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वाराणसी के नाविकों की सीएनजी से किस्मत में झूला

वाराणसी के नाविकों की सीएनजी से किस्मत में झूला

वाराणसी (उप्र), 24 जुलाई (भाषा) यहां गंगा में यात्रियों को ले जाने वाली 500 सीएनजी नौकाओं से न केवल वायु और जल प्रदूषण में कमी आ रही है, बल्कि नाविकों की आय भी दोगुनी हो गई है।

प्रधानमंत्री ने 7 जुलाई को अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी में 500 सीएनजी से चलने वाली नावें राष्ट्र को समर्पित की थीं।

गेल के उप महाप्रबंधक एन के द्विवेदी ने कहा कि डीजल से सीएनजी में परिवर्तन न केवल प्रदूषण को कम कर रहा है, बल्कि ईंधन की बेहतर बचत भी कर रहा है।

गेल ने वाराणसी नगर निगम के सहयोग से अपनी सामाजिक जिम्मेदारी पहल के तहत नावों को ईंधन कुशल सीएनजी में बदलने का कार्य किया है।

उन्होंने कहा कि अब तक 522 नावों को सीएनजी में बदला गया है और पर्यावरण को बचाने में मदद करने के लिए अधिक नावों को स्वच्छ ईंधन में स्थानांतरित करने के लिए रूपांतरण का काम तेज गति से चल रहा है।

वाराणसी नगर निगम में कुल 657 नाव पंजीकृत हैं।

द्विवेदी ने कहा कि स्थानीय नाविक अब फिलिंग स्टेशनों से प्रतिदिन 600 से 700 किलोग्राम सीएनजी खरीद रहे हैं।

बदलाव के बारे में बोलते हुए, यहां के एक नाविक रोहित साहनी ने कहा, “पहले मैं हाथ से चलने वाली नावें चलाता था जो कि अधिक काम और कम आय थी। आज हमारे पास दो नावें हैं और दोनों में सीएनजी इंजन लगे हैं।”

साहनी ने कहा कि उनकी आय अब लगभग दोगुनी हो गई है क्योंकि अधिक पर्यटक नौका विहार के लिए जाने का विकल्प चुनते हैं।

एक अन्य नाविक, राजकुमार साहनी, की भी ऐसी ही राय थी।

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उन्होंने कहा, “पहले डीजल इंजन से चलने वाली नाव से बहुत अधिक धुआं होता था, जिसके बारे में पर्यटक अक्सर शिकायत करते थे। अब सीएनजी इंजन के साथ, प्रदूषण और ईंधन की लागत दोनों भी लगभग आधी हो गई हैं, जिससे मेरी बचत बढ़ गई है।”

बीएचयू के पूर्व प्रोफेसर और पर्यावरण वैज्ञानिक, बीडी त्रिपाठी ने कहा, अतीत में, गंगा में चलने वाली डीजल इंजन वाली नौकाओं के कारण बहुत अधिक वायु और जल प्रदूषण होता था।

नाविकों ने अपनी नावों में पुराने जनरेटर इंजन का इस्तेमाल किया जिससे डीजल पूरी तरह से नहीं जलता था और पानी प्रदूषित हो जाता था, जिससे जलीय जीवन पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता था।

त्रिपाठी ने कहा कि पुराने डीजल इंजन से निकलने वाले धुएं से नाइट्रोजन ऑक्साइड, सल्फर और कार्बन जैसे जहरीले पदार्थ निकलते हैं, जिससे आंखों में जलन होती है, जिससे पर्यटकों की काफी शिकायतें आती हैं।

उन्होंने कहा कि नावों में लगाए जा रहे नए सीएनजी इंजनों से न के बराबर नुकसान होता है।

परियोजना प्रबंधक, वाराणसी स्मार्ट सिटी, सुमन कुमार राय ने दावा किया कि पर्यावरण के अनुकूल होने के अलावा, सीएनजी से चलने वाली नाव कम से कम 50 प्रतिशत किफायती है।

उन्होंने कहा कि डीजल या पेट्रोल इंजन वाली छोटी/बड़ी नाव में सीएनजी इंजन लगाने में करीब 2-2.5 लाख रुपये का खर्च आता है।

यहां के खिरकिया घाट पर दुनिया का पहला तैरता सीएनजी स्टेशन चालू हो गया है, जिसे पिछले साल दिसंबर से यहां “नमो घाट” के नाम से भी जाना जाता है।

दुनिया का पहला तैरता हुआ सीएनजी फिलिंग स्टेशन नमो (खिदकिया) घाट पर वाटर जेटी पर बनाया गया है। इसकी विशेषता यह है कि यह बाढ़ और तेज धाराओं में भी जल स्तर के साथ तालमेल बिठाते हुए तैरता रहेगा।”

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