशिया और वियतनाम के बीच पड़ने वाला समंदर का एक हिस्सा है.

इस पर चीन, फिलीपींस, वियतनाम, मलेशिया, ताइवान और ब्रुनेई अपना दावा करते रहे हैं.

हाल के सालों में चीन ने वहाँ कृत्रिम रूप से बनाए गए टापुओं पर सैन्य अड्डे स्थापित कर लिए हैं. वो दलील देता है कि इन इलाक़ों पर उसका सदियों पुराना अधिकार है.

लेकिन फिलीपींस के अलावा ब्रुनेई, मलेशिया, ताइवान और वियतनाम जैसे देश चीन के इन दावों पर आपत्ति जताते हैं.

इन देशों में इस इलाक़े को लेकर विवाद कई दशकों से जारी है, लेकिन हाल के सालों में इसे लेकर तनाव में तेज़ी से इज़ाफा हुआ है. इस दौरान समुद्र में कई बार टकराव हुए हैं.

क़ुदरती ख़ज़ाने से भरपूर इस समुद्री इलाक़े में जीवों की सैकड़ों प्रजातियाँ पाई जाती हैं.

ये प्रशांत महासागर और हिंद महासागर के बीच स्थित बेहद अहम कारोबारी इलाक़ा भी है. दुनिया के कुल समुद्री व्यापार का 20 फ़ीसदी हिस्सा यहाँ से गुज़रता है.

इस इलाक़े में अक़्सर अमेरिकी जंगी जहाज़ गश्त लगाते हैं, ताकि समुद्री व्यापार में बाधा न पहुँचे.

लेकिन, चीन इसे अमेरिका का आक्रामक रवैया कहता है.

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